रायपुर

‘कलंकार’ में दिखा कलाकार का दर्द... प्रस्तुति ने दर्शकों कों किया भाव विभोर

रायपुर। कलामंच पर एक पुरुष का महिला का अभिनय करना कहीं न कहीं समाज में चर्चा का विषय बन जाता है। ऐसे में उस कलाकार को समाज से अपने सम्मान को बचाने खूब संघर्ष करना पड़ता है। महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में 18 मई को हुए कलंकार नाट्य में एक कलाकार के इसी संघर्ष को दिखाया गया। कैसे एक युवा कलाकार मंच पर महिला पात्र का अभिनय करता है और उसे समाज की कुरितियों और सोच के बीच अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

नरेंद्र जलशक्षत्रिय द्वारा लिखित कलंकार नाटक के मंचन ने दर्शकों की जहां खूब तालियां बटोरीं, वहीं सबी भाव विभोर भी कर दिया। कलंकार की मूख्य भूमिका में नाटक के लेखक नरेंद्र जलक्षत्रिय ने बखूबी अपनी कला का परिचय मंच पर दिया। नाटक का निर्देश अर्जन दास मानिकपुरी ने किया। यह नाटक लोक कलाकार के जीवन की आत्मकथा पर आधारित रहा। इसके पूर्व अंशु प्रजापति द्वारा निर्देशित लेखक विष्णु प्रभार की नाटक बहादुर बेटी का मंचन किया गया। जिसमें एक पिता और चाचा अपनी बेटी को देश सेवा के लिए प्रेरित करते नजर आए। इसके उपरांत लेखक प्रमोद यादव द्वारा लिखित अपने हिस्से का स्वर्गव्यांगात्मक नाटक का मंचन हुआ। जिसका निर्देशन आर्यन सारस्वत ने किया है।

कार्यक्रम के संयोजक योगेश अग्रवाल ने बताया कार्यक्रम के तीसरे और अंतिम दिन रविवार 19 मई को शाम 6.30 बजे भारतेंद्रु हरिशचंद्र द्वारा लिखित अंधेर नगर चौपट राजा का मंचन होगा। जिसका निर्देशन अर्पिता बेडेकर ने किया है। यह नाटक सर्वाधिक लोकप्रिय नाटक है। अंत में कन्नड़ लेखक सत्यनारायण राऊ द्वारा लिखित नाटक मैं अहिल्या बोल रही हूंका मंचन होगा। जिसका हिन्दी रूपांतरण विद्या राव ने किया है। इस नाटक का निर्देशन त्रिलोचन सोना ने किया है। यह आयोजन 31 मई 2024 से त्रिशताब्दी वर्षारंभ पर विशेष होगा।