रायपुर

दुनिया की अर्थव्यवस्था बिगाड़ता ईरान-अमेरिका युद्धः डॉ मल्लिका सूर

रायपुर। डॉ राधाबाई शासकीय नवीन कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय रायपुर छत्तीसगढ़ में प्राचार्य डॉ विनोद कुमार जोशी के मार्गदर्शन एवं विभागाध्यक्ष डॉ मनीषा शर्मा के संयोजन में राजनीति विज्ञान परिषद द्वारा ईरान-अमेरिका युद्ध के वैश्विक प्रभाव पर व्याख्यान आयोजित किया गया। जिसके मुख्य वक्ता डॉ मल्लिका सूर वरिष्ठ प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष राजनीति विज्ञान विभाग शासकीय हीरालाल काव्योपाध्याय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अभनपुर जिला रायपुर रही।

डॉ मल्लिका सूर  ने अपने उद्बोधन में कहा कि ईरान-अमेरिका युद्ध का दुनिया पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है,जिसमें तेल की कीमतों में वृद्धि (पेट्रोल/डीजल), एलपीजी की किल्लत और खाद्य पदार्थों की महंगाई शामिल है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है।इसके अलावा,यह संघर्ष वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को तोड़कर भारत की आर्थिक विकास दर और व्यापार घाटे को प्रभावित कर रहा है।ईंधन और रसद महंगा होने के कारण भारत में परिवहन और वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं,जिससे आम लोगों पर बोझ बढ़ गया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति बाधित होने के कारण भारत के लिए कच्चे तेल का आयात चुनौतीपूर्ण हो गया है। एलपीजी की भारी किल्लत से घरों में खाना पकाने में दिक्कतें आ रही हैं।यदि युद्ध लंबा चलता है,तो राजकोषीय घाटा बढ़ सकता है और जीडीपी विकास दर धीमी हो सकती है।जहाजों के बीमा और भाड़े की लागत बढ़ने से भारतीय निर्यात कम प्रतिस्पर्धी हो गया है।ईरान में भारत के चाबहार बंदरगाह निवेश पर खतरा मंडरा रहा है, और इस क्षेत्र में अस्थिरता के कारण चीन का दबदबा बढ़ सकता है। खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीय कामगारों की सुरक्षा और स्वदेश वापसी की चिंता भी बढ़ गई है।

भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बने रहने के बावजूद,यह संघर्ष वैश्विक झटकों के कारण सप्लाई में बड़ी रुकावटें पैदा कर रहा है।अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के प्रमुख कारणों में ईरान का परमाणु कार्यक्रम,मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान समर्थित गुटों के हमले, बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता, और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल आपूर्ति को बाधित करने की कोशिश शामिल है।2015 के परमाणु समझौते के टूटने के बाद तनाव चरम पर पहुंच गया,और 2026 में ईरान द्वारा नाकाबंदी के बाद युद्ध जैसी स्थिति बनी।

अमेरिका का मानना है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित कर रहा है, जो क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा है। ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों को रोकना और नाकाबंदी करना, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है। ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को अमेरिका अपनी सुरक्षा के लिए सीधा खतरा मानता है। 1979 की ईरानी क्रांति और उसके बाद बंधक संकट के बाद से दोनों देशों के बीच अविश्वास की गहरी खाई है।कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ भूपेंद्र कुमार साहू ने किया तथा डॉ कंचन गिलहरे ने धन्यवाद ज्ञापित किया।इस अवसर पर राजनीति विज्ञान विभाग की छात्राओं उपस्थित रही।