कारों के प्रदूषण पर लगेगी सख्त पाबंदी, केंद्र सरकार ने जारी किए नए नियम
2026-10-01 12:55 PM
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नई दिल्ली: भारत में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने पैसेंजर वाहनों से जुड़े नए नियम लागू करने की तैयारी कर ली है। ऊर्जा मंत्रालय ने CAFE 3 यानी Corporate Average Fuel Economy के तीसरे चरण की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। नए नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे और 31 मार्च 2032 तक प्रभावी रहेंगे। इनका मुख्य उद्देश्य कार कंपनियों की पूरी फ्लीट से होने वाले औसत कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करना और वाहनों की फ्यूल एफिशिएंसी बढ़ाना है।
2027 से शुरू होंगे CAFE 3 के नए नियम
CAFE 3 के तहत वाहनों की औसत ईंधन खपत को लगातार कम करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2027-28 में बेंचमार्क फ्यूल खपत 3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर तय की गई है। इसे चरणबद्ध तरीके से घटाकर 2031-32 तक 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर तक लाने का लक्ष्य है। इसके लिए वाहनों के वजन को ध्यान में रखकर एक विशेष फॉर्मूला तैयार किया गया है। कार निर्माता की पूरी फ्लीट के औसत वजन के आधार पर अलग-अलग मॉडलों के लिए कार्बन उत्सर्जन की सीमा तय होगी। भारी वाहनों, खासकर एसयूवी के लिए मानक ज्यादा सख्त रखे जाएंगे।
इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को मिलेगा अतिरिक्त लाभ
सरकार ने कम प्रदूषण वाले वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सुपर क्रेडिट सिस्टम भी रखा है। इसके तहत एक बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन को फ्लीट एवरेज में तीन वाहनों के बराबर माना जाएगा। प्लग-इन हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहनों को 2.5 गुना वेटेज मिलेगा, जबकि सामान्य स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहनों के लिए यह वेटेज 1.6 गुना होगा। इस व्यवस्था के तहत कंपनियों को अपनी कुल फ्लीट के कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी और इलेक्ट्रिक तथा हाइब्रिड वाहनों के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
कंपनियों के लिए क्रेडिट और डेबिट सिस्टम
CAFE 3 नियमों में कंपनियों के लिए क्रेडिट-डेबिट पासबुक व्यवस्था भी बनाई गई है। अगर कोई कंपनी तय सीमा से कम उत्सर्जन करती है तो उसके खाते में क्रेडिट दर्ज होंगे। वहीं, निर्धारित सीमा से ज्यादा उत्सर्जन करने पर कंपनी के खाते में डेबिट दर्ज किया जाएगा। कम उत्सर्जन वाली कंपनियां अपने अतिरिक्त क्रेडिट उन कंपनियों को बेच सकेंगी जो तय लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाती हैं। इसके अलावा कंपनियों को ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी से सीधे क्रेडिट खरीदने का विकल्प भी मिलेगा। वर्ष 2027-28 में इन क्रेडिट की कीमत 2,500 रुपये प्रति ग्राम CO2/किमी से शुरू होगी और 2031-32 तक यह 4,500 रुपये तक पहुंच जाएगी।
कारों में बढ़ेंगी फ्यूल बचाने वाली तकनीकें
नए नियम लागू होने के बाद पेट्रोल और डीजल कारों की तकनीक में बदलाव देखने को मिल सकता है। कंपनियों को वाहनों में टायर प्रेशर मॉनिटरिंग, ऑटो स्टार्ट-स्टॉप और रीजेनरेटिव ब्रेकिंग जैसी ईंधन बचाने वाली तकनीकों को शामिल करना होगा। इन तकनीकों और हाइब्रिड सिस्टम के इस्तेमाल से शुरुआती दौर में कारों की मैन्युफैक्चरिंग लागत बढ़ सकती है। इसका असर वाहनों की कीमतों पर भी पड़ने की संभावना बताई गई है। हालांकि, बेहतर माइलेज मिलने से लंबे समय में ग्राहकों के पेट्रोल और डीजल पर होने वाले खर्च में कमी आ सकती है। साथ ही, इन नियमों का उद्देश्य वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करना और हवा की गुणवत्ता में सुधार लाना है।