सिंधु जल संधि पर भारत का दो टूक: अवैध कोर्ट का आदेश नहीं मानेंगे
2026-02-04 02:27 PM
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नई दिल्ली| सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंज रहा है। पाकिस्तान जहां कोर्ट-कोर्ट खेलकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं भारत ने साफ कर दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के आदेश को मान्यता नहीं देगा। भारत का रुख स्पष्ट है—अवैध रूप से गठित मध्यस्थता न्यायालय के आदेशों को न तो स्वीकार किया जाएगा और न ही उन पर कोई कार्रवाई होगी।
आदेश और भारत का इनकार
दरअसल, हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत ने भारत को निर्देश दिया था कि वह अपने जलविद्युत संयंत्रों—विशेष रूप से बगलिहार और किशनगंगा परियोजनाओं—के परिचालन रिकार्ड यानी पोंडेज लॉगबुक प्रस्तुत करे। अदालत ने यह भी कहा था कि नौ फरवरी, 2026 तक इन दस्तावेजों को सौंपा जाए या अनुपालन न करने पर औपचारिक स्पष्टीकरण दिया जाए। लेकिन भारत ने साफ शब्दों में कह दिया है कि वह इस आदेश को मान्यता नहीं देता और न ही इन कार्यवाहियों में भाग लेगा।
विवाद का केंद्र
विवाद का मुख्य केंद्र बिंदु सिंधु जल संधि के तहत गठित मध्यस्थता न्यायालय द्वारा पिछले सप्ताह जारी किया गया आदेश है। इसमें भारतीय जलविद्युत संयंत्रों से संबंधित पोंडेज लॉगबुक को गुण-दोष पर दूसरे चरण के हिस्से के रूप में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि भारत ने कोई प्रति-स्मृति पत्र दाखिल नहीं किया है और न ही भागीदारी का कोई संकेत दिया है।
भारत का आधिकारिक रुख
सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि ‘तथाकथित अवैध रूप से गठित मध्यस्थता न्यायालय (तटस्थ विशेषज्ञ के अलावा) समानांतर कार्यवाही जारी रखे हुए है। चूंकि भारत इस न्यायालय की वैधता को मान्यता नहीं देता, इसलिए इसके किसी भी संचार का जवाब नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा, क्योंकि सिंधु जल संधि स्थगित है, भारत जवाब देने के लिए बाध्य नहीं है।’
संधि स्थगन और पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
गौरतलब है कि भारत ने अप्रैल में पहलगाम में हुए हमले के बाद औपचारिक रूप से सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। इसके बाद से ही पाकिस्तान इस मुद्दे को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार शोर मचा रहा है। पाकिस्तान की कोशिश है कि वह वैश्विक मंचों पर भारत को कटघरे में खड़ा करे, लेकिन भारत का रुख दृढ़ और स्पष्ट है—अवैध कार्यवाहियों में भागीदारी नहीं होगी।
सिंधु जल संधि पर भारत और पाकिस्तान के बीच यह टकराव केवल जल संसाधनों का विवाद नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय न्यायिक प्रक्रियाओं की वैधता पर भी सवाल खड़ा करता है। भारत ने अपने रुख से यह संदेश दिया है कि राष्ट्रीय हितों और संधि की शर्तों से समझौता नहीं किया जाएगा। पाकिस्तान चाहे जितना अंतरराष्ट्रीय अदालतों का दरवाजा खटखटाए, भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने संप्रभु अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा।