सुहागिनों ने सिंदूर खेलकर माँ दुर्गा को दी विदाई
इस परंपरा में मां दुर्गा को बेटी के रूप में देखा जाता है। मां दुर्गा जब मायके से विदा होकर ससुराल जाती है तो उनकी मांग सिंदुर से सजाई जाती है। इसके बाद सुहागिन स्त्रियां एक-दूसरे को सिंदुर लगाकर शुभकामनाएं देती हैं। मान्यता है कि सुहागिनों को सौभाग्यवती होने का वरदान प्राप्त होता है। मंदिर परिसर में बंगाली समाज के साथ ही अन्य समाज की महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में माँ दुर्गा को सिंदूर लगाकर पूजा-अर्चना की एवं एक-दूसरे को भी सिंदूर लगाया। महिलाओं ने पांरपरिक नृत्य और गीत गाकर माँ दुर्गा को विदाई दी। सिंदूर खेला को देवी सिंदूर वरन के नाम से भी जाना जाता है।