दिव्य महाराष्ट्र मंडल

महाराष्ट्र मंडल की महिला केंद्रों ने दी सुंदर मराठी हिंदी भजनों की प्रस्तुति

- शहीद मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव के दौरान महिला केंद्रों की आयोजन

- मंगला अरुण कुसरे की स्मृति में महिला केंद्र ने दी भजन की प्रस्तुति

रायपुर। प्रथम तुला वंदितो कृपाळा, गजानना गणराया.... मंगलमूर्ती माझे आई, मजला ठाव द्याव पायीं....  ओम जय शिव ओंकारा... आज गोकुळात रंग खेळतो हरी, राधिके, जरा जपून जा तुझ्या घरी... जैसे मराठी भजनों के साथ महाराष्ट्र मंडल की महिला केंद्रों की महिलाओं ने गजानन के साथ विठ्ठल और शिव के सुंदर भजनों की प्रस्तुति दी। वहीं दूसरी ओर महिलाओं ने देवी की स्तुति कर जोगवा गाया और महिलाएं  झूम उठी। मौका था महाराष्ट्र मंडल में आय़ोजित शहीद मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव में आयोजनों की श्रृंखला में हुए महिला केंद्रों की भजन प्रस्तुति का।

महाराष्ट्र मंडल की महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले ने बताया कि प्रतिवर्ष भी भांति इस वर्ष भी महिला केंद्रों की टीम ने गणेशोत्सव के दौरान 22 और 23 सितंबर को सुंदर भजनों की प्रस्तुति दी। यह कार्यक्रम मंगला अरुण कुसरे की स्मृति में आयोजित किया गया था।  जिसमें चौबे कॉलोनी, रोहिणीपुरम, डंगनिया, कोटा, वल्लभनगर, बूढ़ापारा, तत्यापारा, शंकर नगर और अवंती विहार की महिलाओं ने भजनों की प्रस्तुति दी।

तोपखानेवाले ने आगे बताया कि कार्यक्रम की शुरूआत श्री अथर्वशीर्ष के पाठ के साथ की गई। जिसके बाद केंद्र की महिलाओं ने गणपति वंदना प्रस्तुत किया। महिलाओं ने अशी चिक मोत्याची माळ, होती ग तीस तोळ्याची ग…. ’, ‘ वाजे मृदुंग टाळ वीणा.. ये रे नाचत गौरी गणा।  गणपती बाप्पा मोरया मंगलमूर्ती मोरया।’ ‘जय जय हे ओंकाराऔर ओम जय शिव ओंकारासहित हिंदी-मराठी भजनों की प्रस्तुति दी।

केंद्र की महिलाओं ने उधे ग अंबे उधे.... उधे ग अंबे उधे! होऊ दे सर्व दिशी मंगळ, चढवितो रात्रंदिन संबळके साथ जोगवा प्रस्तुत किया। मराठी जोगवा देवी को भेंट स्वरूप भिक्षा मांगने की एक परंपरा है, जिसमें भक्त देवी के नाम पर सूखा राशन या अनाज मांगते हैं और यह दान 'जोगता' और 'जोगातीन' के बीच बांटा जाता है।

यह देवी की पूजा का एक अंग है और विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान या देवी के विशेष मंगलवार और शुक्रवार को किया जाता है।