मां से किया वादा, हालात से हार—कानपुर के आयुष की कहानी ने सबको रुलाया
2026-04-04 11:35 AM
126
कानपुर, कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट गैंग के खुलासे ने जहां अपराध की भयावह सच्चाई सामने रखी है, वहीं इस पूरे मामले से जुड़ी एक ऐसी कहानी भी सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। यह कहानी है 23 साल के आयुष की, जो अपने परिवार और खासकर मां के लिए जी रहा था, लेकिन हालात ने उसे ऐसा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
एमबीए छात्र से किडनी डोनर तक का सफर
बिहार का रहने वाला आयुष देहरादून में एमबीए की पढ़ाई कर रहा था। पढ़ाई के साथ-साथ वह अपने परिवार की जिम्मेदारियों को भी निभा रहा था। आर्थिक तंगी ने उसे इस कदर घेर लिया कि दो महीने तक वह अपनी फीस जमा नहीं कर सका। इसी दबाव में आकर उसने अपनी किडनी बेचने का फैसला कर लिया। उसे अंदाजा नहीं था कि वह एक अवैध रैकेट के जाल में फंसने जा रहा है। जब उसे ठगा गया, तब उसने खुद पुलिस से संपर्क कर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया।
आईसीयू में भी मां की चिंता
ऑपरेशन के बाद आयुष की तबीयत बिगड़ गई। उसे पहले कानपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया, फिर बेहतर इलाज के लिए लखनऊ रेफर किया गया, जहां वह आईसीयू में डॉक्टरों की निगरानी में है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि अपनी गंभीर हालत के बावजूद उसकी सबसे बड़ी चिंता अपनी मां को लेकर है। वह बार-बार पुलिस से यही गुहार लगा रहा है कि उसकी मां को इस बारे में कुछ न बताया जाए। उसने घर से यह कहकर कदम बाहर रखा था कि वह नौकरी करने जा रहा है।
हाथ का टैटू बयां करता है मां के लिए प्यार
आयुष के हाथ पर बना ‘आई लव यू मॉम’ टैटू उसके दिल में मां के लिए बसी मोहब्बत की गवाही देता है। वह अपनी मां को किसी भी तरह का दुख नहीं देना चाहता। उसकी यही कोशिश रही कि उसकी तकलीफ और संघर्ष मां तक न पहुंचे, लेकिन हालात ने उसे इस मोड़ पर ला खड़ा किया जहां सच्चाई छिपाना मुश्किल हो गया।
पिता की मौत के बाद टूटा सहारा
आयुष की जिंदगी में सबसे बड़ा झटका तब लगा जब उसके पिता का निधन हो गया। बड़े बेटे होने के नाते पूरे परिवार की जिम्मेदारी उसके कंधों पर आ गई। पहले से ही कमजोर आर्थिक स्थिति और बिगड़ गई। घर की जमीन गिरवी रखी जा चुकी थी और आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं था। ऐसे में पढ़ाई जारी रखना और घर चलाना दोनों उसके लिए चुनौती बन गए।
फीस के लिए बेची किडनी, फिर भी मिला धोखा
आयुष को किडनी के बदले 9 से 10 लाख रुपये देने का वादा किया गया था, लेकिन ऑपरेशन के बाद उसे केवल साढ़े तीन लाख रुपये ही दिए गए। बाकी पैसे नहीं मिलने पर उसने हिम्मत जुटाई और पुलिस को सूचना दी। इसी एक कदम ने पूरे अवैध रैकेट का भंडाफोड़ कर दिया।
दोस्त से मुलाकात में छलक पड़े आंसू
जब उसकी एक दोस्त उससे मिलने अस्पताल पहुंची, तो उसे देखते ही आयुष फूट-फूटकर रो पड़ा। उसने हाथ जोड़कर अपनी गलती स्वीकार की और बार-बार यही कहा कि उसकी मां को इस बारे में कुछ न बताया जाए। उस पल में उसकी बेबसी और पछतावा साफ झलक रहा था।
मां को सच न बताने की गुहार
पूछताछ के दौरान जब पुलिस ने उसके परिवार को सूचना देने की बात कही, तो आयुष टूट गया। उसने पुलिसकर्मियों के पैर पकड़कर विनती की कि उसकी मां को इस घटना के बारे में न बताया जाए। फीस जमा न कर पाने और आर्थिक दबाव ने उसे इस कदर तोड़ दिया था कि उसे कोई और रास्ता नजर नहीं आया।
एक कहानी जो सवाल छोड़ जाती है
आयुष की यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की मजबूरी नहीं, बल्कि उस सामाजिक और आर्थिक सच्चाई का आईना है, जहां सपनों और जिम्मेदारियों के बीच फंसे युवा कभी-कभी ऐसे फैसले ले लेते हैं, जिनकी कीमत उन्हें जिंदगी भर चुकानी पड़ती है। यह घटना न सिर्फ एक अपराध का खुलासा है, बल्कि उन हालातों पर भी सवाल खड़े करती है, जो किसी को अपनी ही जिंदगी से समझौता करने पर मजबूर कर देते हैं।