रायपुर

बच्चों ने किया ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ को जीवंत.... अहिल्या बाई की दूरदर्शिता मंच पर आई नजर

रायपुर। बचपन में हम सभी ने ‘अंधेर नगरी चौपट राजा‘ की कहानी भी पढ़ी सुनी और स्कूलों के ऐन्यूअल फंक्शन में देखी भी। यह एक ऐसी कहानी है जिसे जितनी बार देखा या सुना जाए हर बार इसे सुनने और देखने में आनंद ही आता है। आजकल की जनरेशन इस कहानी को अपनी पुस्तकों में नहीं पढ़ती। लेकिन सालों बाद आज 19 मई, रविवार को महाराष्ट्र मंडळ के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में ‘अंधेर नगरी चौपट राजा‘ का मंचन देखने को मिला। छोटे-छोटे बच्चों ने इसका अद्भुत मंचन किया। कार्यक्रम में पहुंचे सभी दर्शकों और आयोजकों ने इसे देखकर खूब तालियां बजाई। मौका था संस्कार भारती द्वारा आयोजित ‘रंग संस्कार महोत्सव’ की तीसरे और अंतिम दिन का। 

कार्यक्रम के संयोजक योगेश अग्रवाल ने बताया कि ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ का निर्देशन अर्पिता बेडेकर ने किया है। इस नाटक में विवेकहीन और निरंकुश शासन व्यवस्था पर करारा व्यंग्य है। जिसे अपने ही कर्मों द्वारा नष्ट होते दिखाया गया। जिस राज्य में न्याय और अन्याय में फर्क नहीं होता उस राज्य की दुर्दशा का सुंदर चित्रण किया गया। इस नाटक में ख्याति यादव, वंदना यादव आध्या सिंह, अनन्या यादव, दीप्ती ठाकुर, दीक्षा ठाकुर, केयूर बेडेकर, हिमांश डुकरे,  राजरानी सिंह, विराट सिंह, जोएल सजी मेथयू, शिवांश सिंह, हितेश पांडेय, प्रतीक क्षत्रिय, तोमेश क्षत्रिय, और वंश राज नारा ने भूमिका निभाई। 

वहीं अंत में अंत में कन्नड़ लेखक सत्यनारायण राऊ द्वारा लिखित नाटक ‘मैं अहिल्या बोल रही हूं’ का मंचन हुआ। जिसका हिन्दी रूपांतरण विद्या राव ने किया है। इस नाटक का निर्देशन त्रिलोचन सोना ने किया है। यह आयोजन 31 मई 2024 से त्रिशताब्दी वर्षारंभ पर विशेष रहा। राष्ट्रमाता अहिल्याबाई होलकर महिला सशक्तीकरण के मामले में क्रांतिकारी सुलेख की तरह हैं। दुर्भाग्य से अस्मिता और सामाजिक न्याय के स्वाधीनोत्तर सरोकारों और व्याख्याओं के बीच अतीत की प्रेरणा को ज़्यादा अहमियत नहीं दी गई। यह निर्भीक मराठा रानी एक सच्ची दूरदर्शी थी जिन्होंने पक्षपात और महिलाओं के प्रति देश के सामाजिक मानदंडों को परिभाषित किया।। नाटक में संगीत शान्तनु भट्टाचार्य ने दिया और प्रकाश कल्पना पीएस मलतियार के किया।