‘लोककला में श्रीगणेश’ में देखने मिली महाराष्ट्र की सांस्कृतिक परंपरा
- महाराष्ट्र गणेशोत्सव को राज्य महोत्सव का दर्जा मिलने के उपलक्ष्य में महाराष्ट्र मंडल में विशेष सांस्कृतिक आयोजन
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में महाराष्ट्र से आए कलाकारों ने भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की शुरूआत भगवान श्री गणेश के हाल में जोरदार प्रवेश के साथ हुई। भगवान गणेश के साथ उनकी दोनों पत्नियां रिद्धी और बुद्धि का भी सभागृह में प्रवेश किया। गजानना श्री गणराया…’ गीत के साथ आतिशबाजी और नृत्य प्रस्तुत कर भंडारा से आए कलाकारों ने खूब तालियां बटोरीं। महाराष्ट्र की समृद्ध लोक श्रीगणेश कला, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक वैभव को राज्य की सीमाओं से बाहर पहुंचाने के उद्देश्य से ‘लोक कला के श्रीगणेश’ के बेहतरीन आयोजन किया गया।
महाराष्ट्र मंडल में मेजर शहीद यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव में कार्यक्रमों के अंतर्गत कुमुदिनी वरवंडकर रंगमंच पर भैरी भवानी परफॉर्मिंग आर्ट्स की ओर से बेहतरीन सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में लोक कला के विभिन्न माध्यमों के जरिए महाराष्ट्र की भक्ति, श्रद्धा, लोक जीवन और सांस्कृतिक परंपराओं को लोगों को देखने- समझने का मौका मिला। महाराष्ट्र की इस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राज्य के बाहर व्यापक मंच मिले और कला- रसिकों को महाराष्ट्र की लोक कला का अनुभव प्राप्त हो, इसी उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।
कोकण क्षेत्र में गणेशोत्सव के दौरान गांवों और वाडियों में बाल्या नृत्य बहुत प्रसिद्ध है। इसमें पारंपरिक ढोल की थाप पर नर्तक विशेष मुद्रा में नृत्य करते हैं। जाखड़ी नृत्य एक ऊर्जावान और लयबद्ध लोक नृत्य है, जिसे गणेश आगमन और विसर्जन के दौरान ताल और संगीत के साथ प्रस्तुत किया जाता है। इसी तरह विदर्भ क्षेत्र में सार्वजनिक गणेशोत्सव के दौरान स्थानीय लोक गीतों, ढोल- ताशा और पारंपरिक सामूहिक नृत्यों की धूम रहती है।यही सब कुछ रंगमंच पर सधे अंदाज में देखने को मिला।
सांस्कृतिक कार्य, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता मंत्री एड. आशीष शेलार की संकल्पना और सांस्कृतिक कार्य विभाग के सचिव डॉ. किरण कुलकर्णी के मार्गदर्शन में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। सांस्कृतिक कार्य संचालनालय के संचालक प्रशांत संगीता कैलास खेडेकर ने रायपुर समीपस्थ क्षेत्रों के कला- रसिकों से बड़ी संख्या में उपस्थित होकर ‘लोक कला में श्रीगणेश’ इस विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद लेने का आह्वान किया है।