छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से जोरा नाला कंट्रोल स्ट्रक्चर से इंद्रावती नदी में जल प्रवाह सुनिश्चित
रायपुर | मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर जोरा नाला कंट्रोल स्ट्रक्चर में जल प्रवाह को नियंत्रित कर इंद्रावती नदी की मुख्य धारा में पानी छोड़ा गया है। ओडिशा सरकार की सहमति के बाद स्ट्रक्चर में रेत की बोरियां डालकर पानी का प्रवाह सुनिश्चित किया गया, जिससे इंद्रावती नदी में जल स्तर में वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री साय के निर्देश पर जल संसाधन मंत्री केदार कश्यप ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से इंद्रावती नदी के जल संकट के समाधान हेतु चर्चा की। इस पर केंद्रीय मंत्री ने छत्तीसगढ़ एवं ओडिशा के मुख्यमंत्रियों को समस्या के निराकरण हेतु आवश्यक निर्देश दिए। जिसके परिणामस्वरूप उड़ीसा राज्य की सहमति से जोरा नाला कंट्रोल स्ट्रक्चर को अस्थायी रूप से एक फीट ऊंचा किया गया, जिससे इंद्रावती नदी के जल प्रवाह में सुधार हुआ।

इसके अतिरिक्त, इंद्रावती नदी के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम में जमा रेत को हटाने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है, जिसे अप्रैल के पहले सप्ताह तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस संबंध में कलेक्टर हरिस एस के मार्गदर्शन में अपर कलेक्टर सी.पी. बघेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेश्वर नाग और जल संसाधन विभाग के ईई वेद पांडेय ने स्थानीय किसानों को जिला कार्यालय के प्रेरणा सभा कक्ष में पूरी जानकारी दी।
इंद्रावती नदी का उद्गम ओडिशा राज्य के कालाहांडी जिले के रामपुर धुमाल गांव से हुआ है। यह नदी 534 किलोमीटर की यात्रा के बाद गोदावरी नदी में मिलती है। नदी का कैचमेंट एरिया 41,665 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें ओडिशा में 7,435 वर्ग किमी, छत्तीसगढ़ में 33,735 वर्ग किमी और महाराष्ट्र में 495 वर्ग किमी शामिल हैं।
ओडिशा राज्य की सीमा पर ग्राम सूतपदर में इंद्रावती नदी दो भागों में बंट जाती है। एक भाग इंद्रावती नदी के रूप में 5 किमी बहकर ग्राम भेजापदर के पास छत्तीसगढ़ में प्रवेश करता है, जबकि दूसरा भाग जोरा नाला के रूप में 12 किमी बहते हुए शबरी (कोलाब) नदी में मिल जाता है। पहले जोरा नाला का पानी इंद्रावती में आता था, लेकिन धीरे-धीरे इसका बहाव बढ़ने से इंद्रावती का जल प्रवाह कम हो गया।
समस्या गंभीर होने पर दिसंबर 2003 में ओडिशा और छत्तीसगढ़ के प्रमुख अभियंताओं की बैठक में जोरा नाला के मुहाने पर जल विभाजन के लिए कंट्रोल स्ट्रक्चर बनाने का निर्णय लिया गया। यह स्ट्रक्चर ओडिशा सरकार द्वारा बनाया गया, जिसकी डिज़ाइन केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने तैयार की। निर्माण के बाद भी जोरा नाला में अधिक पानी जाने से छत्तीसगढ़ को ग्रीष्म ऋतु में औसतन 40.71% और ओडिशा को 59.29% जल प्रवाह मिला।
इंद्रावती नदी में न्यूनतम जल प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने कई प्रयास किए। 6 जनवरी 2021 को ओडिशा और छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण किया। इस निरीक्षण में कंट्रोल स्ट्रक्चर के अपस्ट्रीम में जलभराव रोकने के लिए रेत और बोल्डर हटाने तथा जोरा नाला के घुमाव को सीधा करने का अनुरोध किया गया।
वर्ष 2018 के बाद इंद्रावती नदी में सतत जल प्रवाह कम होने की समस्या बनी हुई थी। अब राज्य सरकार के प्रयासों से ओडिशा सरकार का सहयोग प्राप्त हुआ है, जिससे नदी के जल प्रवाह को संतुलित करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इससे इंद्रावती नदी में जल प्रवाह बढ़ेगा और किसानों को सिंचाई के लिए पानी की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
बीजापुर में नक्सली दंपती सहित 17 ने किया सरेंडर, 9 पर है लाखों का इनाम
रायपुर। प्रदेश के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में एक नक्सली दंपती सहित कुल 17 माओवादियों ने सरेंडर कर दिया है। । सरेंडर करने वाले 17 नक्सलियों में से 9 पर इनाम घोषित है। सरेंडर नक्सलियों में गंगालूर एरिया कमेटी के सचिव दिनेश और उसकी पत्नी ज्योति शामिल है। दिनेश 8 और ज्योति 5 लाख रुपए का इनामी है।
छत्तीसगढ़ सरकार के पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में नक्सली हिंसा छोड़ रहे हैं। लगातार नक्सली सरेंडर कर रहे हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को गंगालूर एरिया कमेटी के सचिव दिनेश और उसकी पत्नी ज्योति सहित कुल 17 नक्सलियों ने सरेंडर किया। दिनेश के सरेंडर को सुरक्षाबल बड़ी सफलता मान रहे हैं। दिनेश छोटी सी उम्र में नक्सलियों साथ हो लिया था। नक्सलियों ने इसे हथियार चलाना, एंबुश लगाना, ID प्लांट करने की ट्रिक सिखाए। जब दिनेश इन सभी एक्टिविटी में माहिर हो गया तो उसे नक्सल संगठन में एरिया कमेटी मेंबर बनाया गया। गंगालूर इलाके में लगातार बड़े हमले करता गया। इलाके में लगातार दहशत बनाकर रखा था।
इसके काम को देखकर बड़े लीडर्स ने इसे गंगालूर एरिया कमेटी का सचिव और DVCM कैडर दिया। बीजापुर जिले में हुई नक्सल घटनाओं में अधिकांश का यही मास्टरमाइंड है। 100 से ज्यादा जवानों की हत्या में शामिल रहा है। दिनेश नक्सल संगठन में रहते AK-47, इंसास, SLR जैसे हथियार चलाता था। दिनेश, नक्सल संगठन के हार्डकोर नक्सली कमांडर माड़वी हिड़मा, बटालियन नंबर 1 का कमांडर देवा, दामोदर, सुजाता, विकास जैसे बड़े नक्सली कैडर्स के साथ काम कर चुका है। इसकी पत्नी ज्योति भी ACM कैडर की है। उसपर 5 लाख रुपए का इनाम घोषित है। नक्सल संगठन में रहते इन्हें एक दूजे से प्यार हुआ था। शादी की। इनका एक बच्चा भी है। अब दोनों पति-पत्नी सामाजिक जीवन जीना चाहते हैं, इसलिए हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है।
सरेंडर नक्सलियों में इन पर है इनाम
1. दिनेश ऊर्फ बदरू मोड़ियम, DVCM, 8 लाख रुपए इनामी
2. ज्योति ताती ऊर्फ कला मोड़ियम, ACM 5 लाख रुपए इनामी
3. दुला कारम, ACM, 5 लाख रुपए इनामी
4. भीमा कारम, आरपीसी मिलिशिया प्लाटून ए सेक्शन कमांडर, 1 लाख रुपए इनामी
5. शंकर लेकाम, आरपीसी जनताना सरकार अध्यक्ष, 1 लाख रुपए इनामी
6. सोमा कारम, डीएकेएमएस अध्यक्ष, 1 लाख रुपए इनामी
7. मंगू कड़ती, आरपीसी मिलिशिया प्लाटून कमांडर, 1 लाख रुपए इनामी
8. मोती कारम, आरपीसी केएएमएस अध्यक्ष, 1 लाख रुपए इनामी
9. अरविंद हेमला ऊर्फ आयतू हेमला, दक्षिण सब जोनल ब्यूरो, पार्टी सदस्य, 1 लाख रुपए इनामी
दंतेवाड़ा के जैविक कृषक अपनाएंगे एआई तकनीक
कृषि क्षेत्र में आएगा क्रांतिकारी बदलाव
रायपुर | दंतेवाड़ा जिले के जैविक किसान अब अपनी खेती में आधुनिकतम तकनीक का उपयोग कर खेती को अधिक उत्पादक और कुशल बनाएंगे। जिला पंचायत सभागार में आयोजित कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों और कृषि अधिकारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।

इस कार्यशाला में फसल निगरानी से लेकर आपदा प्रबंधन तक में एआई तकनीक के उपयोग के महत्व पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि ‘सैटेलाइट इमेजिंग’ और ‘ड्रोन एआई’ तकनीक के माध्यम से फसल की स्वास्थ्य स्थिति, मिट्टी की गुणवत्ता और पानी की आवश्यकता का सटीक विश्लेषण किया जा सकता है। दंतेवाड़ा जिले में एआई तकनीक का यह प्रयोग न केवल किसानों की आय में वृद्धि करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग में भी मील का पत्थर साबित होगा।
एआई आधारित मॉडल के माध्यम से फसलों में रोग और कीटों की पहचान कर समय पर समाधान किया जा सकेगा। एआई आधारित सिस्टम मिट्टी की नमी और मौसम की स्थिति के आधार पर स्वचालित सिंचाई को नियंत्रित करेगा, जिससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। यील्ड प्रेडिक्शन एआई मॉडल’ के माध्यम से ऐतिहासिक डेटा और मिट्टी की गुणवत्ता के आधार पर फसल उत्पादन का सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा। एआई बाजार की मांग और कीमतों का विश्लेषण कर किसानों को फसल बिक्री के लिए बेहतर मार्गदर्शन देगा। बुवाई, निराई, कटाई और छंटाई जैसे कार्यों में एआई आधारित ‘रोबोट्स’ का उपयोग श्रम लागत को कम करने में सहायक होगा।
एआई के जरिये पशुओं के स्वास्थ्य और व्यवहार की निगरानी कर बीमारियों का समय रहते पता लगाया जा सकेगा। कार्यशाला में बताया गया कि एआई तकनीक जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में भी कारगर है, जिससे बाढ़ और सूखे जैसी आपदाओं का पूर्वानुमान लगाकर किसानों को समय पर सतर्क किया जा सकता है।
इस अवसर पर जिला प्रशासन से अलका महोबिया, सूरज पंसारी (उपसंचालक, कृषि), आकाश बढ़वे (भूमगादी संचालक), मीना मंडावी (सहायक संचालक, उद्यान), केवीके के सहायक संचालक धीरज बघेल, भोले लाल पैकरा सहित 150 से अधिक ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, कृषि मित्र, जैविक कार्यकर्ता एवं प्रगतिशील कृषक उपस्थित रहे।
बस्तर की लोक संस्कृति का रंगारंग पर्व : 'बस्तर पंडुम 2025' का आगाज 12 मार्च से
रायपुर | छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी संस्कृति को जीवंत बनाए रखने के लिए ‘‘बस्तर पंडुम 2025’’ का भव्य आयोजन 12 मार्च से शुरू होगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप आयोजित इस महोत्सव में बस्तर संभाग की अनूठी लोककला, संस्कृति, रीति-रिवाज और पारंपरिक जीवनशैली को मंच मिलेगा। ‘‘बस्तर पंडुम 2025’’ का आयोजन न केवल बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का प्रयास है, बल्कि इस क्षेत्र के प्रतिभाशाली कलाकारों को मंच देने और उनकी कला को प्रोत्साहन प्रदान करने का सुनहरा अवसर भी है।

इस आयोजन में 7 प्रमुख विधाओं जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा एवं आभूषण, शिल्प-चित्रकला और जनजातीय व्यंजन-पेय पदार्थों पर आधारित प्रतियोगिताएं होंगी। ये स्पर्धाएं क्रमशः जनपद, जिला और संभाग स्तर पर आयोजित की जाएंगी। प्रतियोगिता का पहला चरण 12 से 20 मार्च तक जनपद स्तर पर होगा, दूसरा चरण 21 से 23 मार्च तक जिला स्तर पर और अंतिम चरण 1 से 3 अप्रैल तक दंतेवाड़ा में संभाग स्तरीय प्रतियोगिता के रूप में संपन्न होगा। प्रत्येक चरण के विजेताओं को पुरस्कार राशि और प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे।
‘‘बस्तर पंडुम 2025’’ में बस्तर के पारंपरिक नृत्य-गीत, रीति-रिवाज, वेशभूषा, आभूषण और व्यंजन प्रदर्शित किए जाएंगे। प्रतिभागियों को प्रदर्शन के लिए अंक निर्धारित किए गए हैं, जिसमें मौलिकता, पारंपरिकता और प्रस्तुति पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आयोजन में समाज प्रमुखों, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ नागरिकों को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाएगा। चयन समिति में प्रशासनिक अधिकारी के अलावा आदिवासी समाज के वरिष्ठ मुखिया, पुजारी और अनुभवी कलाकारों को शामिल किया गया है।
स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने और महिलाओं को सशक्त बनाने का जरिया है सरस मेला : अरुण साव
रायपुर | उप मुख्यमंत्री तथा बिलासपुर जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव ने बिलासपुर के मुंगेली नाका मैदान में संभागीय सरस मेले का उद्घाटन किया। उन्होंने मेले का उद्घाटन करते हुए कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने लगाया गया यह सरस मेला स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने और महिलाओं के साथ ही ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने का माध्यम है। स्वसहायता समूह की दीदियां आज आत्मनिर्भर हो रही हैं, अपने परिवार का आर्थिक संबल बन रही हैं। संभाग की सभी जिलों से दीदियां अपनी कला का प्रदर्शन करने आयी हैं। दूसरी महिलाओं को भी यहां आकर उनसे प्रेरणा मिलेगी और वे भी आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाएंगी। मेले में बिलासपुर संभाग की 55 स्वसहायता समूहों की महिलाओं ने 52 स्टॉलों में अपने उत्पादों की बिक्री के लिए प्रदर्शनी सजायी है। यह मेला 12 मार्च तक चलेगा।

उप मुख्यमंत्री साव ने मेले में सभी स्टॉलों का निरीक्षण किया। अपने उत्पाद लेकर पहुंची महिलाओं से चर्चा कर उनका मनोबल बढ़ाया। विधायकगण धरमलाल कौशिक, धरमजीत सिंह, दिलीप लहरिया, सुशांत शुक्ला, महापौर पूजा विधानी, जिला पंचायत के अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, कलेक्टर अवनीश शरण, एसपी रजनेश सिंह, डीफओ सत्यदेव शर्मा, नगर निगम के कमिश्नर अमित कुमार और जिला पंचायत के सीईओ संदीप अग्रवाल भी इस दौरान उनके साथ थे।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने मुख्य अतिथि की आसंदी से सरस मेले को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए अनेक योजनाएं चलायी जा रही हैं। महतारी वंदन योजना, उज्जवला योजना, लखपति दीदी जैसी बहुत सी योजनाएं महिलाओं की बेहतरी के लिए चलायी जा रही हैं। इन योजनाओं के चलते महिलाएं आज मजबूत हुई हैं। वे परिवार और समाज के विकास में अपना अमूल्य योगदान दे रही हैं। आज गांव-गांव में समूह की दीदियां लखपति बन गयी हैं। यहां सरस मेले में वे बिजौरी से लेकर गुलाल और अपने तमाम उत्पादों की बिक्री के लिए आयी हैं। उनका आत्मविश्वास देखते बनता है।
साव ने कहा कि जब तक महिलाएं सशक्त और आत्मनिर्भर नहीं बनेंगी, तब तक हमारा समाज भी सशक्त नहीं बनेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा है कि सभी दीदियां लखपति दीदी बनें, आत्मनिर्भर बनें, विकसित और समृद्व भारत बनाने में अपना योगदान दें।
नक्सल प्रभावित गांव की महिलायें : हर्बल गुलाल बनाकर कमा रही हजारों रूपए
नक्सल प्रभावित गांव की महिलाओं ने नक्सलियो के डर से छोड़ा गांव, पांच सालों से होली के मौके पर गुलाब बनाकर कमा रही हजारों रूपए
रायपुर | बीजापुर जिले के नक्सल प्रभावित पंचायत भैरमगढ़ के शिविर में रहने वाली कई महिलाओं की जिंदगी को जहां नक्सलियों ने बेरंग कर दिया था। अपनी जान बचाने के लिए इन महिलाओं ने अपना गांव छोड़ दिया और अब हर्बल गुलाल बनाकर लोगों की जिंदगी में रंग घोल रही हैं। यह काम ये महिलाएं पिछले पांच सालों से बिना किसी परेशानी के कर रही हैं और आने वाले सालों में इसे करने की बात कह रही हैं।

बीजापुर जिले के भैरमगढ़़ में बिहान कार्यक्रम के अंतर्गत माँ दुर्गा महिला स्व सहायता समूह की महिलएं पिछले पांच सालों से हर्बल गुलाल बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। इस बार बीजापुर के लोग इनके बनाए हर्बल रंगों और गुलाल से होली खेलेंगे। इन महिलाओं के बनाए हर्बल गुलाल की डिमांड भी काफी अधिक है। कई लोग इनको गुलाल का ऑर्डर भी दे रहे हैं। इधर जनपद पंचायत सीईओ पुनीत राम साहू ने बताया कि महिलाओं को हर्बल गुलाल बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिसका फायदा उठाते ये महिलाएं पिछले पांच सालों से गुलाल बनाकर बाजार में बेचकर इसका फायदा उठा रही हैं। हर साल करीब 50 किलो से ज्यादा गुलाल बेचकर अपने परिवार का भरण भोषण कर रही हैं। इस समय इस समूह में 10 महिलाएं हैं।
इस स्वसहायता समूह की महिलाएं होली के लिए अलग-अलग फूलों और सब्जियों से रंग तैयार कर रही हैं। ये महिलाओं पालक भाजी, लाल भाजी, टेसू के फूल, गेंदा फूलों से हर्बल गुलाल तैयार कर रहीं है। इन महिलाओं को पहले से ही प्रशासन की ओर से ट्रेनिंग दी गई है। पिछले पांच सालों में अब तक ये महिलाएं तकरीबन 150 किलो गुलाल बेच चुकी हैं.। खास बात यह है कि ये हर्बल गुलाल लोगों के चेहरे पर नुकसान नहीं पहुंचाता। यही कारण है कि लोग पहले से ही इसका ऑर्डर दे कर हर्बल गुलाल मंगवा रहे हैं।
विकास खंड परियोजना प्रबंधक रोहित सोरी ने बताया कि समूह की महिलाएं इतामपार गांव जो इंद्रावती नदी के उस पार वहां की रहने वाली है। नक्सल हिंसा के चलते इन महिलाओं ने गांव को छोड़ दिया है और इस समय भैरमगढ़ के शिविर कैँप में रह रही हैं। इन महिलाओं को जिला प्रशासन के द्वारा रहने की सुविधा दी गई है। सोरी ने बताया कि इसके अलावा ये महिलाएं अलग- अलग व्यसाय कर जीवन यापन कर रही हैं।
स्व सहायता समूह की अध्यक्ष फगनी कवासी और सचिव अनीता कर्मा ने बताया कि पहले हर्बल गुलाल बनाने की ट्रेनिंग जिला प्रशासन द्वारा दी गई थी। यहां बनाया गए रंग पूरी तरह से प्राकृतिक हैं। हम फू ल की पंखुडिय़ां, पालक भाजी, लाल भाजी,हल्दी, बेसन पलाश के फूलों से अलग-अलग रंग तैयार कर रहे हैं। हमारे बनाए हर्बल गुलाल की डिमांड भी काफी ज्यादा है। इसके चलते हम पिछले पांच सालों से यह काम कर रहे हैं। महिलाओं ने बताया कि जिला पंचायत के साथ ही मार्केट में भी जगह-जगह स्टॉल लगाकर इनका गुलाल बेचा जा रहा है। इससे अच्छी आमदनी भी हो रही है।
प्रधानमंत्री का 30 मार्च को छत्तीसगढ़ प्रवास : उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने तैयारियों का लिया जायजा
कार्यक्रम स्थल पर अधिकारियों की बैठक लेकर समीक्षा की, दिए आवश्यक निर्देश
रायपुर | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 30 मार्च को बिलासपुर में कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। बिल्हा के ग्राम मोहभट्ठा में प्रधानमंत्री की विशाल आमसभा होगी। केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू तथा उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने स्थल निरीक्षण कर इसकी तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों की बैठक लेकर तैयारियों की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। विधायकगण धरमलाल कौशिक, धरमजीत सिंह, सुशांत शुक्ला, महापौर पूजा विधानी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह, आईजी संजीव शुक्ला, कलेक्टर अवनीश शरण और एसपी रजनेश सिंह सहित जिला प्रशासन एवं पुलिस के आला अफसर भी इस दौरान मौजूद थे।

केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू और उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने मैदान के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग व्यवस्थाओं के लिए चिन्हांकित स्थलों का जायजा लिया। उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हजारों करोड़ की सौगात लेकर छत्तीसगढ़ आ रहे हैं। उन्होंने कार्यक्रम के संबंध में अधिकारियों को निर्देशित किया कि हितग्राहियों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो। आसपास रहने वाले लोगों को भी किसी तरह की परेशानी न हो। सभी विभागों को अपनी जिम्मेदारी पूरी गंभीरता से निभानी है।
केन्द्रीय राज्य मंत्री साहू और उप मुख्यमंत्री साव ने मैदान के हर कोने का भ्रमण कर बारिकी से निरीक्षण किया। उन्होंने हेलीपेड, मंच, बैठक व्यवस्था, बैरिकेडिंग, प्रदर्शनी स्थल, पार्किंग, सुरक्षा व्यवस्था आदि के संबंध में अधिकारियों से चर्चा कर जरूरी निर्देश दिए। डीएफओ सत्यदेव शर्मा, बिलासपुर नगर निगम के आयुक्त एवं कार्यक्रम के नोडल अधिकारी अमित कुमार तथा जिला पंचायत के सीईओ एवं सहायक नोडल अधिकारी संदीप अग्रवाल सहित आमसभा की तैयारी से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारी भी इस दौरान मौजूद थे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सामूहिक कन्या विवाह कार्यक्रम में शामिल होकर 353 नवविवाहित जोड़ों को दिया आशीर्वाद
मुख्यमंत्री ने नवविवाहित जोड़ों को सुखमय जीवन की दी शुभकामनाएँ
रायपुर | मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जशपुर जिले में कुनकुरी विकासखंड के सलियाटोली स्थित मिनी स्टेडियम में स्व. कुमार दिलीप सिंह जूदेव की स्मृति में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शामिल होकर 353 नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया।
मुख्यमंत्री साय ने वैदिक रीति-रिवाज से विवाह मंडप की अर्चना करते हुए कार्यक्रम का शुभारंभ किया और प्रत्येक जोड़े को उपहार भेंट कर सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद दिया।

मुख्यमंत्री साय ने सभी विवाहित जोड़ों पर पुष्प वर्षा कर मंगलकामना की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हमारे समाज में विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों और संस्कृतियों का मिलन है। उन्होंने सभी नवदम्पतियों को प्रेम, विश्वास और समर्पण को अपने वैवाहिक जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा दी।
मुख्यमंत्री साय ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सभी माताओं और बहनों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि हमारी संस्कृति में प्राचीन काल से ही महिलाओं को सम्मान प्राप्त है। उन्होंने कहा कि आज देश के सर्वोच्च पद पर भी एक महिला विराजमान हैं, खेल से लेकर अंतरिक्ष तक हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी शक्ति का परिचय दिया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए एक संतुलित और दूरदर्शी बजट तैयार किया गया है, जिसमें जशपुर के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएँ शामिल की गई हैं। उन्होंने कहा कि कुनकुरी में 220 बिस्तरों वाले अस्पताल की घोषणा के बाद अब मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जाएगी। नवीन शासकीय नर्सिंग कॉलेज, प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, शासकीय फिजियोथेरेपी कॉलेज की स्थापना होगी। सिरिमकेला (जशपुर) में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और कोतबा में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का उन्नयन किया जाएगा। जशपुर में फुटबॉल स्टेडियम, बैडमिंटन कोर्ट, मिनी स्टेडियम एवं इंडोर हॉल का निर्माण होगा। कस्तूरा तहसील दुलदुला में आईटीआई की स्थापना होगी। पंडरापाट, मयाली, कैलाशगुफा, मैनपाट आदि को पर्यटन सर्किट में शामिल किया जाएगा। साथ ही मधेश्वर महादेव पर्वत के निकट मयाली पर्यटन क्षेत्र में वाटर स्पोर्ट्स विकसित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त जशपुर में नवीन साइबर थाना की स्थापना होगी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत प्रत्येक जोड़े के विवाह में 50,000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है। पहले यह राशि 25,000 रुपये थी, जिसे मौजूदा सरकार ने बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिया। इसमें 35,000 रुपये की प्रोत्साहन और परिवहन सहायता राशि का चेक नवविवाहित जोड़ों को सौंपा गया, जबकि शेष राशि से वर-वधू को आभूषण, श्रृंगार सामग्री, वस्त्र एवं अन्य आवश्यक वस्तुएँ प्रदान की गईं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्व. कुमार दिलीप सिंह जूदेव का जीवन समाज सेवा, आदिवासी उत्थान और संस्कृति संरक्षण के लिए समर्पित था। उन्होंने उनके योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि हम सभी को उनके विचारों और सेवा कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए।
इस अवसर पर विधायक पत्थलगांव एवं उपाध्यक्ष सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण गोमती साय, विधायक जशपुर रायमुनी भगत सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने 353 नवविवाहित जोड़ों को शुभकामनाएँ दीं। विधायक गोमती साय ने कहा कि आज हम सभी के लिए यह स्मरणीय दिन है, जब हमारी बेटियाँ नवजीवन की ओर अग्रसर हो रही हैं। विधायक रायमुनी भगत ने कहा कि महिलाएँ हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और हम सभी को मातृशक्ति का सम्मान करना चाहिए।
इस अवसर पर कमिश्नर नरेंद्र कुमार दुग्गा, आईजी अंकित गर्ग, कलेक्टर रोहित व्यास, पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जिला पंचायत सदस्य शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, कृष्ण कुमार राय, राजेश कुमार गुप्ता एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बिना किसी जोड़ के पत्थरों से निर्मित घाघरा मंदिर : अद्भुत स्थापत्य कला का उदाहरण
जिले का अनोखा घाघरा मंदिर बिना जोड़ वाली पत्थरों की बना है रहस्यमयी संरचना
रायपुर | छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में स्थित घाघरा मंदिर ऐतिहासिक और रहस्यमयी धरोहरों में से एक है। यह मंदिर जिले के मुख्यालय मनेंद्रगढ़ से लगभग 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और जनकपुर के पास घाघरा ग्राम में स्थित है। मंदिर की विशेषता यह है कि इसका निर्माण बिना किसी जोड़ने वाली सामग्री के, केवल पत्थरों को संतुलित करके किया गया है। यह अपने अनोखे निर्माण और झुकी हुई संरचना के कारण रहस्य और कौतूहल का केंद्र बना हुआ है।

घाघरा मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस मंदिर में पत्थरों को जोड़ने के लिए किसी भी प्रकार की गारा-मिट्टी, चूना या किसी अन्य पदार्थ का प्रयोग नहीं किया गया है। केवल पत्थरों को सही संतुलन के साथ रखकर इस भव्य मंदिर का निर्माण किया गया है। यह तकनीक प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला और इंजीनियरिंग कौशल को दर्शाती है। इतना ही नहीं इस मंदिर का झुकाव भी इसे और अधिक रहस्यमयी बनाता है। इतिहासकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि यह मंदिर किसी भूगर्भीय हलचल या भूकंप के कारण झुक गया होगा। हालांकि, सदियों पुराना यह मंदिर आज भी मजबूती से खड़ा है, जो इसकी निर्माण शैली की उत्कृष्टता को दर्शाता है।
मंदिर के निर्माण काल को लेकर इतिहासकारों में मतभेद हैं। कुछ इतिहासकार इसे 10वीं शताब्दी का मंदिर मानते हैं, जबकि कुछ इसे बौद्ध कालीन मंदिर बताते हैं। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यह एक प्राचीन शिव मंदिर है, जहां आज भी विशेष अवसरों पर पूजा-अर्चना की जाती है। मंदिर के भीतर किसी मूर्ति का न होना भी इसे और रहस्यमयी बनाता है। स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण उस समय की अद्भुत वास्तुकला और तकनीकी कौशल का प्रमाण है। कई शोधकर्ताओं का मानना है कि यह मंदिर बौद्ध काल की किसी विशेष शैली में बनाया गया होगा, लेकिन धीरे-धीरे यह हिंदू परंपरा में समाहित हो गया।
घाघरा मंदिर केवल धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि यह छत्तीसगढ़ के संस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। इस मंदिर को देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक और शोधकर्ता आते हैं। मंदिर की रहस्यमयी संरचना और इसके झुके होने की वजह से यह पुरातत्वविदों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। घाघरा मंदिर भारतीय स्थापत्य कला की उस उन्नत तकनीक का उदाहरण है, जो बिना किसी आधुनिक संसाधनों के भी इतनी मजबूत और संतुलित संरचनाएं बनाने में सक्षम थी। छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों में इस मंदिर को उचित पहचान मिलने से यह क्षेत्र ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
घाघरा मंदिर जाने के लिए सबसे नजदीकी प्रमुख कस्बा जनकपुर है। यहाँ से घाघरा गाँव तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। यदि आप मनेंद्रगढ़ से यात्रा कर रहे हैं, तो मंदिर तक पहुंचने में लगभग 130 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी। सड़क मार्ग से यह स्थान आसानी से पहुँचा जा सकता है, और यात्रा के दौरान आप छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक सौंदर्य का भी आनंद ले सकते हैं।
ट्रेनी सब इंस्पेक्टर दौड़ते वक्त बिगड़ी तबीयत, मौत.... तीन दिन बाद होने वाली थी नियुक्ति
रायपुर। चंद्रखुरी पुलिस ट्रेनिंग में प्रशिक्षण ले रहे एक सब इंस्पेक्टर की आज सुबह दौड़ के दौरान तबीयत अचानक बिगड़ गई। जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। सब इंस्पेक्टर भर्ती से सलेक्ट हुये अभ्यथिर्यों का प्रशिक्षण एक सप्ताह पहले चंद्रखुरी पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में शुरू हुआ था। सुबह-सुबह सभी अभ्यर्थी दौड़ रहे थे। इस दौरान कुछ दूर पहुंचते ही अभ्यर्थी राजेश कोसरिया की तबीयत अचानक बिगड़ गई।
अभ्यर्थी की तबीयत बिगड़ने की सूचना के बाद प्रशिक्षण अधिकारियों ने आनन-फानन में राजेश को उपचार के लिए अस्पताल लेकर जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। पुलिस ने घटना की जानकारी मृतक के परिजनों को दे दी है। परिजनों ने पुलिस से जांच की मांग की है।
बता दें कि 10 मार्च को ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजेश कोसरिया को नियुक्ति पत्र देने वाले थे। इससे पहले उनकी मौत हो गई। बेटे की मौत की सूचना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। फिलहाल मौत का कारण क्या था। इसकी जांच पुलिस द्वारा की जा रही है।
एसईसीएल ने लगाए 2 शिविर : बिलासपुर जिले में जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की जाँच के लिए
30 पीड़ित बच्चों को निःशुल्क ऑपरेशन की सुविधा देगा एसईसीएल
रायपुर | दिनांक 3 और 5 मार्च 2025 को एसईसीएल द्वारा अपनी सीएसआर पहल एसईसीएल की धड़कन के तहत बिलासपुर के मस्तूरी एवं कोटा में श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल के सहयोग से बच्चों की निशुल्क हृदय जांच के लिए शिविर का आयोजन किया गया। दोनों शिविरों में कुल 75 बच्चों की निशुल्क हृदय की जांच की गई।

3 मार्च को मस्तूरी में आयोजित शिविर में 41 बच्चों की जन्मजात हृदय रोग की निशुल्क जांच की गई। जांच के दौरान इनमें से 13 बच्चे जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित पाए गए। वहीं कोटा में आयोजित शिविर में 34 बच्चों की हृदय की जांच की गई जिसमें 17 बच्चे जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित पाए गए।
चिन्हित बच्चों को एसईसीएल द्वारा श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल रायपुर में निशुल्क इलाज एवं चिकित्सकीय देखभाल मुहैया कराई जाएगी।
कोल इंडिया के नन्हा सा दिल प्रोजेक्ट अंतर्गत एसईसीएल द्वारा एसईसीएल की धड़कन प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है जिसके तहत कंपनी अपने संचालन क्षेत्रों के बच्चों की दिल के जन्मजात रोग की निशुल्क स्क्रीनिंग, इलाज एवं देखभाल प्रदान कर रहा है।
वर्तमान में परियोजना के तहत एसईसीएल द्वारा 75 बच्चों की सर्जरी सफलतापूर्वक की जा चुकी है। कोयलांचल में इस पहल से हो रहे लाभ को देखते हुए एसईसीएल ने छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कोयला क्षेत्रों में सीएचडी से पीड़ित 300 बच्चों के इलाज और सर्जरी के लिए ₹4.71 करोड़ की मंजूरी दी है।
एसईसीएल की धड़कन’ पूरी तरह से एसईसीएल सीएसआर कार्यक्रम के तहत वित्त पोषित है, यह पहल सुनिश्चित करती है कि वित्तीय बाधाओं के कारण कोई भी जरूरतमंद बच्चा जीवन रक्षक चिकित्सा देखभाल से वंचित न रहे। समुदाय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और समय की जरूरत के अनुरूप, एसईसीएल इस कार्यक्रम को अन्य जिलों में विस्तारित करने की योजना बना रहा है जहां सीएचडी के मामले काफी अधिक हैं।
नक्सल सर्चिंग के दौरान नक्सली वर्दी, नक्सल साहित्य एवं अन्य समाग्री बरामद
रायपुर। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत नक्सल प्रभावित नगरी एरिया के जंगलों में नक्सलियों की उपस्थिति की सूचना पर जिला बल गरियाबंद ई-30, एसटीएफ, सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन की 207 वाहिनी एवं धमतरी डीआरजी की संयुक्त टीम द्वारा नगरी, सिहावा (धमतरी) एरिया में सर्चिंग गस्त के लिए निकली थी।
सर्चिंग के दौरान 5 मार्च को सुबह ग्राम ठोठाझरिया (सिहावा) धमतरी मंदागीरी पहाडी के पास नक्सलियों की उपस्थिति पायी गई। जो सुरक्षाबलों को अपनी ओर आते देख कर नक्सली घने जंगल की आड़ लेकर भागने में सफल हुए। सुरक्षाबलों को एरिया सर्चिंग के दौरान नक्सली वर्दी, नक्सल साहित्य एवं अन्य समाग्री बरामद हुये। शासन के आत्मसमर्पण नीति के तहत समाज के मुख्यधारा से जुड़ने के लिए नजदीकी थाना, चौकी, कैम्प एवं दूरभाष नम्बर 94792-27805 पर संपर्क कर आत्मसमर्पण कर सकते है।
नक्सलियों का आतंक.... 8 परिवारों को गांव छोड़ने पर किया मजबूर
रायपुर। बस्तर में एक बार फिर नक्सलियों की कायराना करतूत सामने आई है। बारसूर थाना क्षेत्र के तुसवाल पंचायत के दो गांव के आठ परिवारों को नक्सलियों ने जान से मारने का धमकी देकर गांव से बेदखल कर दिया है। सभी परिवार दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले के शरहद में बसे तुसलवाल पंचायत के हैं। दहशत में आकर परिवार के लोग आज गांव छोड़कर बस्तर जिले के किलेपाल गांव में पनाह लेने निकले।
जानकारी के मुताबिक, तीन दिन पहले माओवादियों के पूर्वी बस्तर डिविजन के माओवादी तुषवाल पंचायत के तोड़मा और कोहकावाड़ा गांव पहुंचे थे। यहां जनअदालत लगाया और पुलिस मुखबिरी करने व थुलथुली मुठभेड़ का आरोप लगाकर आठ परिवार को गांव छोड़ने का फरमान जारी किया था।
नागरिक सेवाओं को GATI दे रहा मोर संगवारी.... मुख्यमंत्री कन्या विवाह के दौरान 46 जोड़ों को दिया विवाह प्रमाण पत्र
अधिकारियों की लापरवाही पर विधानसभा अध्यक्ष नाराज, दिये कार्रवाई के निर्देश, कहा, निर्देश के बावजूद, ऐसी लापरवाही
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा ने ज एक बार फिर अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी जताई। पूर्व सदस्यों के निधन की सूचना देरी से विधानसभा सचिवालय को उपलब्ध कराने को लेकर विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने नाराजगी जतायी।
विधानसभा में दिवंगत सदस्य डॉ. देवचरण सिंह मधुकर को श्रद्धांजलि के साथ सदन की शुरुआत हुई। विधानसभा अध्यक्ष डा रमन सिंह, मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष ने देवचरण सिंह मधुकर को श्रद्धांजलि दी। जिसके बाद दिवंगत के सम्मान में मौन रखकर सदन की कार्रवाई को 5 मिनट के लिए स्थगित किया गया।
सदन की कार्रवाई जब दोबारा शुरू हुई, तो दिवंगत सदस्यों के निधन की सूचना देरी से विधानसभा सचिवालय को उपलब्ध कराने को लेकर सदन में सवाल उठे। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने निधन सूचना देर से मिलने पर आपत्ति जताते हुए, कहा कि बार-बार अध्यक्ष की तरफ से व्यवस्था देने के बावजूद इस तरह की लापरवाही सामने आ रही है।
विधायक का ध्यान आकृष्ट कराये जाने पर स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने देर से निधन सूचना देने पर गंभीर नाराजगी जतायी। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि निर्देश के बाद भी देर से सूचना दिया जाना आपत्तिजनक है। स्पीकर डॉ रमन सिंह ने दोषी अफसरों पर कार्रवाई के निर्देश दिये। साथ ही कार्रवाई से इसी सत्र में सदन को अवगत कराने के भी निर्देश दिये।
“सरकुलर इकोनामी कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्यता है: तोखन साहू”
डेस्क। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सतत विकास को नई दिशा देने वाले ऐतिहासिक क्षण में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने जयपुर में आयोजित 12वें क्षेत्रीय 3R एवं परिपत्र अर्थव्यवस्था मंच में भाग लिया। यह मंच एक वैश्विक प्लेटफार्म के रूप में विभिन्न देशों को एक साथ लाने और स्वच्छ, हरित और संसाधन-कुशल भविष्य की दिशा में सहयोग करने का अवसर प्रदान कर रहा है।
कार्यक्रम के दौरान साहू ने जापान के पर्यावरण मंत्रालय में वैश्विक पर्यावरण मामलों के उपमंत्री श्री युताका मात्सुजावा के साथ भारत-जापान द्विपक्षीय संवाद में भाग लिया। इस संवाद में 3R (रिड्यूस, रीयूज, रीसायकल), संसाधन दक्षता और परिपत्र अर्थव्यवस्था में भारत-जापान सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की गई, जिससे सतत विकास के लिए ठोस साझेदारियों की नींव रखी जा सके।
इस मंच की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि “जयपुर घोषणा पत्र” का अंगीकरण रहा, जो 2025 से 2034 तक सतत अपशिष्ट प्रबंधन और परिपत्र अर्थव्यवस्था पहलों को दिशा देने वाला एक दूरदर्शी दस्तावेज है। जयपुर घोषणा पत्र विभिन्न अपशिष्ट प्रबंधन प्रक्रियाओं, संसाधन दक्षता, सतत सामग्री उपभोग, अनौपचारिक क्षेत्रों, लैंगिक मुद्दों एवं श्रम अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करता है। यह निधीयन तंत्र, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, अनुसंधान एवं विकास और बहुपक्षीय सहयोग के माध्यम से इन उद्देश्यों को साकार करने के लिए मार्गदर्शन भी प्रदान करता है।
भारत ने इस मंच में एक वैश्विक गठबंधन C-3 (Cities Coalition for Circularity) के रूप में एक सहयोगात्मक ज्ञान मंच भी प्रस्तुत किया, जो नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत और शोधकर्ताओं को एक साथ लाकर सतत समाधानों की दिशा में सहयोग को बढ़ावा देगा।
अपने दौरे के दौरान साहू ने इंडिया पवेलियन का भी अवलोकन किया, जहां भारत की 3R और परिपत्र अर्थव्यवस्था अपनाने की दिशा में क्रांतिकारी पहलों और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया। अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन, स्मार्ट शहरी समाधान और अन्य सतत नवाचारों के माध्यम से भारत के नेतृत्व को उजागर किया गया।
मंच के समापन सत्र में साहू ने सभी देशों, उद्योगों और नागरिकों से स्थिरता को एक विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता के रूप में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा,
कुनकुरी में 365 नवविवाहित वर वधू को देंगे : मुख्यमंत्री साय अपना आशीर्वाद
रायपुर | मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आगामी 8 मार्च को कुनकुरी विकासखंड के सलियाटोली मिनी स्टेडियम में महिला बाल विकास विभाग द्वारा मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत लगभग 365 हिन्दू जोड़ों के वर वधू को अपना आशीर्वाद देंगें |

छत्तीसगढ़ शासन के अंतर्गत संचालित मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना गरीब परिवारों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बेटियों का विवाह कराया जा रहा है और माता पिता के चिन्ता की लकीरें को दूर कर रहा है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाई जा रही योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की कन्याओं के विवाह में सहायता प्रदान करना है।
योजना की प्रमुख विशेषताएं विवाह के लिए एक जोड़े को 50 हजार रुपए तक खर्च शासन करता है। योजना के तहत सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें गरीब परिवारों की बेटियों का विवाह सरकारी सहयोग से संपन्न कराया जाता है। लाभार्थी पात्रता योजना का लाभ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग और बीपीएल परिवारों की कन्याओं को मिलता है। गरीब परिवारों पर विवाह का आर्थिक बोझ कम करना। बेटियों के विवाह को प्रोत्साहित करना। सामाजिक समरसता बढ़ाना और सामूहिक विवाह को बढ़ावा देना।