पहचान की नई सियासत: ‘पटना जू’ से लेकर डेयरी संस्थान तक—नाम बदले, संदेश बड़ा
2026-05-01 11:15 AM
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पटना| बिहार में सम्राट चौधरी की सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने राज्य की पहचान से जुड़े दो बड़े संस्थानों की तस्वीर ही बदल दी है। वर्षों से संजय गांधी के नाम से पहचाने जाने वाले पटना के मशहूर चिड़ियाघर और डेयरी टेक्नोलॉजी संस्थान को अब नई पहचान दी गई है। इस निर्णय ने न केवल प्रशासनिक स्तर पर हलचल पैदा की है, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी हवा दे दी है।
पटना जू: बदला नाम, बरकरार विरासत
पटना का चर्चित चिड़ियाघर, जिसे अब तक संजय गांधी बायोलॉजिकल पार्क के नाम से जाना जाता था, अब ‘पटना जू’ के नाम से पहचाना जाएगा। 1973 में आम जनता के लिए खोले गए इस पार्क ने दशकों तक पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों को आकर्षित किया है। बेली रोड के पास फैला यह विशाल परिसर 153 एकड़ में फैला है, जहां 110 से अधिक प्रजातियों के 800 से ज्यादा जानवर रहते हैं। नाम भले बदल गया हो, लेकिन इसकी पहचान और महत्व पहले की तरह कायम रहने की उम्मीद है।
डेयरी संस्थान को भी मिली नई पहचान
सरकार ने केवल चिड़ियाघर तक ही बदलाव सीमित नहीं रखा, बल्कि संजय गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी का नाम भी बदलकर ‘बिहार स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी’ कर दिया गया है। 1980 में स्थापित यह संस्थान डेयरी शिक्षा के क्षेत्र में एक अहम केंद्र रहा है। आईसीएआर से मान्यता प्राप्त इस कॉलेज में बीटेक और एमटेक जैसे कोर्स संचालित होते हैं। अब नए नाम के साथ इसे राज्य की पहचान से सीधे जोड़ने की कोशिश की गई है।
कैबिनेट बैठक में मुहर, फैसलों की लंबी सूची
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इन नाम बदलावों पर मुहर लगी। हालांकि, यह बैठक केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें विकास और कल्याण से जुड़े कई बड़े फैसले भी लिए गए, जो राज्य की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित कर सकते हैं।
बिजली से शिक्षा तक—जनता को राहत के फैसले
सरकार ने ‘मुख्यमंत्री विद्युत उपभोक्ता सहायता योजना’ के लिए 23,165 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इसके तहत उपभोक्ताओं को हर महीने 125 यूनिट मुफ्त बिजली मिलती रहेगी। यह कदम सीधे तौर पर आम लोगों को राहत देने वाला माना जा रहा है।
शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा विस्तार
राज्य के 208 ब्लॉकों में नए डिग्री कॉलेज खोलने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए 104 करोड़ रुपये और 9,152 नए पदों को मंजूरी मिली है। साथ ही हर ब्लॉक में एक मॉडल स्कूल स्थापित किया जाएगा, जिसमें स्मार्ट क्लास और आधुनिक लैब जैसी सुविधाएं होंगी। यह फैसला बिहार की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
इंफ्रास्ट्रक्चर को मिली रफ्तार
चार बड़ी सड़क परियोजनाओं—गंगा अंबिका पथ, नारायणी पथ, विश्वामित्र पथ और गया में नए पुल—को हरी झंडी दी गई है। इसके अलावा पटना में एनआईएफटी के लिए जमीन आवंटित करने का निर्णय भी लिया गया है, जिससे राज्य में फैशन और डिजाइन शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण पर जोर
पटना के गर्दनीबाग में ऑटिज्म से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने का फैसला लिया गया है। वहीं एससी-एसटी छात्रावासों में रहने वाले छात्रों का स्टाइपेंड 1000 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये कर दिया गया है, जिससे कमजोर वर्ग के छात्रों को आर्थिक सहारा मिलेगा।
नाम बदले, लेकिन संदेश बड़ा है
इन फैसलों के जरिए सरकार ने एक तरफ जहां संस्थानों को नई पहचान देने की कोशिश की है, वहीं दूसरी ओर विकास और जनकल्याण के एजेंडे को भी आगे बढ़ाया है। अब देखना यह होगा कि ये बदलाव जनता के बीच किस तरह से स्वीकार किए जाते हैं और बिहार के भविष्य को किस दिशा में ले जाते हैं।