शिवाजी महाराज ने रायगढ़, सिंहगढ़ और पुरंदर जैसे अभेद्य किलो को जीता
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल रायपुर में शनिवार 6 जून का मंडल परिसर पर छत्रपति शिवाजी महाराज की सिहासनस्थ प्रतिमा की स्थापना की। इस अवसर पर शिवाजी महाराज द्वारा जीते गए किलो की जानकारी पर आधारित भव्य प्रदर्शनी मंडल की युवा समिति द्वारा लगाई गई। युवा समिति की समन्वयक डा. शुचिता देशमुख ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यपाल रमेन डेका जी ने मंडल परिसर पर प्रतिमा अनावरण के बाद प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने सभी किलो की जानकारी को रुचि लेकर पढ़ा और आयोजन को लेकर युवा समिति की बधाई दी। इस अवसर पर युवा समिति की ओर से शुचिता देशमुख और शुभम पुराणिक ने राज्यपाल को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत भी किया।
युवा समिति के शुभम पुराणिक ने बताया कि छत्रपति शिवाजी महाराज (1630-1680) मराठा साम्राज्य के संस्थापक और एक महान दूरदर्शी शासक थे। उन्होंने अपनी वीरता, छापामार युद्ध नीति और कुशल प्रशासन के बल पर शक्तिशाली मुगल साम्राज्य को कड़ी चुनौती दी और 'हिंदवी स्वराज्य' की स्थापना की। मात्र 16 वर्ष की आयु में उन्होंने तोरण का किला जीतकर अपने सैन्य अभियानों की शुरुआत की। उन्होंने पहाड़ी इलाकों और जंगलों का लाभ उठाते हुए मुगलों और बीजापुर के सुल्तानों के खिलाफ छापामार युद्ध प्रणाली अपनाई।

प्रमुख उपलब्धियां: उन्होंने शाहिस्ता खान को परास्त किया, आगरा से औरंगजेब की कैद से चतुराई से भाग निकले और कई अभेद्य किलों (जैसे रायगढ़, सिंहगढ़ और पुरंदर) पर कब्जा किया।
छत्रपति की उपाधि: 1674 में रायगढ़ में उनका भव्य राज्याभिषेक हुआ और उन्हें 'छत्रपति' की उपाधि से सम्मानित किया गया।
अष्टप्रधान मंडल: उन्होंने शासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए आठ मंत्रियों की एक परिषद (अष्टप्रधान) का गठन किया।
धार्मिक सहिष्णुता: शिवाजी जन्म और व्यवहार से पक्के हिंदू थे, लेकिन उनके राज्य में सभी धर्मों के लोगों का सम्मान था। उनकी सेना और प्रशासन में कई मुस्लिम अधिकारी भी उच्च पदों पर नियुक्त थे।
Raigad Fort
रायगढ़ किलाः (Raigad Fort) महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में महाड के पास स्थित एक ऐतिहासिक पहाड़ी किला है। समुद्र तल से लगभग 820 मीटर (2,700 फीट) की ऊँचाई पर स्थित यह किला मराठा साम्राज्य के गौरव और छत्रपति शिवाजी महाराज की राजधानी के रूप में प्रसिद्ध है।
निर्माण और नाम: मूल रूप से इस किले का निर्माण 12वीं सदी में चंद्रराव मोरे परिवार द्वारा किया गया था और इसे 'रायरी' कहा जाता था।
शिवाजी महाराज का अधिकार: 1656 ईस्वी में छत्रपति शिवाजी महाराज ने आदिलशाह से यह किला जीतकर अपने अधीन कर लिया और इसका नाम बदलकर 'रायगढ़' रखा।
राजधानी: 1674 में, शिवाजी महाराज ने रायगढ़ किले को अपने मराठा साम्राज्य की राजधानी बनाया और यहीं उनका भव्य राज्याभिषेक हुआ।
Shivneri fort
शिवनेरी का किला महाराष्ट्र के पुणे जिले के जुन्नार कस्बे के पास स्थित एक ऐतिहासिक और सामरिक महत्व का सैन्य दुर्ग है। यह मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की जन्मस्थली है, जिनका जन्म यहीं 19 फरवरी 1630 को हुआ था।
निर्माण: इस किले का निर्माण 16वीं शताब्दी में हुआ था। शिवाजी महाराज के पिता शाहजी राजे भोसले को यह किला मुगलों से पट्टे पर मिला था, जहाँ शिवाजी महाराज का बचपन बीता और उन्होंने युद्ध कलाएं सीखीं।

Panhala fort
पन्हाला किला (Panhala Fort) महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में स्थित एक ऐतिहासिक और विशाल पहाड़ी किला है। इसे 'पन्हालगढ़' और 'सांपों का घर' भी कहा जाता है। समुद्र तल से लगभग 3200 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह किला मराठा साम्राज्य और छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वर्णिम इतिहास से जुड़ा हुआ है।
निर्माण: यह किला लगभग 850 साल पुराना है। इसका निर्माण 1178 से 1209 ईस्वी के बीच शिलाहार शासक राजा भोज द्वितीय द्वारा करवाया गया था। पन्हाला किला कोल्हापुर शहर से लगभग 20 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है।
Purander fort
पुरंदर किला महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित एक ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पर्वतीय किला है। समुद्र तल से लगभग 4,472 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह किला मराठा साम्राज्य की वीरता, विशेष रूप से छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास का एक प्रमुख प्रतीक है।
सन 1646 में युवा छत्रपति शिवाजी महाराज ने आदिलशाह से पुरंदर किले को जीत लिया। यह शिवाजी महाराज की पहली बड़ी जीतों में से एक थी। वर्ष 1670 में शिवाजी महाराज ने मुगलों को हराकर इस किले पर पुनः अपना अधिकार जमा लिया।
पेशवा और ब्रिटिश काल:18वीं शताब्दी में यह किला मराठा पेशवाओं के नियंत्रण में रहा। 1776 में मराठाओं और अंग्रेजों के बीच पुरंदर की दूसरी संधि हुई। 1818 में अंग्रेजों ने इस पर कब्जा कर लिया और इसका इस्तेमाल जेल तथा अस्पताल के रूप में करने लगे।
Vijaydurg fort
महाराष्ट्र के कोंकण तट पर स्थित विजयदुर्ग भारत के सबसे मजबूत और पुराने समुद्री किलों में से एक है। 'घेरिया' के नाम से मशहूर यह किला अपनी अभेद्य सुरक्षा प्रणाली के लिए जाना जाता है, जिसे कभी मराठा साम्राज्य के महान योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज ने और बाद में कान्होजी आंग्रे ने समुद्री सैन्य अड्डे के रूप में इस्तेमाल किया था
निर्माण: इस किले का निर्माण 12वीं शताब्दी में शिलाहार वंश के राजा भोज द्वितीय (1193-1205) द्वारा कराया गया था।
पुनर्निर्माण: छत्रपति शिवाजी महाराज ने इस पर विजय प्राप्त कर इसका जीर्णोद्धार कराया और इसका नाम बदलकर 'विजयदुर्ग' रखा।
स्थान: यह किला महाराष्ट्र के देवगढ़-विजयदुर्ग ज़िले में, रत्नागिरी से लगभग 48 किलोमीटर दक्षिण में स्थित हैय़
Sindhudurg fort
सिंधुदुर्ग किला, महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में मालवन तट के पास अरब सागर में स्थित एक ऐतिहासिक समुद्री किला है। छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा 1664-1667 के बीच निर्मित यह किला अपनी उत्कृष्ट इंजीनियरिंग, विशाल दीवारों और नौसैनिक रणनीतियों के लिए प्रसिद्ध है।
निर्माण वर्ष: (1664 से 1667) समुद्र की लहरों और दुश्मनों से बचाव के लिए किले की दीवारें 30 फीट ऊंची और 12 फीट मोटी हैं। किले का मुख्य प्रवेश द्वार इस तरह छुपाया गया है कि बाहर से देखने पर इसका पता नहीं चलता। इस किले का निर्माण डच, फ्रांसीसी और पुर्तगाली व्यापारियों के बढ़ते प्रभाव को रोकने और मराठा नौसेना (आरमारी दल) को मजबूत करने के लिए किया गया था।
Sinhagad fort
सिंहगढ़ किला (Sinhagad Fort) महाराष्ट्र के पुणे जिले में सह्याद्री पर्वतमाला की एक खड़ी पहाड़ी पर स्थित एक ऐतिहासिक दुर्ग है। इसे पहले 'कोंढाणा' के नाम से जाना जाता था यह किला लगभग 2000 वर्ष पुराना है। वर्ष 1670 में, छत्रपति शिवाजी महाराज के वीर सेनापति तानाजी मालुसरे ने मुगलों को हराकर इस किले पर जीत हासिल की थी।
यह किला महाराष्ट्र के हवेली तालुका के दोनाजे गांव में, पुणे से लगभग 30 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। यह समुद्र तल से लगभग 1312 मीटर (4320 फीट) की ऊंचाई पर है।
----------
Pratapgarh fort –
प्रतापगढ़ या प्रतापगढ़ किला (Pratapgad) महाराष्ट्र के सतारा जिले में महाबलेश्वर के पास स्थित एक ऐतिहासिक पहाड़ी दुर्ग है। इसे छत्रपति शिवाजी महाराज ने 1656 में बनवाया था। यह मराठा साम्राज्य के स्वर्णिम इतिहास का प्रमुख साक्षी और अफजल खान के वध (1659) के लिए प्रसिद्ध है।
निर्माण: छत्रपति शिवाजी महाराज ने आदिलशाही के खिलाफ अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए 1656 ईस्वी में इस किले का निर्माण कराया था।
प्रतापगढ़ का युद्ध: 10 नवंबर 1659 को इसी किले की तलहटी में शिवाजी महाराज और बीजापुर के आदिलशाही जनरल 'अफजल खान' के बीच ऐतिहासिक युद्ध हुआ था। शिवाजी ने अपनी कूटनीति और 'वाघ नख' (बाघ के पंजे जैसे हथियार) से अफजल खान का वध कर दिया था
यह किला समुद्र तल से करीब 3,500 फीट (1,080 मीटर) की ऊंचाई पर सह्याद्री पर्वतमाला में स्थित है। यह महाबलेश्वर से लगभग 24 किलोमीटर की दूरी पर है।
दो भाग: यह किला दो भागों में बंटा है - ऊपरी किला और निचला किला। ऊपरी भाग में शिव मंदिर और भवानी माता का मंदिर है
-------------
Torna fort
तोरणा किला , जिसे प्रचंडगढ़ के नाम से भी जाना जाता है , महाराष्ट्र राज्य के पुणे जिले में स्थित एक विशाल किला है | यह छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा 1646 में 16 वर्ष की आयु में जीता गया पहला किला था । यह पहाड़ी समुद्र तल से 1,403 मीटर (4,603 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है, जो इसे जिले का सबसे ऊंचा पहाड़ी किला बनाता है।
इस किले का निर्माण 13वीं शताब्दी में शिव पंथ द्वारा किया गया था। किले के प्रवेश द्वार के पास ही मेनघाई देवी मंदिर स्थित है, जिसे तोरनाजी मंदिर भी कहा जाता है।
------------
Rajgad Fort
राजगढ़ किला (Rajgad Fort) महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित एक ऐतिहासिक पहाड़ी किला है, जिसे 'मुरुमदेव' के नाम से भी जाना जाता है। समुद्र तल से 1,376 मीटर ऊँचा यह किला लगभग 26 वर्षों तक मराठा साम्राज्य की राजधानी रहा और छत्रपति शिवाजी महाराज के शासनकाल का मुख्य केंद्र था।
राजधानी: शिवाजी महाराज ने इस रणनीतिक रूप से मजबूत और दुर्गम किले को अपनी पहली राजधानी बनाया था। बाद में उन्होंने अपनी राजधानी रायगढ़ स्थानांतरित कर दी थी।
वास्तुकला और रक्षा: इस किले का आधार व्यास लगभग 40 किलोमीटर है। इसे अभेद्य बनाने के लिए चार अलग-अलग माची (Machis) या रणनीतिक परकोटे बनाए गए थे - पद्मवती माची, संजीवनी माची, सुवेला माची, आळू माची: