दिव्य महाराष्ट्र मंडल

अंताक्षरी के विजेता यादव समाज ने कहा... आसान नहीं होता है लक्ष्य... हासिल करने एकजुट होकर बढ़ाना पड़ता है हौसला

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 23 जुलाई की सुबह बहुत ही खास थी, तो संध्या रूमानी हो गई थी और रात उत्साह से सराबोर था। दरअसल, इसकी वजह महाराष्ट्र मंडल में आयोजित अंताक्षरी प्रतियोगिता थी। गीत—संगीत की मस्ती, नए—पुराने तरानों की कड़िया सुबह 9 बजे से रात 10 बजे तक ऐसे जुड़ती चली गईं कि लोग अपनी जगह नहीं छोड़ पाए।

महाराष्ट्र मंडल ने 23 जुलाई रविवार को खुशनुमा बनाने के लिए अंताक्षरी प्रतियोगिता का आयोजन किया था। एक ऐसा आयोजन जिसे देखकर हर कोई अभिभूत था। लोगों ने केवल टीवी पर इस तरह के आयोजनों को देखा था, लेकिन उन्हें महाराष्ट्र मंडल आकर सबकुछ अपने सामने होता नजर आया। 

सन एंड सन ज्वेलर्स द्वारा प्रायोजित इस अंताक्षरी प्रतियोगिता में वैसे तो 30 टीमों ने हिस्सा लिया था, जिसमें यादव समाज के प्रतिभागियों ने बेहतर तालमेल का परिचय देते हुए चैम्पियशिप का खिताब अपने नाम कर दिया। इस टीम में प्रिंटिंग कारोबार से जुड़े अजय यादव हैं जिन्हें धुन पहचाना बेहतर आता है, संगीत में डिप्लोमा किए लक्ष्मण यादव विसुअल के मास्टर हैं, सामाजिक सेवा करने वाली लक्ष्मी यादव गाने के बोल में पकड़ रखती हैं, तो हाउस वाइफ कुसुम यादव नए गीतों की पहचान में माहिर हैं। 

विजय लक्ष्य को हासिल करने इन्होंने पूरे एक सप्ताह मेहनत की, जिसके बाद प्रतियोगिता के मैदान में उतरे और कामयाबी की मंजिल को इन्होंने हासिल किया। अजय यादव ने बताया कि उन्हें इस प्रतियोगिता की जानकारी समाज के माध्यम से मिली, जिसके बाद तय किया गया कि उनकी टीम इस प्रतियोगिता में भाग लेगी। अजय ने बताया कि टीम में चार सदस्यों को चुनना था, तो पहले ही तय कर लिया गया कि अलग—अलग विषयों के जानकारों के साथ टीम बनाएंगे, ताकि बेहतर प्रदर्शन किया जा सके। 

टीम के दूसरे प्रतिभागी लक्ष्मण यादव ने बताया कि गीत—संगीत से सभी का नाता होता है, लेकिन प्रतियोगिता में उतरना सहज नहीं होता। इसलिए सामाजिक मीटिंग के जरिए तय किया गया कि कौन बेहतर कर सकता है। तब जाकर हमारी चार सदस्यों की टीम बन पाई और सभी ने लक्ष्य साधकर प्रतियोगिता में शामिल होन से पहले तक मेहनत की। 

लक्ष्मी यादव ने बताया कि प्रतियोगिता में शामिल होने की बात आई, तो समाज के सभी लोगों में उत्साह का संचार हो गया, लेकिन डगर कठिन थी। ऐसे में सांमजस्य बिठाकर चार लोगों की टीम बनाई गई, जिसका परिणाम सबके सामने है। 

वहीं, कुसुम यादव का कहना है कि गाना गुनगुनाना हर कोई कर सकता है, पर बात जब प्रतियोगिता की आती है, तो स्वाभाविक तौर पर धड़कने बढ़ जाती हैं, ऐसे में संयमित होकर टीम का हौसला बनाए रखना हर किसी की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि हमारी टीम ने इस बात का पूरा ख्याल रखा, नतीजतन कामयाबी मिली।