रायपुर

अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर... जूझ रहे प्रदेश के अतिथि व्याख्याता... इनके बूते ही चल रहे प्रदेश के कॉलेज

रायपुर। छत्तीसगढ़ के महाविद्यालयों में उच्च शिक्षा के छात्र—छात्राओं को सही दिशा और मार्गदर्शन देने वाले अतिथि व्याख्याताओं की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर ध्यान आकर्षित कर चुके इन अतिथि व्याख्याताओं को अपने भविष्य की चिंता सता रही है, लेकिन आशा की कोई भी किरण नजर नहीं आ रही है। 

छत्तीसगढ़ के ज्यादातर महाविद्यालयों में नियमित सहायक प्राध्यापक व प्राध्यापकों के मुकाबले रिक्तियां कहीं ज्यादा है। वहीं नियमित पोस्ट पर तैनात ज्यादातर लोग अपने भविष्य को लेकर आश्वस्त हैं, इस वजह से उन्हें युवा छात्र—छात्राओं के भविष्य से ज्यादा सरोकार नहीं है। ऐसे में अतिथि व्याख्याता ही हैं, जो पूरी शिद्दत के साथ इन छात्र—छात्राओं को संबंधित विषयों के ज्ञान के अलावा आवश्यक मार्गदर्शन भी देते हैं। 

अतिथि व्याख्याता संघ के पदाधिकारियों ने अपनी मांगों को लेकर बताया कि उन्होंने शासन के समक्ष केवल तीन सूत्रीय मांगों को रखा है। इनमें पूर्णकालिक व्यवस्था के साथ एकमुश्‍त वेतन प्रदान करने की बात रखी गई है। पदाधिकारियों का कहना है कि माह में जितने दिन कॉलेज लगता है, उन्हें केवल उतनी ही राशि का भुगतान किया जाता है, वहीं पूरे साल उनके पास रोजगार की व्यवस्था नहीं रहती। ऐसे में परिवार चलाना उनके लिए कठिन हो गया है, जबकि वे अपनी जिम्मेदारियों को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं करते हैं।
 
दूसरी मांग, जिसके संदर्भ में निवेदन किया गया कि नियमित सहायक प्राध्‍यापक अथवा प्राध्‍यापक की नियुक्ति होने पर उनकी सेवा समाप्‍त ना की जाए। यानी उनकी सेवा सुरक्षित रहे। तीसरी मांग, जिन अतिथि व्‍याख्‍याताओं को नियमित नियुक्तियों की वजह से हटाया गया है, उन्‍हें वापस सेवा में रखा जाए। 
 
अतिथि व्याख्याताओं ने अब भी आस नहीं छोड़ी है, उनका कहना है कि सरकार ने जब शासकीय कर्मचारियों और अतिथि शिक्षकों की जरुरतों को समझा है, तो उनकी भी मांग पर जल्द ही जरुर उचित निर्णय लेगी।