रायपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर के सिद्धा विभाग द्वारा आयुष भवन में 9वाँ सिद्धा दिवस मनाया गया, जिसमें समग्र स्वास्थ्य सेवा में सिद्धा चिकित्सा की भूमिका तथा वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों में इसकी बढ़ती प्रासंगिकता को रेखांकित किया गया।
यह कार्यक्रम भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय सिद्धा संस्थान (एनआईएस) द्वारा आयोजित नि:शुल्क सिद्धा चिकित्सा जागरूकता शिविर के साथ, “वैश्विक स्वास्थ्य के लिए सिद्धा” विषय पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आयुष एवं आधुनिक चिकित्सा संकायों के सदस्यों, छात्रों, स्वास्थ्यकर्मियों, रोगियों तथा आम जनता की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. वी. लक्ष्मणकुमार, चिकित्सा अधिकारी (सिद्धा), एम्स रायपुर के स्वागत संबोधन से हुआ, जिसमें उन्होंने सिद्धा चिकित्सा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, मूल सिद्धांतों एवं महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त), कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी, एम्स रायपुर ने की। उन्होंने आयुष विभागों के बीच बेहतर समन्वय और एकता की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे समन्वित और एकीकृत प्रयासों को आधुनिक चिकित्सा में भी सशक्त किया जाना चाहिए, ताकि समग्र रोगी देखभाल और शैक्षणिक उन्नति सुनिश्चित की जा सके। चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) रेणु राजगुरु ने दर्द प्रबंधन में सिद्धा बाह्य चिकित्सा के अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए एकीकृत चिकित्सा पद्धति के महत्व को रेखांकित किया।
प्रो. (डॉ.) अभिरुचि गलहोत्रा, डीन (अनुसंधान), एम्स रायपुर ने सामुदायिक चिकित्सा के दृष्टिकोण से समग्र और समुदाय-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा की आवश्यकता पर बल दिया तथा रोकथाम, जीवनशैली में सुधार और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक चिकित्सा के साथ एकीकृत करने की वकालत की, साथ ही वैज्ञानिक दृढ़ता और रोगी सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। फार्माकोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पुगझेंथन ने सिद्धा एवं आधुनिक चिकित्सा विभागों के बीच चल रही संयुक्त शोध पहलों की जानकारी दी। कार्यक्रम को राष्ट्रीय सिद्धा संस्थान, चेन्नई की विशेषज्ञ डॉ. टी. मोनिका के व्याख्यान ने और समृद्ध किया, जिसमें उन्होंने सिद्धा चिकित्सा की शास्त्रीय आधारशिला तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य में इसकी समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यकारी निदेशक एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों द्वारा औषधीय पौधों के पौधों का वितरण भी किया गया, जो निवारक, पर्यावरण-अनुकूल एवं सतत स्वास्थ्य सेवा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक था। नि:शुल्क सिद्धा चिकित्सा जागरूकता शिविर से 151 रोगियों को लाभ मिला, जबकि हर्बल एक्सपो में 200 से अधिक आगंतुकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का समापन डॉ. विक्रम पई, चिकित्सा अधिकारी (योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा), एम्स रायपुर के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।