आरएसएस के प्रथम शिक्षा वर्ग में प्रतिदिन 600 घरों से आ रही 10-10 रोटियां
2024-05-26 01:44 PM
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रायपुर। समर्पण और देश प्रेम की भावना अगर देखनी हो, तो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रथम वर्ग में जरूर जाना चाहिए। पूरे देश में लगने वाली आरएसएस की शाखाओं और संघ शिक्षा वर्ग में यह भावना देखने को मिल जाएगी।
आरएसएस के गर्मियों में प्रतिवर्ष लगाए जाने वाले प्रशिक्षण वर्गों की श्रृंखला में इस वर्ष छत्तीसगढ़ प्रांत के रायपुर महानगर में 19 मई से संघ शिक्षा वर्ग लगाया गया है। वर्ग का समापन 2 जून को आउटडोर स्टेडियम में होगा।
संघ शिक्षा वर्ग में 15 दिनों के लिए कठोर शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रातः 4:00 बजे से लेकर रात्रि 10:00 बजे तक निर्धारित दिनचर्या का पालन करते हुए स्वयंसेवक समय पालन, अनुशासन व समाज के प्रति अपनत्वभाव को आचरण में उतारता है। डूंडा में चल रहे 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग में करीब 590 कार्यकर्ता शारीरिक और बौद्धिक प्रशिक्षण ले रहे हैं। इन कार्यकर्ताओं के लिए प्रतिदिन करीब 600 घरों से रोटियां आतीं हैं। हर एक घर से दोनों टाइम 10-10 रोटियां भेजी जा रही हैं। सेवा और सहयोग की झलक यहां भी नजर आती है।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के छत्तीसगढ़ प्रांत संघचालक डॉ. टोपलाल वर्मा ने कहा कि संघ संपूर्ण हिंदू समाज का संगठन है। ऐसा भाव जागृत करने का कार्य हमें करना है। केवल विचार में ही नहीं, व्यवहार में भी यह प्रकट होना चाहिए। शाखा कार्य यानी देश के लिए अच्छे व्यक्ति तैयार करना जिसे हम व्यक्ति निर्माण कहते है। हमें "हम", "मैं' और "मेरा" से ऊपर उठकर प्रत्येक गांव में शाखा और मिलन प्रारंभ करना है।