रायपुर

थैलियों को कचरे की जगह प्लास्टिक की बोतल में डालना उचित, जानवर नहीं खाएंगे प्लास्टिक

रायपुर। ज्ञानाश्रय नर्सरी स्कूल में आज प्लास्टिक की थैलियों के निदान के संबंध में छात्रों को बताया गया। स्कूल संचालक विजय हिशीकर ने छात्रों एवं शिक्षकों को बताया कि प्लास्टिक की थैलियां इधर-उधर पड़ी रहती है, उसमें अगर खाना हो तो वह जानवरों के लिए खासकर गोमाता के लिए काफी नुकसानदेह होता है। इसी समस्या के समाधान के लिए इन थैलियों को कचरे  की जगह प्लास्टिक की बोतल में डालना चाहिए और जब बोतल भर जाए तो इसे कूड़ेदान में फेंकना चाहिए। इससे फायदा यह होगा कि बिखरा हुआ प्लास्टिक जानवर नहीं खाएंगे। निगम के कचरा विभाग को भी कूड़ा जमा करने में दिक्कत नहीं होगी।

प्राचार्य वैभवी हिशीकर  ने कहा कि इतने छोटे से काम से पर्यावरण धरती और आने वाली पीढ़ी को बहुत बड़ा फायदा होगा। जितना हो सके इस काम को अधिक से अधिक लोग मिलकर करें। जिससे हम पर्यावरण एवं आने वाली पीढ़ी कि हम जीवन रक्षा कर सकें। उन्होंने यह जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का आग्रह किया। हम सब ने यह ठाना है भारत को प्लास्टिक मुक्त बनाना है, इसी शपथ के साथ आओ हम सब मिलकर अपने मोहल्ले अपने शहर और अपने प्रदेश को प्लास्टिक मुक्त बनाएं।

प्राचार्य ने कहा कि पानी की बोतल आसानी से कहीं भी मिल सकती है। हर घर में हर दिन कम से कम एक या एक से अधिक प्लास्टिक की थैलियाँ आती हैं, (जैसे तेल की थैली, दूध की थैली, किराने की थैली, शैम्पू, साबुन, मैगी, कुरकुरे आदि) वही थैलियां हमें रोज कूड़ेदान की जगह पानी की बोतल में डालना हैं। आप सप्ताह में एक बार बोतल को भर सकते हैं और उचित ढक्कन के साथ कूड़ेदान में फेंक दें। ऐसा करने से जानवर बिखरा हुआ प्लास्टिक नहीं खाएंगे।

इस अवसर पर शाला के शिक्षक गण सुधांशु कुमार, ममता यादव, मधु गुप्ता, किरनजीत कौर, पायल राठौर, दीक्षा जैन, हेमा साहनी, पलक चोपड़ा, माया शुक्ला, अमिता सिंह, शगुफ्ता अंजुम एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।