मध्यप्रदेश न्यायाधीश संघ का 10वां वार्षिक सम्मेलन.... संघ के नवीन “लोगों और मोटो” का अनावरण
भोपाल। मध्यप्रदेश न्यायाधीश संघ के दसवें द्विवर्षीय सम्मेलन का शुभारंभ शनिवार को भोपाल के रवीन्द्र भवन में मुख्य अतिथि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधिपति संजीव खन्ना, विशिष्ट अतिथि माननीय न्यायाधिपति अनिरूद्ध बोस, न्यायाधिपति जेके माहेश्वरी तथा माननीय मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ ने दीप प्रज्जवलन कर किया। इसमें संघ के नवीन “लोगों और मोटो” का अनावरण किया। माननीय न्यायाधिपति संजीव खन्ना द्वारा “बैकलॉग्स टू ब्रेकथ्रुस” किताब का विमोचन किया गया। इसमें एक “सोवेनियर” का विमोचन भी न्यायामूर्ति अनिरूद्ध बोस, न्यायाधीश संघ के संविधान के द्विभाषी संस्करण का विमोचन न्यायामूति जेके माहेश्वरी द्वारा किया गया।
सुबोध जैन, अध्यक्ष मध्यप्रदेश न्यायाधीश संघ द्वारा स्वागत उदबोधन में मध्यप्रदेश के माननीय मुख्य न्यायामूर्ति द्वारा न्यायाधीशों के उत्थान हेतु किये गये कार्यों का उल्लेख कर जिला न्यायालय के न्यायाधीशों को प्रभावित करने वाले विभिन्न मुद्दों को प्रकट किया। इस अवसर पर उन्होंने न्यायालय की कार्यवाही की लाईवस्ट्रीमिंग की शुरूआत एवं विगत वर्षों में दिवंगत हुये न्यायाधीशों के संबंध में आयोजित सभा आदि विषयों पर विचार व्यक्त करते हुये आयोजित अधिवेशन को न्यायाधीशों के लिये एक अलग पहल होना बताया।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधिपति संजीव खन्ना ने कहा कि वे स्वयं एक जिला न्यायाधीश के पुत्र हैं। उन्होंने अपनी संपूर्ण न्यायिक यात्रा न्यायाधीशों से साझा कर प्रकट किया कि न्यायाधीशों को न सिर्फ न्यायालयों में अपितु समाज के प्रत्येक हिस्से में सम्मान मिलता है। उनके द्वारा न्यायाधीशों को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में संवेदनशील होने और समाज के प्रत्येक वर्ग के प्रति न्यायिक कार्य को और अधिक संवेदनशीलता और जिम्मेदार से करने की अपेक्षा की।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधिपति अनिरूद्ध बोस ने कहा कि न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की संख्या और उनके निराकरण में विलंब होने के संबंध में अपनी चिंता प्रकट करते हुय यह अपेक्षा की कि न्यायाधीश अधिक से अधिक प्रकरणों का निराकरण कर इसमें वैकल्पिक विवाद समाधान के तरीकों का प्रभावी उपयोग करें।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायामूर्ति जेके माहेश्वरी द्वारा न्यायाधीशों के अपने कर्म के प्रति सजग होने के लिये एवं न्यायाधीश के कार्य को पुनीत कार्य होना प्रकट कर न्यायाधीशों को उनकी नियुक्ति से समय दिलाये जाने वाली शपथ एवं संविधान के अंतर्गत न्यायालयों को नागरिकों के मूलभूत अधिकार की रक्षा के प्रति सजग किया। उनके द्वारा राग, लोभ, भय द्वेष से विमुक्त होकर कार्य करने की सलाह दी है।
माननीय मुख्य न्यायाधिपति मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय श्री रवि मलिमठ द्वारा अपने अभिभाषण में 60 वर्ष से लंबित एक प्रकरण के निराकरण का उदाहरण देते हुये बताया कि न्यायाधीश को मेहनत कर प्रकरण के अंतिम निराकरण हेतु सर्वोच्च कार्यकरना चाहिये। उनके द्वारा “25 पुराने प्रकरण” निराकरण योजना के अंतर्गत न्यायाधीशों द्वारा तेज गति से कार्य करने पर उन्हें बधाई दी साथ ही कहा कि प्रकरण विलंबन की अंतहीन प्रक्रिया को समाप्त कर न्यायाधीश अपनी मेहनत से प्रकरण को अंतिम निराकरण तक पहूँचा सकता है।