दिव्य महाराष्ट्र मंडल

एकल अभिनय से गौरी, प्रसन्‍न, अभिषेक ने किया प्रभावित

0- महाराष्‍ट्र मंडल की ओर से ‘जिजाऊ का चिंतन’, ‘आई’ का बेटा और ‘शिवाजी महाराज’ के जीवंत प्रस्‍तुति के लिए देर तक बजती रहीं तालियां

रायपुर। ‘निजाम शाह ने धोखे से आबा साहब और हमारे भाइयों का कत्‍ल कर दिया। सचमुच हमारा मायका खत्‍म हो गया। आदिलशाह ने हमारे पूना को पूरी तरह तहस- नहस कर दिया। इधर देवाई शिवाई की कृपा से हिंदवी स्‍वराज के सूरज शिवाजी का जन्‍म हुआ।‘ नम आंखों और थरथराती आवाज से बोले गए ये संवेदनशील संवाद रंगप्रेमी दर्शकों को भावुक कर गए। बात हो रही है गौरी क्षीरसागर के प्रभावी एकल अभिनय ‘जिजाऊ का चिंतन’ की, जिसे अपर्णा कालेले ने लिखा और निर्देशित किया। अवसर था सिविल लाइन स्थित वृंदावन सभागृह में आयोजित बैंकर्स बंधु के एकल अभिनय कार्यक्रम का।  
 
गौरी क्षीरसागर की ही तरह प्रसन्‍न निमोणकर और अभिषेक बक्षी ने भी महाराष्‍ट्र मंडल की ओर से बेहतरीन एकल अभि‍नय कर झकझोर दिया। प्रसन्‍न ने बेहद थकी हुई मां के चिंतित बेटे की भूमिका को साकार करते हुए कहा कि ‘हम बड़े हो रहे हैं, थक रहे हैं, फिर भी हम अपनी मां को बड़ा होते हुए नहीं देख सकते, बीमार नहीं देख सकते, थक हुआ नहीं देख सकते। हमें अपनी वही मां चाहिए, जो अपने हाथों से हमें खाना खिलाए, दवा दे, छोटी- छोटी बातों को लेकर हमें टोके, हमारा ख्‍याल रखें। इसमें वंदना निमोणकर का निर्देशन व रुपसज्‍जा कमाल की रहा। 
 
छत्रपति शिवाजी महाराज का अभिनय करते हुए अभिषेक बक्षी ने वाहवाही के साथ खूब तालियां बटोरीं। अभिषेक ने शिवाजी महाराज के बाजी प्रभु देशपांडे से संवादों को भावपूर्ण ढंग से प्रस्‍तुत करते हुए कहा कि ‘सई मेरी पत्‍नी ही नहीं, मेरी मार्गदर्शक थीं। बहुत ही बीमार, अंदर से टूटी हुई सई, मुझसे मिलते हुए अभिनय कर रही थी मानो उन्‍हें कुछ हुआ ही है। मैं भी जानता था कि सई से ये मेरी अंतिम मुलाकात है। मैं रो रहा था लेकिन भीतर ही भीतर, ऊपर से मैं भी अभिनय करने लगा मानो मुझे कुछ पता ही नहीं।‘ अभिषेक के इस संवेदनशील अभिनय के बाद दर्शक दीर्घा से काफी देर तक तालियां बजतीं रहीं। आयोजकों ने तीनों ही कलाकारों को सम्‍मानित किया।