महाराष्ट्र मंडल के बाल संस्कार शिविर में बच्चों ने खेला ‘घोड़ा बदाम छाई और पोशांपा भाई पोशांपा’
रायपुर। ‘घोड़ा बदाम छाई पीछे देखे मार खाई और पोशांपा भाई पोशांपा’ जैसे खेल बड़ों को भी बचपन की याद दिया देते है। महाराष्ट्र मंडल में चल रहे बाल संस्कार शिविर में आफलाइन क्लास के दूसरे सप्ताह के दूसरे दिन शनिवार को बच्चों ने इन्हीं खेलों के साथ खूब एजाय किया। वहीं नंबर गेम का भी बच्चों ने खूब आनंद उठाया। सुडोकू में बच्चों ने गणपति के 11 नामों को ढूंढने में भी उत्सुकता दिखाई।

आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले ने बताया कि बाल संस्कार शिविर के आफलाइन क्लास के दूसरे सप्ताह के दूसरे दिन शनिवार को बच्चे खेल में इतने रम गए कि उन्हें घर जाने का मन ही नहीं कर रहा था। बच्चे कह रहे थे कि रविवार को भी क्लास रखें वे रविवार को भी यहां आना चाहते है।

शनिवार को बच्चों का स्वागत विधिवत टीका लगाकर मंजूषा वैशंपायन और संध्या खंगन ने किया। तत्पश्चात शनिवार होने के कारण सभी ने मंजूषा वैशंपायन और संध्या खंगन की अगुवाई में एक स्वर में हनुमान चालीसा का पाठ किया। पाठ के बाद आस्था काले ने बच्चों से वार्म अप और योग कराया गया। जिसमें ताड़ासन, द्विकोणआसान, सेतुबंध आसान, चक्रासन, पवनमुक्तासन, झूलना, लुढ़कना, शशांकसन, वज्रासन शांति मंत्र करवाया गया।

तीसरे चरण में बच्चों को रचना ठेंगड़ी द्वारा माइंड गेम करवाया गया। जिसमें क्रासवर्ड में भगवान श्रीगणेश के 11 नाम लिखे गए थे। जिन्हें पढ़कर बच्चों को उसे मार्क करना था। जिसमें बच्चों ने उत्साह के साथ श्रीगणेश के नाम गणपति, विघ्नहर्ता, विनायक, गणेश, एकदंत, लंबोदर जैसे नामों को खोजा।

चौथे चरण में बच्चों के लिए युवा समिति की प्रमुख डा. शुचिता देशमुख और सृष्टि दंडवते द्वारा ‘घोड़ा बदाम छाई और पोशांपा भाई पोशांपा’ का गेम खेलाया गया। जिस दौरान बच्चे खूब एनर्जेटिक नजर आए। बच्चे बार-बार वंश मोर-वंश मोर करते रहे। अंत में आर्टिसन अजय पोतदार ने बच्चों को नंबर्स गेम खेलाया। जिसमें एक से लेकर 100 तक गिनती करती थी। लेकिन नंबर में पांच और सात का अंक आने पर उसके स्थान पर क्लैप करना था।

फायरलेस कुकिंग के अंतर्गत संध्या खंगन, रचना ठेंगड़ी और अक्षता पंडित ने बच्चों को भेल और गोपाल काला बनाना सीखाया। गोपालकाला भगवान श्रीकृष्ण को चढ़ने वाला विशेष प्रसाद है, जो जन्माष्टी के अवसर पर विशेष रुप से बनाया जाता है।