वाराणसी से उठी उम्मीद की नई लौ: बर्न इंस्टिट्यूट बनेगा जीवन बचाने का सबसे बड़ा केंद्र
2026-04-06 10:53 AM
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वाराणसी| पूर्वांचल ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए राहत और उम्मीद की एक बड़ी किरण बनकर वाराणसी बर्न इंस्टिट्यूट तेजी से आकार ले रहा है। जंसा क्षेत्र के कुरसातो गांव में बन रहा यह अत्याधुनिक संस्थान देश का सबसे बड़ा बर्न इलाज केंद्र बनने की दिशा में बढ़ रहा है। यहां प्रदेश का पहला और पूरे पूर्वी भारत का भी पहला स्किन बैंक स्थापित किया जाएगा, जो गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखता है।
हर साल लाखों जिंदगियों पर भारी पड़ती आग
भारत में हर साल 60 से 70 लाख लोग जलने की घटनाओं का शिकार होते हैं। इनमें से करीब डेढ़ लाख लोगों की जान चली जाती है, जबकि दो लाख से अधिक लोग स्थायी विकृतियों के साथ जीवन बिताने को मजबूर हो जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, 80 प्रतिशत से ज्यादा गंभीर मरीजों को आधुनिक और समय पर इलाज नहीं मिल पाता। यही वह बड़ी कमी है, जिसे दूर करने के लिए इस संस्थान की परिकल्पना की गई है।
एक डॉक्टर का सपना, जो अब हकीकत बन रहा है
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पीछे वाराणसी के प्रसिद्ध प्लास्टिक सर्जन डॉ. सुबोध कुमार सिंह का वर्षों पुराना सपना है। उनका लक्ष्य था कि पूर्वांचल और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को बेहतर और आधुनिक उपचार मिल सके। 4.5 एकड़ में बन रहे इस संस्थान में 126 बेड, 26 आईसीयू, 6 अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर, स्किन बैंक, ब्लड बैंक के साथ प्रशिक्षण और शोध केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
गरीबों के लिए उम्मीद की नई व्यवस्था
यह संस्थान सिर्फ इलाज का केंद्र नहीं होगा, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का भी उदाहरण बनेगा। यहां 25 प्रतिशत गरीब मरीजों का पूरी तरह मुफ्त इलाज किया जाएगा। इसके अलावा 50 प्रतिशत मरीजों को आयुष्मान योजना और अस्पताल की सब्सिडी के तहत निःशुल्क उपचार मिलेगा। शेष 25 प्रतिशत सक्षम मरीजों से प्राप्त शुल्क को गरीबों के इलाज में लगाया जाएगा, जिससे उपचार व्यवस्था संतुलित और टिकाऊ बनी रहे।
स्किन बैंक: इलाज की दिशा बदलने वाली तकनीक
इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यहां बनने वाला स्किन बैंक होगा। इसमें किसी मृत व्यक्ति की त्वचा को मृत्यु के छह घंटे के भीतर सुरक्षित कर लिया जाता है। विशेष प्रक्रिया के जरिए इसे माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तापमान पर पांच वर्षों तक संरक्षित रखा जा सकता है। यह तकनीक गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के लिए जीवनदायी साबित होती है।
जब त्वचा ही बनती है जीवन की ढाल
विशेषज्ञों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति गंभीर रूप से जल जाता है तो उसकी त्वचा सड़ने लगती है, जिससे संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में स्किन बैंक से प्राप्त त्वचा को अस्थायी रूप से लगाकर न केवल संक्रमण को रोका जा सकता है, बल्कि मरीज की जान बचाने और घाव भरने की प्रक्रिया को भी तेज किया जा सकता है।
हर तरह के बर्न के लिए अलग विशेषज्ञ यूनिट
संस्थान में इलाज की व्यापक व्यवस्था की जा रही है। यहां इलेक्ट्रिक बर्न, केमिकल और एसिड बर्न, स्मोक इनहेलेशन, रेडिएशन और कोल्ड बर्न के लिए अलग-अलग विशेष यूनिट्स बनाई जाएंगी। इसके साथ ही ऑक्सीजन चैंबर जैसी उन्नत सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी, जिससे मरीजों को बेहतर और तेज रिकवरी मिल सके।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से मजबूत होती पहल
प्रख्यात सर्जन डॉ. वी. भट्टाचार्य ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा है कि यह संस्थान भारत में बर्न इलाज के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। प्रदेश सरकार की ओर से भी इस परियोजना को सहयोग का आश्वासन मिला है। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसे समर्थन प्राप्त हुआ है। कैलिफोर्निया के थॉम्पसन फैमिली फाउंडेशन ने शुरुआती चरण में सहयोग देकर इस परियोजना को गति दी है।
एक संस्थान नहीं, जीवन बचाने का संकल्प
वाराणसी बर्न इंस्टिट्यूट सिर्फ एक अस्पताल नहीं, बल्कि उन लाखों जिंदगियों के लिए उम्मीद है, जो हर साल आग और दुर्घटनाओं की चपेट में आ जाती हैं। यह पहल न केवल इलाज की कमी को दूर करेगी, बल्कि देश में बर्न केयर की दिशा और स्तर को भी एक नई ऊंचाई देगी।