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‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के छठे दिन शिवराज सिंह चौहान महाराष्ट्र पहुंचे

नईदिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज महाराष्ट्र के पुणे स्थित, नारायणगांव, कृषि विज्ञान केंद्र से विकसित कृषि संकल्प अभियानका आगे बढ़ाते हुए, किसानों से संवाद किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के कृषि मंत्री माणिकराव शिवाजीराव कोकाटे सहित, अधिकारीगण, वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहें। पहले दिन ओडिशा से शुरुआत के बाद, जम्मू, हरियाणा, उत्तर-प्रदेश, बिहार के बाद आज कृषि मंत्री महाराष्ट्र के किसानों से मिले है। अन्य राज्यों की तरह ही महाराष्ट्र में भी अभियान को लेकर किसानों के बीच भारी उत्साह दिखा।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सबसे पहले मैं छत्रपति शिवाजी महाराज के चरणों में प्रणाम करता हूं। कामना करता हूं कि वह हमें सदमार्ग पर चलने की प्रेरणा दें, जिससे हम अपने किसानों की सेवा कर सकें।केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि जब-तक कृषि मंत्री, कृषि विभाग व वैज्ञानिक खेतों तक नहीं पहुंचेंगे, खेती को सही दिशा नहीं मिल सकती। व्यावहारिक समस्याओं का समझे बिना मात्र कागज पर योजनाएं बनाने का कोई अर्थ नहीं है।

शिवराज सिंह ने कहा कि आज मैंने शिमला मिर्च की खेती, केले की खेती, मूंगफली की खेती देखी वहां उत्पादन से लेकर उनके बाजार तक पहुंच की प्रक्रिया को समझा। वैज्ञानिकों की टीम के साथ टमाटरके खेत में भी गया, वायरस अटैक के कारण टमाटर की खेती पर जो विपरीत प्रभाव पड़ा,उसकी जानकारी भी ली।

चौहान ने कहा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के विकसित भारत के संकल्प की पूर्ति की दिशा में आगे बढ़ने के लिए हीविकसित कृषि संकल्प अभियानकी शुरुआत की गई है। जब-तक लैब और लैंड साथ नहीं जुड़ेंगे तब-तक कृषि का संपूर्ण विकास नहीं हो सकता। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए विकसित कृषि संकल्प अभियान की 29 मई को ओडिशा से शुरुआत हुई।उन्होंने कहा कि ओडिशा से शुरुआत के बाद, मैं जम्मू गया, हरियाणा गया, उत्तर-प्रदेश गया, बिहार गया। आज मैं महाराष्ट्र आया हूं और आगे पूरे देश की परिक्रमा कर किसान भाई-बहनों से संवाद करूंगा।सभी राज्यों व क्षेत्रों की खेती की आवश्यकताएं, जरूरतें व चुनौतियां अलग-अलग है, जिसे गंभीरता से समझना होगा।  चौहान ने कहा कि जब से मैं कृषि मंत्री बना हूं, मेरे रोम-रोम में किसान और हर सांस में खेती है, मैं खेती जीने की कोशिश कर रहा हूं।

चौहान ने कहा कि मुझे यह देखकर प्रसन्नता होती है कि महाराष्ट्र के किसान प्रगतिशील है। उन्होंने खुद से अनुसंधान कर खेती में उन्नति के मार्ग सुनिश्चित किए हैं। हमारे अंगूर और केले आज विदेशों में निर्यात हो रहे हैं। चौहान ने कहा कि हमें जलवायु परिवर्तन की चुनौती को ध्यान में रखते हुए अब नई किस्में विकसित करनी पड़ेंगी।

 

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