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समाज परिवर्तन का संकल्प: देहरादून में अभाविप की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक संपन्न

देहरादून| देहरादून के परेड ग्राउंड में बसाए गए भगवान बिरसा मुंडा नगर गुरुवार को छात्रशक्ति और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बन गया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की एक-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक यहां संपन्न हुई, जिसमें देशभर से आए प्रतिनिधियों ने शिक्षा, समाज, पर्यावरण, सेवा, खेल और तकनीकी जैसे समसामयिक विषयों पर गहन विमर्श किया।

युवा शक्ति को समाज परिवर्तन का वाहक बनाने का प्रस्ताव
बैठक का समापन “समाज परिवर्तन का वाहक बने युवा” विषयक प्रस्ताव पारित करने के साथ हुआ। यह प्रस्ताव अभाविप की उस दृष्टि को रेखांकित करता है जिसमें भारतीय युवाओं को केवल शिक्षा तक सीमित न रखकर उन्हें सामाजिक नेतृत्व और राष्ट्रीय पुनर्जागरण की धुरी बनाया जाए। संगठन ने इस अधिवेशन को गुजरात के द्वारका में हुई विचार-बैठक के करणीय बिंदुओं से भी जोड़ा, जिससे भविष्य की कार्ययोजना को ठोस आधार मिले।

रानी अब्बक्का प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
अधिवेशन का सांस्कृतिक आयाम “रानी अब्बक्का प्रदर्शनी” रही, जिसका उद्घाटन पतंजलि योग ट्रस्ट के महासचिव आचार्य बालकृष्ण और उत्तराखण्ड के शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने किया। प्रदर्शनी का थीम था— “देवभूमि से राष्ट्रभूमि तक: उत्तराखण्ड के 25 वर्षों की यात्रा एवं विजन 2047”। यह प्रदर्शनी न केवल उत्तराखण्ड की उपलब्धियों को सामने लाती है, बल्कि राष्ट्रीय पुनर्जागरण की दिशा में युवाओं की भूमिका को भी रेखांकित करती है।

ऐतिहासिक यात्राओं का संगम
रानी अब्बक्का की 500वीं जन्म शताब्दी पर निकली 3000 किलोमीटर लंबी कलश यात्रा और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर झारखंड से निकली संदेश यात्रा भी इस अधिवेशन में पहुंची। इन यात्राओं से लाए गए जल और मिट्टी के कलशों को प्रांगण में स्थापित कर भारतीय इतिहास और संस्कृति के प्रति श्रद्धा का भाव प्रकट किया गया।

नेतृत्व का संदेश
राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. राजशरण शाही ने उद्घाटन सत्र में कहा कि अभाविप ने शैक्षिक और सामाजिक क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने गंगा-यमुना के उद्गम स्थल पर आयोजित इस बैठक को ऊर्जा और संस्कार का प्रतीक बताया। वहीं राष्ट्रीय महामंत्री डॉ वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि इस बैठक से संगठनात्मक कार्यों को नई गति मिलेगी और कार्यकर्ता दृढ़ संकल्प के साथ समाज और शैक्षिक संस्थानों तक विद्यार्थी परिषद का संदेश पहुंचाएंगे।

देहरादून का यह अधिवेशन केवल संगठनात्मक बैठक नहीं था, बल्कि यह भारतीय छात्रशक्ति के भविष्य का घोषणापत्र भी था। “समाज परिवर्तन का वाहक बने युवा” प्रस्ताव के साथ अभाविप ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले वर्षों में उसकी प्राथमिकता शिक्षा से आगे बढ़कर सामाजिक नेतृत्व और सांस्कृतिक पुनर्जागरण होगी। 

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