लखनऊ में बेडरूम में कैद 19 गाय-भैंसें: नगर निगम की कार्रवाई ने खोला अवैध डेयरी का चौंकाने वाला सच
2026-01-30 10:50 AM
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लखनऊ| उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नगर निगम की कार्रवाई के दौरान ऐसा दृश्य सामने आया, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। बिजनौर रोड स्थित रॉयल सिटी कॉलोनी में जब टीम ने छापा मारा, तो एक पशुपालक ने नगर निगम से बचाने के लिए अपनी गाय और भैंसों को आलीशान घर के बेडरूम और ड्राइंग रूम में बंद कर रखा था। दरवाजे का ताला खुलते ही अंदर का नजारा देखकर अधिकारी भी स्तब्ध रह गए—चारों ओर गोबर फैला था और बदबू से माहौल असहनीय हो उठा।
तीन घंटे की मशक्कत और पुलिस की मौजूदगी
पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अभिनव वर्मा के नेतृत्व में नगर निगम, पशु कल्याण विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम जब मौके पर पहुंची, तो वहां अफरा-तफरी मच गई। संदिग्ध मकान पर ताला लगा था, जिसे खुलवाने में करीब तीन घंटे का समय लगा। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद जब दरवाजा खोला गया, तो घर के अंदर बंधे पशुओं को देखकर टीम हैरान रह गई। यह पहला मामला था जहां बेडरूम को पशुओं को छिपाने के लिए इस्तेमाल किया गया।
19 पशु जब्त, कांजी हाउस भेजे गए
कार्रवाई के दौरान कुल 19 पशुओं को जब्त किया गया। इनमें 11 भैंसें, 4 पड़िया, 3 गाय और 1 बछिया शामिल थीं। सभी को ऐशबाग स्थित कांजी हाउस भेज दिया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि निर्धारित जुर्माना भरने के बाद ही इन पशुओं को छोड़ा जाएगा।
स्थानीय निवासियों की शिकायत बनी वजह
रॉयल सिटी कॉलोनी के निवासी लंबे समय से अवैध डेयरी संचालन से परेशान थे। डेयरी संचालक न केवल अवैध रूप से पशुपालन कर रहे थे, बल्कि गोबर को खुले प्लॉटों और नालियों में बहा रहे थे। इससे जलभराव, गंदगी और मच्छर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया था। स्थानीय लोगों की लगातार शिकायतों के बाद ही नगर निगम ने यह विशेष अभियान चलाया।
विरोध और कानून की सख्ती
कार्रवाई के दौरान पशुपालकों ने जमकर विरोध किया। कुछ लोगों ने पशु गाड़ी के सामने बैठकर रास्ता जाम करने की कोशिश भी की, लेकिन भारी पुलिस बल की मौजूदगी में उन्हें हटाया गया। नगर निगम ने साफ किया कि नगर निगम अधिनियम 1959 के तहत शहरी सीमा में भैंस पालन पूरी तरह प्रतिबंधित है। वहीं, गायों के लिए भी केवल दो पशुओं का लाइसेंस ही मान्य है।
अवैध डेयरी पर शिकंजा कसता नगर निगम
यह घटना न केवल नगर निगम की सख्ती को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि अवैध डेयरी संचालक किस हद तक जाने को तैयार हैं। बेडरूम और ड्राइंग रूम में पशुओं को छिपाना प्रशासनिक कार्रवाई से बचने की कोशिश थी, लेकिन अंततः कानून का शिकंजा कस ही गया। यह मामला लखनऊ में शहरी स्वच्छता और पशु कल्याण के लिए एक अहम सबक बनकर सामने आया है।