वाराणसी में सर्दी का कहर; ठंड में फैला खुरपका-मुंहपका, नवजात बछड़ों की मौत से गांवों में दहशत
2025-12-16 03:19 PM
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वाराणसी| सर्द हवाओं के बीच वाराणसी के ग्रामीण इलाकों में एक अनचाहा संकट गहराता जा रहा है। चिरईगांव विकास खंड के कई गांवों में खुरपका-मुंहपका रोग ने अचानक पैर पसार दिए हैं। बीमारी का असर इतना भयावह है कि दुधारू पशुओं के नवजात बछड़े कुछ ही मिनटों में दम तोड़ रहे हैं। पशुपालक असमंजस और भय में हैं, वहीं विभागीय विशेषज्ञ भी हैरान हैं कि ठंड के मौसम में यह रोग कैसे फैल रहा है।
गांव-गांव फैला संक्रमण
तातेपुर (राजापुर), कमौली, सिंहवार, रैपुरा, बभनपुरा, चांदपुर, मुस्तफाबाद, रामचंदीपुर, गोबरहां और मोकलपुर जैसे गांवों में खुरपका-मुंहपका का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। जिन पशुओं को यह रोग जकड़ रहा है, उनके दूध पीने वाले छोटे बछड़े अचानक मौत का शिकार हो रहे हैं।
पशुपालकों की दहशत
कमौली गांव के राजीव सिंह की गाय में सुधार तो हुआ, लेकिन उसकी बछिया जन्म के कुछ ही मिनटों में मर गई। इसी गांव के चंद्रप्रकाश की गाय भी इस रोग से ग्रसित थी, और उसका बीस दिन का बछड़ा तड़पते हुए दम तोड़ गया। ऐसी घटनाओं ने पशुपालकों को गहरे भय और असुरक्षा में डाल दिया है।
विभाग भी हैरान
पशुचिकित्साधिकारी डॉ. आर. ए. चौधरी का कहना है कि सर्दी के मौसम में इस रोग का फैलना असामान्य है। छोटे बछड़ों की अचानक मौत का कारण भी स्पष्ट नहीं है। उन्होंने प्रभावित पशुओं को पोटैशियम मैडनेट पाउडर के घोल से धुलाई करने की सलाह दी है।
बढ़ती चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से घट रही है, जिससे बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है। विभागीय स्तर पर जांच और रोकथाम की कवायद शुरू हुई है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में फैली दहशत को कम करना आसान नहीं दिख रहा।