छत्तीसगढ़ का पहला पर्व 'हरेली'... मनेगा सावन के दूसरे सोमवार के साथ... ऐसे मनाए जाने की है परंपरा
2023-07-16 03:59 PM
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रायपुर। छत्तीसगढ़ का पहला तिहार हरेली है। हरेली के बाद से ही बाकी त्योहारों की शुरुआत होती है। इसे हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। हरेली का मतलब हरियाली होता है। छत्तीसगढ़ वासी इस दिन पूरे विश्व में हरियाली छाई रहे और हमेशा सुख शांति बनी रहे, इस कामना के साथ हरेली त्यौहार मनाते है। पूरे छत्तीसगढ़ में यह त्योहार (17 जुलाई) सोमवार को मनाया जाएगा।
इस त्योहार के पहले किसान अपने अपने खेतों की बोआई रोपाई का काम पूरा कर लेते हैं। इसके बाद हरेली तिहार के दिन सभी कृषि उपकरणों, बैलों, हल और औजारों को साफ करके उसकी पूजा करते हैं।
दरसअल, हरेली छत्तीसगढ़ के लिए बहुत ही खास है और हमारे अन्नदाताओं के असीम मेहनत का सम्मान है। ग्रामीण इस पर्व को बड़े ही उत्साह के साथ मानते है। भगवान को खुश करने छत्तीसगढ़िया व्यंजन बना कर भोग लगाया जाता हैं। वहीं, इस मौसम में फैलने वाले बैक्टीरीया-वायरस और मौसमी कीड़े मकोड़े से बचने घरों के दरवाजे पर नीम की पत्तीयां लगाई जाती हैं, जो हवा को शुद्ध करती है।
गांव में पौनी-पसारी जैसे राऊत व बैगा हर घर के दरवाजे पर नीम की डाली खोंचते हैं। गांव में लोहार अनिष्ट की आशंका को दूर करने के लिए चौखट में कील लगाते हैं। यह परम्परा आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यमान है।