नेत्रदान से दूसरे के जीवन में ला सकते हैं उजालाः विक्रम हिशीकर
रायपुर। डॉ राधाबाई शासकीय नवीन कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय रायपुर में रेड क्रॉस सोसायटी द्वारा नेत्रदान विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। जिसके मुख्य वक्ता भारतीय डाक सेवा से जुड़े और सामाजिक संस्था महाराष्ट्र मंडल के नेत्रदान-देहदान प्रभारी विक्रम हिशीकर थे। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि नेत्रदान है महादान। आंखें न सिर्फ हमें रोशनी देती हैं बल्कि किसी और की जिंदगी में उजाला भी भर सकती हैं। शरीर के सभी अंग समान रूप से महत्वपूर्ण हैं, फिर भी आंखें कुछ अधिक विशेष मानी जा सकती हैं।
विक्रम हिशीकर ने आगे कहा कि आंखें हमें दृष्टि प्रदान करती हैं और दुनिया की सुंदरता का आनंद लेने में सक्षम बनाती हैं। हालांकि, कई प्रकार की दृष्टिहीनता के कारण, बहुत से लोग अपनी दृष्टि खो देते हैं और उनके लिए दुनिया अंधकारमय हो जाती है। हम नेत्रदान के एक सरल कदम से उन्हें प्रकाश का उपहार दे सकते हैं। आज विश्वभर में अंधापन एक गंभीर समस्या है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मोतियाबिंद और ग्लूकोमा के बाद, अंधापन का सबसे प्रमुख कारण कॉर्निया की खराबी है। इनमें से अधिकांश खराबियों का इलाज संभव है, विशेष रूप से नेत्रदान के माध्यम से, जिसका अर्थ है मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करना।
उन्होंने कहा कि शरीर के अन्य अंगों की तरह, आंख का कॉर्निया भी मृत्यु के बाद दान किया जा सकता है, जिससे अंधों को दृष्टि प्राप्त हो सकती है। हालांकि, जागरूकता की कमी, सामाजिक या धार्मिक बाधाओं आदि के कारण, हमारे देश में नेत्रदान को अभी तक उतना महत्व नहीं मिल पाया है। दान की गई आंखों का उपयोग कॉर्नियल अंधत्व से पीड़ित लोगों की दृष्टि को बहाल करने के लिए किया जाता है। कॉर्निया आंख के सामने के हिस्से को ढकने वाला पारदर्शी ऊतक है। यदि यह क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो दृष्टि कम हो जाती है या पूरी तरह से चली जाती है।ऐसे मामलों में, केराटोप्लास्टी नामक एक साधारण सर्जरी द्वारा दृष्टि को बहाल किया जा सकता है, जिसमें कॉर्निया को बदल दिया जाता है।
आज तक,कॉर्नियल अंधत्व का कॉर्निया प्रतिस्थापन के अलावा कोई अन्य समाधान नहीं है।साथ ही बताया कि एड्स (HIV), हेपेटाइटिस बी/सी, रेबीज, टेटनस, सेप्टीसीमिया (रक्त संक्रमण), कैंसर (विशेषकर रक्त कैंसर), और मेनिन्जाइटिस जैसी गंभीर संक्रामक बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति नेत्रदान नहीं कर सकते हैं। वक्ता ने छात्राओं के प्रश्नों का उत्तर देकर उनके जिज्ञासा को शांत किया। कार्यक्रम का सफल संचालन रेड क्रॉस सोसायटी के प्रभारी डॉ श्वेता अग्निवंशी ने किया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष,वरिष्ठ प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, अतिथि व्याख्याता एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रही।