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अयोध्या: आस्था और व्यवस्था का संगम, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में लिए गए ऐतिहासिक निर्णय

अयोध्या| अयोध्या एक बार फिर धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बनने जा रही है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की हालिया बैठक में ऐसे निर्णय लिए गए हैं, जो न केवल मंदिर परिसर की भव्यता को नई ऊँचाइयों पर ले जाएंगे, बल्कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे।

द्वादश प्रतिष्ठा का महाआयोजन
31 दिसंबर को होने वाले द्वादश प्रतिष्ठा आयोजन को लेकर ट्रस्ट ने अहम तैयारियाँ तय की हैं। इससे पहले 27 से 31 दिसंबर तक पाँच दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान होंगे, जिनमें देशभर से संत, विद्वान और श्रद्धालु शामिल होंगे। इस आयोजन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि होंगे, जो इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनेंगे।

परंपरा और आधुनिकता का संतुलन
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि पुराने मंदिर को अब एक छोटे मंदिर के रूप में विकसित किया जाएगा। यह कदम परंपरा को सम्मान देने के साथ-साथ नए निर्माण की भव्यता को संतुलित करने का प्रयास है। साथ ही, मंदिर परिसर में हुतात्माओं का स्मारक बनाया जाएगा, जो उन बलिदानों की याद दिलाएगा जिन्होंने इस संघर्ष को जन-जन तक पहुँचाया।

सम्मान का पर्व
19 मार्च 2026 को राम मंदिर निर्माण से जुड़े 400 से अधिक ठेकेदारों और वेंडरों का सम्मान किया जाएगा। यह केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उन हाथों को प्रणाम है जिन्होंने इस युगांतकारी निर्माण को संभव बनाया।

श्रद्धालुओं की सुविधा पर विशेष ध्यान
ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। मंदिर परिसर में विशेष सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी। साथ ही, जूता रखने के लिए बड़े रैक बनाए जा रहे हैं, जिनमें एक समय में 25,000 जोड़ी जूते और पूरे दिन में लगभग 2 लाख जोड़ी जूते रखने की व्यवस्था होगी। यह निर्णय दर्शाता है कि आस्था के साथ-साथ अनुशासन और व्यवस्था भी इस आयोजन का अभिन्न हिस्सा होंगे। 
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