कसाब को फांसी तक पहुंचाने वाली... एकमात्र चमश्दीद गवाह... देविका का रायपुर में हुआ सम्मान
2023-08-21 05:54 PM
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रायपुर। देश के इतिहास में 26/11 के उस काले दिन को कभी नहीं भुलाया जा सकता, जब मुंबई में आतंकियों ने हमला किया था। एक ऐसा हमला, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। चारों तरफ चित्कार मची थी और आतंकी निर्दयता के साथ गोलियों की बौछार कर लाशों की ढेर बिछा रहे थे। उस हमले की शिकार महज 9 साल 10 महीने के देविका रोटावन भी हुई थी, जिसके पैरों में आतंकी कसाब ने गोली मार दी थी।
रायपुर में रविवार को आयोजित एक सम्मान समारोह में आमंत्रित मुंबई हमला 26/11 की प्रत्यक्षदर्शी देविका रोटावन को भी उसके साहस के लिए सम्मानित किया गया। देविका को छत्रपति शिवाजी टर्मिनल पर आतंकी कसाब ने दाहिने पैर में गोली मारी थी, लेकिन बेहोश होने से पहले उसने उसका चेहरा देख लिया था, बाद में उसी की गवाही ने कसाब को फांसी की सजा दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
वह 26 नवंबर 2008 का दिन था, जब 10 आतंकियों ने 3 दिनों तक मुंबई को बंदूक की नोक में रखा था। अंधाधूंध फायरिंग करते हुए 164 देशी-विदेशी नागरिक और 8 पुलिसकर्मी शहीद को अपना निशाना बनाया था। जिसमें से एक आतंकी अजमल कसाब को पुलिस ने जिंदा पकड़ा लिया था। उस वक्त 9 साल की देविका रोटावन को भी गोली लगी थी, वो कसाब को पहचानने वाली सबसे छोटी गवाह थी।
कोर्ट रूम में जब उस आतंकी कसाब को पहचानने के लिए देविका को बुलाया गया, तो वह बैसाखी के सहारे पहुंची थी। देविका ने कसाब को देखते ही पहचान लिया। इससे पहले देविका ने बताया कि उसके परिजनों को धमकियां मिली, रिश्तेदारों ने खौफ के चलते दूरियां बना ली। करोड़ों रुपए का ऑफर भी मिला, ताकि गवाही ना दे। देविका ने बताया कि इन सबके बावजूद उसने और उसके पिता ने ठान लिया था, चाहे कुछ भी हो देश के दुश्मनों को सजा दिलाना ही उनकी सबसे बड़ी जीत होगी।