‘गौरा’ में प्रतिष्ठा के रॉक आर्ट में दिख रही पुरातन संस्कृति
- महंत घासीदास संग्रहालय में लगी दो दिवसीय राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी
रायपुर। राजधानी रायपुर स्थित महंत घासीदास संग्रहालय की आर्ट गैलरी में छत्तीसगढ़ प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप की ओर से राष्ट्रीय दृश्य कला प्रदर्शनी गौरा का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी में महाराष्ट्र मंडल रायपुर के आजीवन सभासद राजीव गाडगिल की पुत्री प्रतिष्ठा गाडगिल ने रॉक आर्ट बनाया है। जिस आर्ट में आदिवासियों को शिकार करते दिखाया गया है। यह आर्ट हमारी पुरातन संस्कृति को दर्शा रहा है।
प्रतिष्ठा ने बताया कि इन पेंटिंग्स में आदिवासियों को शिकार करते हुए दिखाया गया है। इनमें आदिवासियों का समूह एक साथ चलते हुए भी दिखाया गया है। इस आर्ट में 'पत्थर' जैसा टेक्सचर बनाने के लिए पीओपी और सीमेंट का इस्तेमाल किया गया है। इस आर्ट वर्क को पूरा करने में लगभग दो सप्ताह का समय लगा।
प्रतिष्ठा ने आगे बताया कि उन्होंने इस आर्ट में प्राकृतिक रंगों के इस्तेमाल किया। रंग बनाने के लिए लाल पत्थरों और हरी पत्तियों का उपयुक्त माना। इसके साथ ही, पुआल और रेत जैसे एलिमेंट्स का भी इस्तेमाल किया गया है। यह आर्ट वर्क इंसानी ज़िंदगी में आर्ट की शुरुआत को दिखाता है। इसमें पुराने ज़माने की लाइफस्टाइल कैसी थी, इसका साफ-साफ दिखाया गया है। रंगों के नेचुरल शेड्स की वजह से ये पेंटिंग्स बहुत असली लगती हैं। जैसा कि आर्टिकल में बताया गया है, यह आर्टवर्क 'बेमिसाल' है और इतिहास की कहानी कहता है। ये पेंटिंग्स एग्ज़िबिशन में दर्शकों का ध्यान खींच रही हैं।
प्रतिष्ठा ने कहा कि इस आर्ट की खासियत मॉडर्न लिटरेचर के ज़रिए पुराने अनुभवों को बताना है। यह इंसान के शुरुआती दिनों के संघर्ष की एक झलक है। इसके ज़रिए पुराने ज़माने की संस्कृति को बचाए रखने की कोशिश दिखती है। इन पेंटिंग्स को देखते हुए ऐसा लगता है जैसे हम पुराने ज़माने में वापस चले गए हैं।