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इथेनॉल की बढ़ती उत्पादन क्षमता बनी चुनौती, अतिरिक्त स्टॉक खपाने के लिए नए बाजार तलाश रहा उद्योग…

नई दिल्ली:- भारत में इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने की नीति के बीच अब इसकी बढ़ती उत्पादन क्षमता के इस्तेमाल को लेकर नई चुनौती सामने आ रही है। देश में इथेनॉल बनाने की स्थापित क्षमता करीब 20 अरब लीटर तक पहुंच गई है, जबकि मौजूदा खपत इसके मुकाबले काफी कम है। उद्योग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार लगभग 7 अरब लीटर इथेनॉल के लिए फिलहाल पर्याप्त बाजार उपलब्ध नहीं है।

E20 की जरूरत से ज्यादा उत्पादन क्षमता
पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण यानी E20 व्यवस्था के लिए हर साल करीब 11 अरब लीटर इथेनॉल की जरूरत पड़ती है। वहीं, शराब, फार्मास्यूटिकल्स और केमिकल उद्योग समेत अन्य गैर-ईंधन क्षेत्रों में करीब 3 से 3.5 अरब लीटर की खपत होती है। ऐसे में कुल मांग और मौजूदा उत्पादन क्षमता के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।

उद्योग के जानकारों के मुताबिक कई डिस्टिलरी अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पा रही हैं और करीब 60 प्रतिशत क्षमता पर संचालन कर रही हैं। आने वाले समय में भी क्षमता उपयोग 65 से 75 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान है। महाराष्ट्र में अतिरिक्त इथेनॉल की मात्रा करीब 2.77 अरब लीटर तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।
E20 के बाद क्या होगा?

सरकार फिलहाल E20 कार्यक्रम को आगे बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। E25 या E30 जैसे उच्च मिश्रण वाले ईंधन को अनिवार्य करने की दिशा में अभी कोई तत्काल कदम नहीं उठाया जा रहा है। सरकार 2027 तक E20 के प्रभाव और इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं का आकलन करने की तैयारी में है।

इसी बीच उद्योग जगत अलग-अलग वाहनों की तकनीकी क्षमता के हिसाब से अलग मिश्रण वाले पेट्रोल उपलब्ध कराने के विकल्प पर चर्चा कर रहा है। इसमें E10, E20 और E85 जैसे विकल्प शामिल हैं, ताकि वाहन की अनुकूलता के अनुसार ईंधन का इस्तेमाल किया जा सके।

विदेशों में बाजार तलाशने की कोशिश
अतिरिक्त इथेनॉल की खपत के लिए घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय विकल्पों पर भी नजर है। मौजूदा व्यवस्था के तहत पहली पीढ़ी के इथेनॉल के निर्यात पर प्रतिबंध है, जबकि दूसरी पीढ़ी के इथेनॉल को विदेश भेजने की अनुमति है। गैर-ईंधन श्रेणी के कुछ इथेनॉल का निर्यात अफ्रीकी देशों में किया जा रहा है।

नेपाल भी संभावित बाजार के तौर पर सामने आया है। दोनों देशों के बीच इथेनॉल आपूर्ति को लेकर बातचीत चल रही है। नेपाल में पेट्रोल में 10 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने की व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा रहा है, जिससे भारतीय उत्पादकों के लिए एक नया बाजार बन सकता है।

डीजल में जैव ईंधन मिश्रण पर भी नजर
इथेनॉल की अतिरिक्त क्षमता के इस्तेमाल के लिए डीजल क्षेत्र में जैव ईंधन के प्रयोग की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल की खपत पेट्रोल से अधिक होने के कारण इसमें जैव-आइसोब्यूटेनॉल की सीमित मात्रा मिलाने से ईंधन उद्योग के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
 

उद्योग के अनुमान के मुताबिक डीजल में महज 2 प्रतिशत जैव-आइसोब्यूटेनॉल मिश्रण की व्यवस्था भी बड़े पैमाने पर नई उत्पादन परियोजनाओं की मांग पैदा कर सकती है। इसके अलावा शराब, दवा उद्योग और प्रयोगशालाओं में इस्तेमाल होने वाले अनडिनैचर्ड इथेनॉल की मांग को भी अतिरिक्त उत्पादन खपाने के एक संभावित माध्यम के रूप में देखा जा रहा है। 

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