नोवा नेचर सोसायटी को उत्कृष्ठ संस्था और शोभा मोहता और डा.मानसी पत्तेवार सामाजिक उत्थान के लिए सम्मान
- महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में हुआ विद्यार्थी, गौरव अलंकरण सम्मान समारोह का आयोजन
रायपुर। पिछले दो दशकों से वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और मानव-वन्यजीव द्वंद्व को कम करने की दिशा में पूरे प्रदेश में कार्य कर रही नोवा नेचर सोसायटी को महाराष्ट्र मंडल के गौरव अलकंरण सम्मान से नवाजा गया। बतादें कि नोवा नेचर की टीम सर्पों को पकड़ने और उन्हें बिना हानि पहुंचाए जंगलों में छोड़ने का कार्य करती है। वहीं शिक्षा, व्यवहार परिवर्तन और व्यक्तित्व विकास के क्षेत्र में 30 वर्षों से 20 हजार से अधिक छात्रों, शिक्षकों को प्रशिक्षित कर चुकी शोभा मोहता और गर्भसंस्कार, पेरेटिंग कोचिंग के जरिए गर्भवती माता को उचित मार्गदर्शन देने के लिए लेखिखा और डा. मानसी पत्तेवार को समाज सेवा के लिए सम्मानित किया गया। वहीं खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ठ प्रदर्शन के लिए वर्तिका क्षीरसागर और आय़ुष्मान कालेले सम्मानित हुए।

बतादें कि चौबे कालोनी स्थित महाराष्ट्र मंडल में रविवार, 23 अगस्त को गौरव अलंकरण और विद्यार्थी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। महाराष्ट्र मंडल द्वारा डॉ. भालेराव स्मृति सम्मान, विद्यार्थी सम्मान, गौरव अलकंरण, डॉ. अम्बेडकर स्मृति अस्पताल की सर्वोत्कृष्ठ नर्स का सम्मान, महिला उत्थान, समाज सेवा विशिष्ठ कार्य करने वालों का सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में अतिथि के रुप में पहुंचे छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर ने कहा कि रायपुर जैसे महानदर में अपने व्यस्त दिनचर्या और कार्यों के बीच समाज को एक सूत्र में पियोने का कार्य महाराष्ट्र मंडल बखूबी कर रहा है। पिछले कुछ समय से जेनजी, अल्फा जैसे शब्द हमारे जीवन में आए। कुछ दिन पहले दिल्ली में एक प्रदर्शन की रील्स और वीडियो तेजी से वायरल हुए। जिसके बाद सभी ने अपना-अपना तर्क किया। आज यहां बड़ी संख्या में युवा मौजूद है, आप सोशल प्लेटफार्म में शेयर होने वाले कंटेट की जांच करें, मंथन करें फिर उस पर कोई निर्णय करें। उन्होंने युवा साथियों से कहा कि हमको लगता है कि हमें खूब ऊंचा उड़ाना है, खूब आगे जाना है, कई बार लगता है कि माता-पिता हमारे मार्ग में बाधा बन रहे है, लेकिन जिस प्रकार पतंग तब तक आसमान में उड़ती है, जब तक वह डोर से बंधी होती है। डोर छूटने के बाद वह जमीन में गिर जाती है। इसी तरह माता-पिता भी हमारी डोर है, आसमान में उड़ना है तो उनसे जुड़ा रहना ही होगा।

विशेष अतिथि की आसंदी से सरगुजा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. राजेन्द्र लाकपाले ने युवाओं से कहा कि आप नवीन टेक्नोलॉजी का अपनाए। आज के जरनेशन की यह बड़ी मांग और जरूरत है। परंतु आपकी सफलता में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से माता-पिता, गुरु, मित्र मंडली की भी बड़ी भूमिका हैं, मैं उनको भी अपनी शुभकामनाएं देता हूं कि आगे भी वह आपका ऐसी मार्गदर्शन करते रहें। उन्होने कहा कि आप अपनी तुलना किसी और से ना करें, आप अपनी तुलना करें कि कल के अपने आप से करें कि आप कल कैसे थे, क्या मैं उससे बेहतर कर सकता हूं। धीरे-धीरे आप में जो परिवर्तन आएगा और आप एक बेहतरीन की तरफ बढ़ेंगे।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने मंडल द्वारा सन् 1988-89 में शुरु किए गए इस सम्मान समारोह और उसके उद्देश्य की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि एक समय में रविवि जैसे संस्थान में विद्यार्थियों का सम्मान समारोह बंद हो गया था, तब महाराष्ट्र मंडल ने बच्चों के सम्मान की परंपरा शुरू की जो आज तक जारी है। कार्यक्रम का संचालन मंडल सचिव चेतन दंडवते और सहसचिव अजय पोतदार ने किया। आभार प्रदर्शन कार्यकारिणी सदस्य परितोष डोगनांवकर ने किया।