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काशी तमिल संगमम में भाग लेने के लिए तमिल प्रतिनिधिमंडल का पहला दल पहुंचा काशी

नईदिल्ली। काशी तमिल संगमम में भाग लेने के लिए तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों से आए छात्रों का प्रतिनिधिमंडल पवित्र शहर काशी (वाराणसी) पहुंच गया। जहां वे काशी तमिल संगमम के 15 दिवसीय दूसरे चरण में भाग लेंगे। इस दल का नाम पवित्र नदी गंगाके नाम पर रखा गया है। आज वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन पहुंचने पर दल के सदस्‍यों का भव्य स्वागत किया गया।

इस कार्यक्रम के दौरान संगमम में भाग लेने के लिए छह अन्‍य समूह, जिनमें शिक्षक (यमुना), पेशेवर (गोदावरी), आध्यात्मिक (सरस्वती), किसान और कारीगर (नर्मदा), लेखक (सिंधु) तथा व्यापारी व व्यवसायी (कावेरी) शामिल हैं, भी काशी पहुंच रहे हैं।

संस्कृति मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, रेल मंत्रालय, वस्‍त्र मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय (ओडीओपी), एमएसएमई, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय, आईआरसीटीसी तथा उत्तर प्रदेश सरकार के संबंधित विभागों की भागीदारी के साथ; भारत सरकार का शिक्षा मंत्रालय इस आयोजन के लिए नोडल एजेंसी है।

लोगों को आपस में जोड़ने वाले इस कार्यक्रम का व्यापक उद्देश्य काशी और तमिलनाडु के बीच जीवंत संबंधों को पुनर्जीवित करना है, जो प्राचीन भारत में शिक्षा और संस्कृति के दो महत्वपूर्ण केंद्र थे। इसका लक्ष्‍य साझी विरासत की समझ का निर्माण करते हुए तथा इन दोनों क्षेत्रों के लोगों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करते हुए ज्ञान और संस्कृति की इन दो परंपराओं को एक साथ लाना है।

इस उत्सव का उद्देश्य दो संस्कृतियों के बीच प्राचीन बौद्धिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और कारीगरी संबंधों के बारे में फिर से जानकारी प्राप्‍त करना और इन्‍हें सशक्‍त बनाना है। 15 दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम के दौरान तमिलनाडु और वाराणसी के विभिन्न सांस्कृतिक समूह काशी में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे।

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