गेंदे की खुशबू से महक उठा गोठान, कम मेहनत में अधिक मुनाफा कमा रही यहां की महिलाएं
2023-03-11 04:11 PM
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रायपुर। प्रदेश के गोठानों में नित नवीन प्रयोग महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहे है। बस्तर संभाग के कांकेर जिले के एक गोठान में वहां की महिलाओं ने गेंदे के पौधे लगाए। करीब चार डिसमिल जमीन में लगाए गए पौधों में अब फूल आ गए है। पूरा गोठान गेंदे के फूल के कारण पीला-पीला नजर आता है। य़हां की महिलाएं कम मेहनत में अधिक मुनाफा ले रही है।

कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत तुड़गे के गोठान में शीतला स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा गेंदा फूल की खेती की जा रही हैं। गेंदा फूल के महक से गौठान के साथ समूह की महिलाओं की जिंदगी भी महकने लगी है। गोठान में गेंदा फूल की खेती से उनके चेहरे की खुशी बढ़ रही है।
तुड़गे गोठान की महिला समूह की सक्रिय सदस्य सुलोचना रावटे, शांति नेताम, मालती नरेटी, मंगतीन नेताम, बृजबत्ती, गिरजा बाई और विमला ने बताया कि हमारे समूह की सदस्यों द्वारा गोठान में वर्मी खाद उत्पादन के अलावा कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन एवं सहयोग से 4 डिसमिल भूमि में पहली बार गेंदे का पूल लगाया गया। समूह की महिलाओं ने बताया 100 रुपए प्रति किलो की दर से अब तक 150 किलोग्राम फूल 15 हजार रुपए में बेच चुकी हैं।
समूह की महिलाओं का कहना है कि अभी टेनिस बाल गेंदा फूल के किस्म से तीन सौ किलोग्राम से अधिक फूल का उत्पादन होने की संभावना है, जिससे समूह को अच्छी आमदनी मिलेगी। फूलों की खेती में खास बात यह है कि इसे कम पानी, कम लागत और कम मेहनत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है, गेंदा फूल की मांग बारहमासी रहती है।

कृषि विभाग द्वारा बताया गया कि टेनिस बाल गेंदा फूल पौधे की हाइट 3 से 4 फुट की होती है। तीन माह में फूल आना शुरू हो जाता है और पैदावार भी अधिक होती है। गेंदा फूल की खेती में अधिक मुनाफा है, इसकी डिमांड भी अच्छी है। तुड़गे गौठान की महिला समूह वर्मी-कम्पोस्ट खाद उत्पादन के कार्य में जुड़ी हैं, महिलाओं द्वारा नवाचार के रूप में गेंदा फूल की खेती करने में अच्छी रूचि ले रही है तथा इस कार्य से मिल रहे लाभ से महिलाएं काफी खुश है।