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अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के लिए पवन ऊर्जा भारत की रणनीति के केंद्र में है: केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी

नईदिल्ली। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने वैश्विक पवन दिवस 2025 के अवसर पर आज बैंगलुरु में हितधारकों के एक सम्मेलन को संबोधित किया। जोशी ने कहा कि पवन ऊर्जा नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए भारत की रणनीति के केंद्र में है। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक और कर्नाटक सरकार में ऊर्जा मंत्री केजी जॉर्ज भी इस अवसर पर उपस्थित थे। प्रल्हाद जोशी ने कहा कि वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने के लिए भारत को ऊर्जा की अधिक आवश्यकता है; चाहे वह सौर ऊर्जा हो, पवन ऊर्जा हो या ऊर्जा का कोई अन्य स्वरूप हो।

केंद्रीय मंत्री महोदय ने कहा, "हमारे राष्ट्रीय लक्ष्य महत्वाकांक्षी और स्पष्ट हैं: वर्ष 2030 तक हमारी बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से और वर्ष 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन वाला भारत। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पवन ऊर्जा केंद्रीय है। पवन ऊर्जा हमारी अक्षय ऊर्जा रणनीति का एक घटक नहीं है, लेकिन यह इसके दिल में है और आत्मनिर्भर भारत के केंद्र में है।"

जोशी ने माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए कहा, "माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हमें 'विनिर्माण के लिए अक्षय ऊर्जा और घरेलू खपत के लिए पारंपरिक ऊर्जा' का एक दृष्टिकोण दिया है।" केंद्रीय मंत्री महोदय ने कहा कि भारत की विनिर्माण क्षमता बढ़ रही है और यह आगे भी बढ़ती रहेगी। इसे देखते हुए, माननीय प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण अक्षय ऊर्जा उत्पादन, भंडारण और उपयोग के महत्व पर बल देता है, ताकि जब भारत निकट भविष्य में वैश्विक विनिर्माण केंद्र बन जाए, तो वह अक्षय ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से विनिर्माण क्षेत्र की ऊर्जा मांगों को पूरा करने में सक्षम हो सके।

जोशी ने कहा कि भारत में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं क्योंकि इसकी विश्व स्तर पर चौथी सबसे बड़ी पवन ऊर्जा स्थापित क्षमता है और यह तीसरा सबसे बड़ा अक्षय ऊर्जा उत्पादक है। उन्होंने कहा, “किसी ने नहीं सोचा था कि भारत 10 वर्षों में अक्षय ऊर्जा का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन जाएगा, लेकिन आज यह एक वास्तविकता है।

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