गर्भवती भैंस के पेट से निकलीं 66 लोहे की चीजें, डॉक्टरों ने बचाई जान
2026-07-14 10:18 AM
12
ऊना : हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में पशु चिकित्सकों की टीम ने एक बेहद चुनौतीपूर्ण सर्जरी कर नौ महीने की गर्भवती भैंस की जान बचाई है। पशु चिकित्सकों ने भैंस के पेट से 66 नुकीली धातु की वस्तुएं सफलतापूर्वक बाहर निकालीं, जिनमें कीलें, तार और लोहे के छोटे-छोटे टुकड़े शामिल थे। यह मामला ऊना जिले के लालरी स्थित वेटरिनरी पॉलीक्लिनिक का है। जानकारी के अनुसार, हरौली क्षेत्र के बरेवाल गांव निवासी करनैल सिंह अपनी भैंस को लेकर क्लिनिक पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि उनकी भैंस पिछले एक दिन से चारा नहीं खा रही थी और उसकी हालत लगातार खराब हो रही थी।
भैंस के व्यवहार में बदलाव और खाना छोड़ने के बाद पशु मालिक को चिंता हुई। इसके बाद वह उसे इलाज के लिए पशु चिकित्सालय लेकर पहुंचे। जांच के दौरान चिकित्सकों को संदेह हुआ कि भैंस के पेट में कोई बाहरी वस्तु हो सकती है। पशु चिकित्सकों ने आवश्यक जांच की, जिसमें पता चला कि भैंस के पेट में कई धातु की वस्तुएं मौजूद हैं। सबसे बड़ी चिंता यह थी कि भैंस नौ महीने की गर्भवती थी और किसी भी तरह की लापरवाही उसकी और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की जान के लिए खतरा बन सकती थी।
इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने तुरंत ऑपरेशन करने का फैसला लिया। यह एक बेहद जटिल सर्जरी थी, क्योंकि पेट में मौजूद नुकीली धातु की चीजें अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंचा सकती थीं। चिकित्सकों ने सावधानीपूर्वक ऑपरेशन शुरू किया और घंटों की मेहनत के बाद भैंस के पेट से कुल 66 धातु की वस्तुएं निकाल लीं। सर्जरी के दौरान निकाली गई वस्तुओं में लोहे की कीलें, तार और अन्य छोटे-बड़े धातु के टुकड़े शामिल थे। डॉक्टरों के अनुसार, यदि समय रहते यह ऑपरेशन नहीं किया जाता तो नुकीली वस्तुओं के कारण भैंस के पेट और अन्य अंगों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता था, जिससे उसकी जान भी जा सकती थी।
पशु चिकित्सकों की टीम ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार पशु खुले में घूमते समय कचरे के साथ लोहे की वस्तुएं निगल लेते हैं। खासकर प्लास्टिक और अन्य कचरे के साथ मौजूद कील, तार और लोहे के टुकड़े पशुओं के पेट में पहुंच जाते हैं और गंभीर समस्याएं पैदा कर सकते हैं। डॉक्टरों ने बताया कि भैंस की स्थिति अब नियंत्रण में है और ऑपरेशन के बाद उसकी निगरानी की जा रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि उचित देखभाल के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ हो जाएगी और जल्द ही बच्चे को जन्म दे सकेगी।
भैंस के मालिक करनैल सिंह ने पशु चिकित्सकों की टीम का आभार जताया। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि भैंस के पेट में इतनी बड़ी संख्या में धातु की चीजें हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि समय पर इलाज मिलने से उनकी भैंस की जान बच गई। इस घटना ने एक बार फिर पशुओं के सामने मौजूद खतरे को उजागर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि गांवों और शहरों में खुले में फेंके जाने वाले कचरे से पशुओं को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है। पशु अक्सर भोजन की तलाश में प्लास्टिक, लोहे और अन्य हानिकारक वस्तुएं निगल लेते हैं।
पशु चिकित्सकों ने लोगों से अपील की है कि वे कचरे का उचित निपटान करें और सड़कों या खुले स्थानों पर ऐसी चीजें न फेंकें, जो पशुओं के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। यह ऑपरेशन पशु चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। नौ महीने की गर्भवती भैंस के पेट से इतनी बड़ी संख्या में नुकीली वस्तुएं निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन डॉक्टरों की सतर्कता और कुशलता से भैंस की जान बचाई जा सकी।