रायपुर। आज के दौर में खेल का जीवन में काफी ज्यादा महत्व है। विभिन्न खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुलिस और प्रशासन सहित दूसरे विभागों में नौकरी के लिए प्राथमिकता दी जाती है। छत्तीसगढ़ में भी खेल जगत से जुड़े लोगों को प्राथमिकता के आधार पर नौकरी दी गई है। पर यहां पर सवाल है कि क्या छत्तीसगढ़िया ओलंपिक में हिस्सा लिए और जीतने वालों को नौकरी के लिए आरक्षण मिल पाएगा? आज बजट सत्र के तीसरे दिन विपक्ष ने सदन के भीतर इस सवाल को उठाया, जिस पर तीखी नोकझोंक भी हुई।
विपक्षी सदस्य अजय चंद्राकर ने छत्तीसगढ़िया ओलंपिक से जुड़े सवाल किए, जिसमें उन्होंने पूछा कि खिलाड़ियों के चयन, आयोजन के स्तर और खिलाड़ियों के लिए नौकरी का क्या प्रावधान है..? इस पर जवाब देते हुए खेल मंत्री उमेश पटेल ने जवाब दिया कि ग्राम पंचायत से राज्य स्तर तक की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया है। जिसमें ग्रामीण क्षेत्र से 11.37 लाख महिलाओं ने भाग लिया तो, 13.86 लाख पुरुषों ने हिस्सा लिया। इसी तरह शहरी क्षेत्रों में 62 हजार महिलाओं और 86 हजार से ज्यादा पुरुषों ने हिस्सा लिया। इस तरह 36.55 लाख से ज्यादा प्रतिभागी शामिल हुए।
पूरक प्रश्न में मान्यता का सवाल उठा, जिस पर सरकार का कहना है कि ओलंपिक संघ से मान्यता देने का अधिकार राष्ट्रीय ओलंपिक संघ को है। इस संबंध में केंद्रीय मंत्री को पत्र लिखा गया है। सवाल-जवाब के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोंकझोंक हुई। अमरजीत भगत ने कहा कि जब भी छत्तीसगढ़िया की बात आती है तो आपत्ति क्यों करते हैं। कवासी लखमा ने कहा छत्तीसगढ़ का विरोध क्यों?
इस पर नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने कहा कि यह घोर आपत्तिजनक है। शिवरतन शर्मा ने कहा कि मंत्री के जवाब में विरोधाभास है। बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि हमारी खेल नीति में उत्कृष्ट खिलाड़ियों को नौकरी देने का प्रावधान है। छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी दर दर भटक रहे हैं। अंत में खेल मंत्री पटेन ने कहा कि छत्तीसगढ़िया ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले विजेता खिलाड़ियों को नौकरी में आरक्षण देने का प्रावधान नहीं है।