कथासरित्सागर... 70 मिनट की प्रस्तुति में नजर आई 11वीं सदी
रायपुर। इस संसार में कुछ नियत है तो वो है मात्र परिवर्तन... और हर परिवर्तन के पीछे कह कहानी छुपी होती है। महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में मंचित नाटक कथा में 11वीं शताब्दी के महाकवि सोमदेव की कालजयी रचना कथासरित्सागर पर आधारित इन नाटक का प्रारंभ देवादिदेव महादेव द्वारा माता पार्वती को कथा सुनाने से शुरू होती है। जिसमें सात कथाएं हैं इन सात कथा की हर कथा के भीतर 100 कथाएं। उन्हीं में एक कथा मगध के राजा नंद की थी। नाट्य संस्था रंगभूमि की इस प्रस्तुति का निर्देशन किशोर वैभव ने किया।
नाटक के प्रारंभ में महादेव माता पार्वती को ऐसी कथा सुनाने है, जिसे आज तक किसी ने नहीं सुनी थी। लेकिन गण पुष्पदंत माल्यवान की मदद से शुक का रुप धारण कर कथा सुन लेता है। इतनी ही नहीं पुष्पदंत ने यह कथा अपनी पत्नी को भी सुना दी। एक दिन माता पार्वती पुष्पदंत की पत्नी को एक कथा सुनाना शुरू करती है, तभी पुष्पदंत की पत्नी जया बताती है उसे यह कथा पहले से पता है। इस बात से माता पार्वती क्रोधित होती है जया से पुछती है कि तुमने यह कथा किससे सुनी और फिर वह महादेव का आह्वान करती है और पुष्पदंत और माल्यवान को धरती पर जन्म देने का श्राप देती है। यहां से कथा नई दिशा में बढ़ जाती है।
इन्होंने निभाई भूमिका
नाटक में सूत्रधार और पुष्पदंत की भूमिका हेमंत यादव, शिव की भूमिका निलेश पटेल, माता पार्वती की भूमिका अक्षदा मातुरकर, माल्यवान एवं सोमदत्त की भूमिका में आदित्य अखंड नजर आए। वहीं राजा नंद की भूमिका के साथ आदित्य दास ने न्याय किया। रानी की भूमिका आस्था जांगड़े, वररूचि की भूमिका विजय शर्मा ने निभाई। संगीत चैतन्य मोड़क, प्रकाश संयोजन लोकेश साहू तथा अभिकल्पना और निर्देश किशोर वैभव का रहा। पूरे आयोजन में विशेष सहयोग और मार्गदर्शन आचार्य रंजन मोड़क ने दिया।