रायपुर

EXCLUSIVE : राजधानी का ऐसा स्कूल... जहां नो डोनेशन, नो यूनिफॉर्म, नो बुक्स... शिक्षा के साथ संस्कार मुफ्त

HIGHLIGHTS : 

ऐसा स्कूल जहां अभिभावक ही हैं शिक्षक
एवी किड्स में बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार 
एडमिशन के नाम पर न कोई डोनेशन और न किताबों के लिए शुल्क
अभिभावक ही तय करते हैं व्यवस्था संबंधी मासिक शुल्क

रायपुर। चेतना विकास मूल्य शिक्षा पर आधारित एवी किड्स मोहल्ला स्कूल का शुभारंभ डीडीनगर सेंचुरी कालोनी में किया गया है। इस विद्यालय की खास बात है कि यहां अभिभावक ही शिक्षक हैं। इस स्कूल को खोलने का उद्देश्य शिक्षा को व्यवसाय से मुक्त करना है। साथ ही यहां अध्यापक न तो वेतन लेते हैं और न ही बच्चों से किसी तरह का डोनेशन लिया जाता है। व्यवस्था संबंधी कार्यों के लिए न्यूनतम मासिक शुल्क लिया जाता है, जिसका निर्धारण अभिभावक करते हैं। 

चेतना विकास मूल्य शिक्षा संस्कार समिति ने अभिभावक विद्यालय के मोहल्ला स्कूल के रूप में इसे खोला है। यह मध्यस्थ दर्शन पर आधारित है, जिसमें मानव में मानवीय गुणों के विकास को महत्व दिया जाता है। यह मानवीय शिक्षा शोध केंद्र अभ्युदय संस्थान अछोटी (धमधा) के निर्देशन में संचालित है। समिति की संचालक श्रीमती अनिता शाह ने बताया कि हर बच्चा जन्म से जिज्ञासु, न्याय का याचक और सत्यवक्ता होता है, वह सही-कार्य व्यवहार करना चाहता है। इस सिद्धांत पर माता-पिता और अध्यापक को आचरण करना चाहिए। केवल पढ़ने-लिखने को शिक्षा मान लेना शिक्षा का अवमूल्यन है। 
 
 

शिक्षा का सही अर्थ है समझना। समझना ही शिक्षा संस्कार है। उन्होंने कहा कि 3 वर्ष के बच्चे जब स्कूल आते हैं तो उनके भीतर भाषा कम, भाव अधिक होते हैं। इस उम्र में उसके सबसे करीब मां होती है। इसलिए पहले पांच साल बच्चों को मां के बारे में पढ़ाया जाता है। बच्चों को मां-पिता, मानव संबंध, संबोधन और प्रकृति के बारे में नए गीतों के माध्यम से सिखाया जाता है। आ से आदर, म से ममता और उ से उपकार जैसे शब्दों का अर्थबोध कराया जाता है।
 

उन्होंने बताया कि कपड़े शरीर की सुरक्षा के लिए पहना जाता है, इसलिए एवी किड्स में बच्चों के लिए कोई यूनिफार्म (गणवेश) निर्धारित नहीं किया गया है, ताकि बच्चे कपड़े पहनने का अर्थ समझें। पालकों पर किताबों को बोझ नहीं डाला जाता, विद्यालय में किताबें निःशुल्क प्रदान की जाती है। यह एक अभिनव प्रयोग है, जिसे मोहल्ला स्कूल के रूप में प्रारंभ किया गया है। इस स्कूल के संचालन के लिए चंद्रशेखर राठौर परिवार ने अपना भवन निःशुल्क प्रदान किया है।