रंग, रस और रुद्राभिषेक के संग—काशी की शिव बरात बनेगी महाशिवरात्रि का सबसे जीवंत उत्सव
2026-02-05 08:18 AM
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वाराणसी| महाशिवरात्रि पर काशी की पहचान बन चुकी शिव बरात इस बार और भी चटख रंगों में नहाएगी। बनारसी हुड़दंग, ठहाकों और सांस्कृतिक उल्लास से सजी यह यात्रा होली के रंगों में सराबोर होगी। वृंदावन की लट्ठमार होली, कर्नाटक की हंपी होली और पंजाब की होला मोहल्ला जैसी परंपराओं की झांकियां इस बरात को बहुरंगी उत्सव में बदल देंगी। इस बार की थीम भी खास है—“हर आदमी है टेंशन में, चलो थोड़ा गुदगुदाया जाए”—जो काशीवासियों के जीवन में हंसी और हल्कापन घोलने का संदेश देती है।
45 वर्षों की परंपरा, इस बार और भी खास
करीब साढ़े चार दशक से चली आ रही यह परंपरा 15 फरवरी को महामृत्युंजय महादेव मंदिर, दारानगर से शुरू होगी। बाबा भोलेनाथ की शादी की तैयारियां पहले से ही काशी की गलियों में गूंज रही हैं। रंग, मस्ती और ठहाकों से भरी यह यात्रा काशी की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करती है।
शाम पांच बजे से शुरू होगी यात्रा
विश्व प्रसिद्ध शिव बरात शाम पांच बजे दारानगर से निकलेगी और मैदागिन, बुलानाला, नीचीबाग, आसभैरव, चौक, ज्ञानवापी और गोदौलिया होते हुए दशाश्वमेध स्थित चितरंजन पार्क तक पहुंचेगी। लगभग चार किलोमीटर की इस यात्रा को सात घंटे में पूरा किया जाएगा। रास्ते भर काशीवासी दूल्हा बने बाबा भोलेनाथ का तिलक कर स्वागत करेंगे। इस वर्ष करीब पांच लाख श्रद्धालुओं के शामिल होने का अनुमान है, जिसके लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं।
तिलभांडेश्वर महादेव से दिन की बरात
महाशिवरात्रि पर तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर से भी भव्य शिव बरात निकलेगी। महंत स्वामी शिवानंद गिरि जी महाराज के संरक्षण में और समिति अध्यक्ष राम बाबू यादव तथा कार्यकारिणी अध्यक्ष विजय प्रजापति के नेतृत्व में यह आयोजन संपन्न होगा। दोपहर 12 बजे मंदिर से निकलने वाली बरात पांडे हवेली और केदारजी मार्गों से होती हुई शाम चार बजे पुनः मंदिर प्रांगण में लौटेगी।
दिव्य झांकियों और ध्वनियों का संगम
बरात में महाकाल, तिलभांडेश्वर महादेव, ब्रह्मा-विष्णु-महेश, राम दरबार और नवदुर्गा की झांकियां आकर्षण का केंद्र होंगी। देवगण, ऋषिगण और शिवगण के साथ घोड़े-ऊंटों की सजीव उपस्थिति, डमरू नाद, ढोल-नगाड़े, शहनाई और बैंड इस यात्रा को अलौकिक बना देंगे।
आरती, रुद्राभिषेक और महाप्रसाद
सायं 6:30 बजे संध्या आरती होगी, रात्रि में विशेष रुद्राभिषेक संपन्न होगा और अगले दिन मंगला आरती के बाद दक्षिण भारतीय परंपरा अनुसार सांभर-चावल का महाप्रसाद सुबह नौ बजे तक वितरित किया जाएगा। इस तरह महाशिवरात्रि पर काशी की शिव बरात केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक उत्सव का विराट रूप बनकर सामने आएगी।