मनुष्य खुशी को बाहरी वस्तुओं में ढूंढ रहे हैं- ब्रह्माकुमारी अदिति दीदी
2026-04-23 12:05 PM
29
रायपुर। वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी अदिति दीदी ने कहा कि मनुष्य खुशी को भौतिक पदार्थों में ढूँढ रहे हैं किन्तु भौतिक पदार्थों से स्थायी खुशी नही मिल सकती। राजयोग से ही जीवन में स्थायी खुशी प्राप्त की जा सकती है। राजयोग के लिए स्वयं की पहचान जरूरी है।
ब्रह्माकुमारी अदिति दीदी आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा अविनाश केपीटल होम्स सड्ढू रायपुर में आयोजित तनावमुक्ति एवं शान्ति अनुभूति शिविर के पहले दिन खुशी का आधार-आत्मानुभूति विषय पर अपने विचार रख रही थीं। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने जीवन को चिन्ता रहित, सुख-शान्ति सम्पन्न बनाना चाहते हैं तो यह जानना निहायत जरूरी है कि मैं कौन हूॅं?
उन्होंने बतलाया कि इस दुनिया में जितनी भी जड़ पदार्थ हैं, वह स्वयं अपने ही उपयोग के लिए नही बने हैं। सभी जड़ पदार्थों का उपभोग करने वाला उससे भिन्न कोई न कोई चैतन्य प्राणी होता है। हमारा यह शरीर भी जड़ पदार्थों से बना पांच तत्वों का पुतला है तो जरूर इसका उपयोग करने वाला इससे भिन्न कोई चैतन्य शक्ति होनी चाहिए।
ब्रह्माकुमारी अदिति दीदी ने कहा कि जब हम कहते हैं कि मुझे शान्ति चाहिए? तो यह कौन है जो कहता है कि मुझे शान्ति चाहिए? शरीर शान्ति नही चाहता। शरीर की शान्ति तो मृत्यु है। आत्मा कहती है कि मुझे शान्ति चाहिए। उन्होने बतलाया कि आत्मा एक चैतन्य शक्ति है। शक्ति को स्थूल नेत्रों से देखा नही जा सकता लेकिन मन और बुद्घि से उसका अनुभव किया जाता है। जैसे बिजली एक शक्ति है। वह दिखाई नही देती किन्तु बल्ब जल रहा है और पंखा चल रहा है तो हम कहेंगे किबिजली है।
उसी प्रकार आत्मा के गुणों का अनुभव करके उसकी उपस्थिति का अहसास होता है। आत्मा का स्वरूप अतिसूक्ष्म ज्योतिबिन्दु के समान है। उसे न तो नष्टï कर सकते हैं और न ही उत्पन्न कर सकते हैं। वह अविनाशी है। आत्मा के शरीर से निकल जाने पर न तो शरीर कोई इच्छा करता हैं और न ही किसी तरह का कोई प्रयास करता है। मृत शरीर के पास ऑंख, मुख, नाक आदि सब कुछ होता है लेकिन वह न तो देख सकता है, न ही बोल अथवा सुन सकता है।