देश-विदेश

मन की बात की 123वीं कड़ी में प्रधानमंत्री के सम्बोधन का मूल पाठ (29.06.2025)

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार। मन की बातमें आप सबका स्वागत है, अभिनंदन है। आप सब इस समय योग की ऊर्जा और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवसकी स्मृतियों से भरे होंगे। इस बार भी 21 जून को देश-दुनिया के करोड़ों लोगों ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवसमें हिस्सा लिया। आपको याद है10 साल पहले इसका प्रारंभ हुआ। अब 10 साल में ये सिलसिला हर साल पहले से भी ज्यादा भव्य बनता जा रहा है। ये इस बात का भी संकेत है कि ज्यादा से ज्यादा लोग अपने दैनिक जीवन में योग को अपना रहे हैं। हमने इस बार योग दिवसकी कितनी ही आकर्षक तस्वीरें देखी हैं। विशाखापत्तनम के समुद्र तट पर तीन लाख लोगों ने एक साथ योग किया। विशाखापत्तनम से ही एक और अद्भुत दृश्य सामने आया, दो हजार से ज्यादा आदिवासी छात्रों ने 108 मिनट तक 108 सूर्य नमस्कार किए। सोचिए, कितना अनुशासन, कितना समर्पण रहा होगा। हमारे नौसेना के जहाजों पर भी योग की भव्य झलक दिखी। तेलंगाना में तीन हजार दिव्यांग साथियों ने एक साथ योग शिविर में भाग लिया। उन्होंने दिखाया कि योग किस तरह सशक्तिकरण का माध्यम भी है। दिल्ली के लोगों ने योग को स्वच्छ यमुना के संकल्प से जोड़ा और यमुना तट पर जाकर योग किया। जम्मू-कश्मीर में चिनाब ब्रिज, जो दुनिया का सबसे ऊँचा रेलवे ब्रिज है, वहाँ भी लोगों ने योग किया। हिमालय की बर्फीली चोटियाँ और ITBP के जवान, वहाँ भी योग दिखा, साहस और साधना साथ-साथ चले। गुजरात के लोगों ने भी एक नया इतिहास रचा। वडनगर में 2121 (इक्कीस सौ इक्कीस) लोगों ने एक साथ भुजंगासन किया और नया रिकॉर्ड बना दिया। न्यूयॉर्क, लंदन, टोक्यो, पेरिस, दुनिया के हर बड़े शहर से योग की तस्वीरें आई और हर तस्वीर में एक बात खास रही, शांति, स्थिरता और संतुलन। इस बार की theme भी बहुत विशेष थी‘Yoga for One Earth, One Health, यानि, ‘एक पृथ्वी - एक स्वास्थ्य। ये सिर्फ एक नारा नहीं है, ये एक दिशा है जो हमें वसुधैव कुटुंबकम्का अहसास कराती है। मुझे विश्वास है, इस बार के योग दिवस की भव्यता ज्यादा से ज्यादा लोगों को योग को अपनाने के लिए जरूर प्रेरित करेगी।

मेरे प्यारे देशवासियो, जब कोई तीर्थयात्रा पर निकलता है, तो एक ही भाव सबसे पहले मन में आता है, “चलो, बुलावा आया है। यही भाव हमारे धार्मिक यात्राओं की आत्मा है। ये यात्राएं शरीर के अनुशासन का, मन की शुद्धि का, आपसी प्रेम और भाईचारे का, प्रभु से जुड़ने का माध्यम है। इनके अलावा, इन यात्राओं का एक और बड़ा पक्ष होता है। ये धार्मिक यात्राएं सेवा के अवसरों का एक महाअनुष्ठान भी होती है। जब कोई भी यात्रा होती है तो जितने लोग यात्रा पर जाते हैं उससे ज्यादा लोग तीर्थयात्रियों की सेवा के काम में जुटते हैं। जगह-जगह भंडारे और लंगर लगते हैं। लोग सड़कों के किनारे प्याऊ लगवाते हैं। सेवा-भाव से ही Medical Camp और सुविधाओं की व्यवस्था की जाती है। कितने ही लोग अपने खर्च से तीर्थयात्रियों के लिए धर्मशालाओं की, और, रहने की व्यवस्था करते हैं।

साथियो,

लंबे समय के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा का फिर से शुभारंभ हुआ है। कैलाश मानसरोवर यानी भगवान शिव का धाम। हिन्दू, बौद्ध, जैन, हर परंपरा में कैलाश को श्रद्धा और भक्ति का केंद्र माना गया है। साथियो3 जुलाई से पवित्र अमरनाथ यात्रा शुरू होने जा रही है और सावन का पवित्र महीना भी कुछ ही दिन दूर है। अभी कुछ दिन पहले हमने भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा भी देखी है। ओडिशा हो, गुजरात हो, या देश का कोई और कोना, लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होते हैं। उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम, ये यात्राएं एक भारत-श्रेष्ठ भारतके भाव का प्रतिबिंब है। जब हम श्रद्धा भाव से, पूरे समर्पण से और पूरे अनुशासन से अपनी धार्मिक यात्रा सम्पन्न करते हैं तो उसका फल भी मिलता है। मैं यात्राओं पर जा रहे सभी सौभाग्यशाली श्रद्धालुओं को अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ। जो लोग सेवा भावना से इन यात्राओं को सफल और सुरक्षित बनाने में जुटे हैं, उन्हें भी साधुवाद देता हूँ।  

मेरे प्यारे देशवासियो, अब मैं आपको देश की दो ऐसी उपलब्धियों के बारे में बताना चाहता हूँ, जो आपको गर्व से भर देंगी। इन उपलब्धियों की चर्चा वैश्विक संस्थाएं कर रही हैं। WHO यानी विश्व स्वास्थ्य संगठनऔर ILO यानी International Labour Organization ने देश की इन उपलब्धियों की भरपूर सराहना की है। पहली उपलब्धि तो हमारे स्वास्थ्य से जुड़ी है। आप में से बहुत से लोगों ने आँखों की एक बीमारी के बारे में सुना होगा – Trachoma। ये बीमारी Bacteria से फैलती है। एक समय था जब ये बीमारी देश के कई हिस्सों में आम थी। ध्यान नहीं दिया जाए, तो इस बीमारी से धीरे-धीरे आँखों की रोशनी तक चली जाती थी। हमने संकल्प लिया कि Trachoma को जड़ से खत्म करेंगे। और मुझे आपको ये बताते हुए बहुत खुशी है कि – ‘विश्व स्वास्थ्य संगठनयानी WHO ने भारत को Trachoma free घोषित कर दिया है। अब भारत Trachoma मुक्त देश बन चुका है। ये उन लाखों लोगों की मेहनत का फल है, जिन्होंने बिना थके, बिना रुके, इस बीमारी से लड़ाई लड़ी। ये सफलता हमारे health workers की है। स्वच्छ भारत अभियानसे भी इसे मिटाने में बड़ी मदद मिली। जल जीवन Missionका भी इस सफलता में बड़ा योगदान रहा। आज जब घर-घर नल से साफ पानी पहुँच रहा है, तो ऐसी बीमारियों का खतरा कम हो गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन’ WHO ने भी इस बात की सराहना की है कि भारत ने बीमारी से निपटने के साथ-साथ उसके मूल कारणों को भी दूर किया है।

साथियो,

आज भारत में ज्यादातर आबादी किसी-ना-किसी social protection benefit का फायदा उठा रही है और अभी हाल ही में International Labour Organization – ILO की बड़ी अहम Report आई है। इस Report में कहा गया है कि भारत की 64% (sixty-four percent) से ज्यादा आबादी को अब कोई-ना-कोई Social Protection Benefit जरूर मिल रहा है। सामाजिक सुरक्षा - ये दुनिया की सबसे बड़ी coverage में से एक है। आज देश के लगभग 95 करोड़ (ninety-five crore) लोग किसी-न-किसी social security योजना का लाभ पा रहे हैं, जबकि2015 तक 25 करोड़ से भी कम लोगों तक सरकारी योजनाएं पहुँच पाती थी।

साथियो,

भारत में स्वास्थ्य से लेकर सामाजिक सुरक्षा तक, हर क्षेत्र में देश saturation की भावना से आगे बढ़ रहा है। ये सामाजिक न्याय की भी उत्तम तस्वीर है। इन सफलताओं ने एक विश्वास जगाया है, कि आने वाला समय और बेहतर होगा, हर कदम पर भारत और भी सशक्त होगा।

मेरे प्यारे देशवासियो, जन-भागीदारी की शक्ति से, बड़े-बड़े संकटों का मुकाबला किया जा सकता है। मैं आपको एक audio सुनाता हूँ, इस audio में आपको उस संकट की भयावहता का अंदाजा लगेगा। वो संकट कितना बड़ा था, पहले वो सुनिए, समझिए। 

 

 

 

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