शिक्षा-कैरियर-लाइफ स्टाइल
विद्यार्थियों को मिलने लगा : अब बेहतर शैक्षणिक माहौल
118 लेक्चरर, 96 शिक्षक और 263 सहायक शिक्षकों, 40 पीवीटीजी सहित 500 से अधिक शिक्षकों की हुई नियुक्ति
शिक्षकों की नियुक्ति में विशेष पिछड़ी जनजाति परिवार पहाड़ी कोरवा, बिरहोर समाज को मिली वरीयता
रायपुर | कुछ समय पहले तक अपने विद्यालय में शिक्षकों की कमी को लेकर विद्यार्थी परेशान थे। स्कूलों में विषय से संबधित शिक्षक नहीं होन या फिर एकमात्र शिक्षक होने और कभी-कभी उनके अवकाश में रहने से अध्यापन ठप होने जाने की शिकायत पालकों की भी रहती थी। कई बार शिक्षकों की कमी को लेकर प्रदर्शन तक भी होते रहते थे। शिक्षकों की कमी का सबसे ज्यादा खामियाजा विद्यार्थियों को ही भुगतना पड़ता था। समय पर पाठयक्रम पूरे नहीं होते थे तो उन्हें विषय का ज्ञान भी नहीं मिल पाता था। कई बार तो शिक्षकों की कमी को देखते हुए कुछ विद्यार्थी अपने आसपास के विद्यालयों से दूर जाकर अन्य विद्यालय तक में पढ़ाई करते थे। वहीं शिक्षक नहीं होने पर सीमित संख्या में उपलब्ध शिक्षकों के कंधे पर भी अन्य विषयों का अध्यापन कराने की मजबूरी आ जाती थी। कुछ इन्हीं समस्याओं को ध्यान रखकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए नवाचारी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के दिशा निर्देशन में कलेक्टर श्री अजीत वसंत द्वारा कोरबा जिले में बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार किया जा रहा है। जिले में सैकड़ों ऐसे विद्यालय थे, जहां शिक्षकों की कमी थीं, उन विद्यालयों में विषय से संबंधित लेक्चचर, शिक्षकों, सहायक शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई है। अब शिक्षक नियुक्त हो जाने से विद्यालयों में अध्यापन व्यवस्था पहले से बेहतर हो गई है।
कोरबा जिले में शिक्षा व्यवस्था को पहले से और बेहतर बनाने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। कोरबा जिले में दो हजार से अधिक विद्यालय है। हायर सेकेण्डरी, माध्यमिक शाला, प्राथमिक शाला विद्यालय में शिक्षकों की कमी की शिकायत लगातार कलेक्टर के पास आती रहती थी। उन्होंने जिला खनिज संस्थान न्यास के माध्यम से सभी विद्यालयों की जानकारी जुटाकर शिक्षकों की कमी को दूर करने के निर्देश जिला शिक्षा अधिकारी को दिए। हायर सेकेण्डरी स्कूलों में विषय शिक्षकों की भर्ती के लिए योग्य उम्मीदवारों से आवेदन मंगाए गए और निर्धारित अर्हता पूरी करने वाले उम्मदवारों का चयन किया गया। प्राथमिक शाला कोरई में मानदेय के आधार पर नियुक्त हुई शिक्षिका चंद्रिका पैंकरा और प्राथमिक शाला कदमझेरिया की शिक्षिका शकुंतला कंवर ने बताया कि स्कूल में अतिथि शिक्षक के रूप में जिम्मेदारी मिलने के बाद वे भी जिम्मेदारी के साथ बच्चों का अध्यापन करा रहे हैं। यह खुशी की बात है कि शिक्षकों की नियुक्ति में पारदर्शिता बरतते हुए गांव के बेरोजगार योग्य युवाओं को भी अवसर दिया गया है। जिले के हायर सेकेण्डरी स्कूलों में कुल 118 लेक्चरर की नियुक्ति की गई। इसी तरह माध्यमिक शाला में 96 शिक्षकों और प्राथमिक शाला में 263 सहायक शिक्षकों सहित 40 पीवीटीजी शिक्षकों की नियुक्ति की गई। कुल 517 शिक्षकों की नियुक्ति जिले में की गई है। सभी शिक्षकों को मानदेय के आधार पर रखा गया है और डीएमएफ से उन्हें प्रतिमाह वेतन दिया जाता है। जिसमें रिक्त पदों के विरूद्ध शिक्षकों की नियुक्ति हो जाने से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक माहौल मिलने लगा है। उनका समय पर पाठयक्रम पूरा हो रहा है वहीं विषय ज्ञान का स्तर भी सुधरने लगा है। एकल शिक्षकीय विद्यालयों में भी शिक्षकों को राहत मिली है। अभिभावक भी इस व्यवस्था से संतुष्ट है। खास बात यह भी है कि शिक्षकों की नियुक्ति में जिले के विशेष पिछड़ी जनजाति परिवार पहाड़ी कोरवा, बिरहोर समाज को भी वरीयता दी गई है। उन्हें भी उनकी योग्यता के आधार पर जिले के अनेक विद्यालयों में शिक्षक सहित भृत्य एवं अन्य पदों पर रखा गया है, ताकि वे आर्थिक रूप से मजबूत होकर समाज की मुख्यधारा में आ सकें।
जिले के हायर सेकेण्डरी, माध्यमिक शाला, प्राथमिक शाला विद्यालय में लेक्चचर, शिक्षकों, सहायक शिक्षकों की नियुक्ति तो की ही गई है। इसके साथ ही विद्यालयों में 270 भृत्य भी नियुक्त किए गए हैं। कलेक्टर अजीत वसंत ने जर्जर विद्यालयों की भी सुध ली है। उन्होंने जर्जर भवनों की जानकारी मंगाकर नए भवन स्वीकृत किए हैं। जिले में संचालित शासकीय संस्थाओं के भवन, किचन शेड, शौचालय इत्यादि की वर्तमान स्थिति की समीक्षा कर आवश्यकता अनुसार स्वीकृति दी गई है। जिले के परीक्षा परिणाम में सुधार हेतु केंद्रीय परीक्षा पद्धति अपनाते हुए जिले के समस्त विद्यालय हेतु पाठ्यक्रम निर्धारित कर नियत समय पर त्रैमासिक एवं अर्धवार्षिक परीक्षा संचालित करने हेतु निर्देशित किया गया है। कक्षा 10वीं एवं 12वीं के कमजोर छात्र-छात्राओं के लिए बोर्ड परीक्षा के पूर्व शैक्षणिक स्तर में सुधार हेतु नवीन कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं। जिले के 2100 से अधिक प्राइमरी तथा मिडिल स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने नाश्ते वितरण कराए जा रहे हैं। खाना पकाने गैस कनेक्शन दी गई है। विद्यालयों में आवश्यक संसाधान मुहैया कराया जा रहा है और शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट तैयार हो चुका : इसका फील्ड परीक्षण जल्द ही किया जाएगा
नई दिल्ली | वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट का पहला प्रोटोटाइप मैन्युफैक्चर किया गया है और इसका फील्ड परीक्षण किया जाएगा। ट्रेन के रोलआउट होने की समय-सीमा परीक्षणों के सफल समापन पर निर्भर है। केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा के पटल पर रखे गए एक बयान में कहा कि वर्तमान में, लंबी और मध्यम दूरी की यात्रा के लिए योजना के अंतर्गत बनाई गई वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें आधुनिक सुविधाओं और यात्री सुविधाओं के साथ सुसज्जित हैं। इन ट्रेनों की कुछ विशिष्ट विशेषताएं और सुविधाएं इस प्रकार हैं:
कवच से युक्त
ईएन-45545 एचएल3 अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुरूप ट्रेन
क्रैशवर्थी और जर्क-फ्री सेमी परमानेंट कप्लर्स और एंटी क्लाइंबर्स
ईएन मानकों का अनुपालन करने वाली कारबॉडी का क्रैशवर्थी डिजाइन
ऊर्जा दक्षता के लिए दोबारा निर्माण करने वाली ब्रेकिंग प्रणाली
मंदी और त्वरण के साथ उच्च औसत गति
आपातकालीन स्थिति में यात्री और ट्रेन प्रबंधक/ लोको पायलट के बीच संचार के लिए आपातकालीन टॉक-बैक इकाई
प्रत्येक छोर पर ड्राइविंग कोचों में यात्रियों के लिए प्रतिबंधित गतिशीलता (पीआरएम) वाले आवास और सुलभ शौचालय
एक जगह से नियंत्रित स्वचालित प्लग दरवाजे और पूरी तरह से सीलबंद चौड़े गैंगवे
ऊपरी बर्थ पर चढ़ने में आसानी के लिए एर्गोनॉमिक रूप से डिजाइन की गई सीढ़ी
एयर कंडीशनिंग, सैलून लाइटिंग आदि जैसी यात्री सुविधाओं की बेहतर स्थिति की निगरानी के लिए केंद्रीकृत कोच निगरानी प्रणाली
सभी कोचों में सीसीटीवी निगरानी कैमरे
मध्यम दूरी की वंदे भारत ट्रेन सेवाओं के बारे में बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 02 दिसंबर, 2024 तक, चेयर कार की सुविधा से सुसज्जित कोच वाली 136 वंदे भारत ट्रेन भारतीय रेलवे नेटवर्क पर चल रही हैं। इनमें से 16 वंदे भारत एक्सप्रेस सेवाएं तमिलनाडु राज्य में स्थित स्टेशनों की आवश्यकता को पूरा कर रही हैं। सबसे लंबी दूरी की वंदे भारत ट्रेन सेवाएं दिल्ली और बनारस के बीच चल रही हैं, जो 771 किलोमीटर की दूरी तय करती है। उन्होंने आगे कहा कि वंदे भारत सेवाओं और इसके वेरिएंट सहित नई ट्रेन सेवाओं की शुरूआत, भारतीय रेलवे पर यातायात औचित्य, परिचालन व्यवहार्यता, संसाधन उपलब्धता आदि के अधीन एक सतत प्रक्रिया है।
कैबिनेट ने देश के उन जिलों में 28 नए नवोदय विद्यालय स्थापित करने की मंजूरी दी : जहां ये नहीं हैं
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने नवोदय विद्यालय योजना (केन्द्रीय क्षेत्र की योजना) के अंतर्गत देश के उन जिलों में 28 नवोदय विद्यालय (एनवी) स्थापित करने को मंजूरी दे दी है जहां ये नहीं हैं। इन 28 नवोदय विद्यालयों की सूची संलग्न है।
28 नवोदय विद्यालयों की स्थापना के लिए 2024-25 से 2028-29 तक पांच वर्षों की अवधि में कुल 2359.82 करोड़ रुपये की धनराशि की आवश्यकता है। इसमें 1944.19 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय घटक और 415.63 करोड़ रुपये का परिचालन व्यय शामिल है।
इस परियोजना को लागू करने के लिए 560 छात्रों की क्षमता वाले एक पूर्ण विकसित नवोदय विद्यालय को चलाने के लिए समिति द्वारा तय मानदंडों के अनुरूप प्रशासनिक ढांचे में पदों के सृजन की आवश्यकता होगी। इस प्रकार 560 x 28 = 15680 छात्र लाभान्वित होंगे। प्रचलित मानदंडों के अनुसार एक पूर्ण नवोदय विद्यालय 47 व्यक्तियों को रोजगार प्रदान करता है और तदनुसार स्वीकृत 28 नवोदय विद्यालय 1316 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष स्थायी रोजगार प्रदान करेंगे। स्कूल के बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए निर्माण और संबद्ध गतिविधियों से कई कुशल और अकुशल श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। अपनी आवासीय प्रकृति के कारण प्रत्येक नवोदय विद्यालय स्थानीय विक्रेताओं के लिए आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति जैसे भोजन, उपयोग में आने वाली सामग्रियों, फर्नीचर, शिक्षण सामग्री आदि और स्थानीय सेवा प्रदाताओं जैसे नाई, दर्जी, मोची, हाउसकीपिंग और सुरक्षा सेवाओं के लिए जनशक्ति आदि के अवसर पैदा करेगा।
नवोदय विद्यालय पूरी तरह से आवासीय, सह-शिक्षा विद्यालय हैं जो मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से आए प्रतिभाशाली बच्चों को उनके परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना कक्षा VI से XII तक अच्छी गुणवत्ता वाली आधुनिक शिक्षा प्रदान करते हैं। इन विद्यालयों में प्रवेश चयन परीक्षा के आधार पर दिया जाता है। लगभग 49,640 छात्र हर साल कक्षा VI में नवोदय विद्यालय में प्रवेश लेते हैं।
अब तक, देश भर में 661 स्वीकृत नवोदय विद्यालय हैं [जिनमें एससी/एसटी आबादी की बड़ी संख्या वाले 20 जिलों में दूसरा नवोदय विद्यालय और 3 विशेष नवोदय विद्यालय शामिल हैं]। इनमें से 653 नवोदय विद्यालय चल रहे हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसरण में, लगभग सभी नवोदय विद्यालयों को पीएम श्री विद्यालय के रूप में नामित किया गया है, जो एनईपी 2020 के कार्यान्वयन को दर्शाता है और दूसरों के लिए अनुकरणीय विद्यालयों के रूप में कार्य कर रहे हैं। इस योजना की खूब सराहना की जा रही है और हर साल नवोदय विद्यालयों में छठी कक्षा में प्रवेश के लिए आवेदन करने वाले छात्रों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। हाल के वर्षों में, नवोदय विद्यालयों में नाम लिखवाने वाली लड़कियों (42 प्रतिशत), साथ ही एससी (24 प्रतिशत), एसटी (20 प्रतिशत) और ओबीसी (39 प्रतिशत) बच्चों की संख्या में वृद्धि देखी गई है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सभी के लिए सुलभ है।
सीबीएसई द्वारा आयोजित बोर्ड परीक्षाओं में नवोदय विद्यालयों के छात्रों का प्रदर्शन लगातार सभी शैक्षणिक प्रणालियों में सर्वश्रेष्ठ रहा है। नवोदय विद्यालयों के छात्र शहरी भारत की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं के बराबर इंजीनियरिंग, चिकित्सा विज्ञान, सशस्त्र बलों, सिविल सेवाओं आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।
अगर आप भी बचना चाहते है साइबर क्राइम से तो इन बातों का जरूर रखें ध्यान
डेस्क। बढ़ते साइबर अपराध को लेकर पुलिस और प्रशासन द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। छोटी-छोटी बातों का ध्यान में रखकर साइबर अपराधों से बचा जा सकता है।
1. अगर आपको कॉल आए कि TRAI आपका फोन बंद करने वाला है, तो जवाब न दें। यह एक साइबर फ्रॉड है।
2. अगर FedEx के नाम पर कॉल आए और पैकेज के बारे में बात करते हुए आपसे 1 दबाने को कहें, तो जवाब न दें। यह एक साइबर फ्रॉड है।
3. अगर कोई पुलिस अधिकारी आपके आधार के बारे में बात करने के लिए कॉल करे, तो जवाब न दें। यह एक साइबर फ्रॉड है।
4. अगर वे कहें कि आप 'डिजिटल गिरफ्तारी' में हैं, तो जवाब न दें। यह एक साइबर फ्रॉड है।
5. अगर वे कहें कि आपके नाम पर भेजे गए पैकेज में ड्रग्स मिले हैं, तो जवाब न दें। यह एक साइबर फ्रॉड है।
6. अगर वे कहें कि किसी को न बताएं, तो उनकी बात न मानें। साइबर क्राइम पुलिस को 1930 पर सूचित करें।
7. अगर वे WhatsApp या SMS के जरिए संपर्क करें, तो जवाब न दें। यह एक साइबर फ्रॉड है।
8. अगर कोई आपको कॉल कर कहे कि उन्होंने गलती से आपके UPI ID पर पैसे भेज दिए और अब उन्हें वापस चाहिए, तो जवाब न दें। यह एक साइबर फ्रॉड है।
9. अगर कोई कहे कि वे आपकी कार, वॉशिंग मशीन या सोफा खरीदना चाहते हैं और वे आर्मी या CRPF से हैं और अपना आईडी कार्ड दिखाएं, तो जवाब न दें। यह एक साइबर फ्रॉड है।
10. अगर कोई Swiggy या Zomato के नाम पर कॉल कर आपसे पता कन्फर्म करने के लिए 1 दबाने को कहे, तो जवाब न दें। यह एक साइबर फ्रॉड है।
11. अगर वे केवल ऑर्डर या राइड को कैंसल करने के लिए OTP शेयर करने को कहें, तो जवाब न दें। किसी भी स्थिति में अपना OTP फोन पर किसी के साथ साझा न करें।
12. वीडियो मोड में किसी भी कॉल का उत्तर न दें।
13. यदि समझ में न आए तो फोन बंद करके उस नंबर को ब्लॉक कर दें।
14. किसी भी नीले रंग के लिंक पर क्लिक न करें।
15. यदि आपको पुलिस, CBI, ED, या IT विभाग से नोटिस मिले, तो उसे ऑफलाइन सत्यापित करें।
16. हमेशा जांचें कि ऐसे पत्र आधिकारिक सरकारी पोर्टल से हैं या नहीं।
17. अगर कोई कहे कि आपका परिवार का सदस्य दुर्घटना में है और अस्पताल में भर्ती है और तुरंत पैसे चाहिए, तो कॉल डिस्कनेक्ट करें और अपने परिवार के सदस्य या अस्पताल से पुष्टि करें।
डिजिटल स्वच्छता के तौर पर, अपना पता, लोकेशन, फोन, आधार, PAN, जन्म तिथि या कोई भी व्यक्तिगत जानकारी किसी को फोन या मैसेज पर न दें। जो व्यक्ति कॉल कर रहा है उसे यह जानकारी पहले से पता होनी चाहिए। अगर उनके पास आपकी जानकारी हो भी, तो उसे न पुष्टि करें और न ही इंकार। कॉल को तुरंत काट दें और नंबर को ब्लॉक कर दें। यदि वे आप पर दबाव डाल रहे हैं, डरा रहे हैं, या आपको तुरंत प्रतिक्रिया देने पर मजबूर कर रहे हैं, तो समझ लें कि यह एक साइबर फ्रॉड है।
अगर उपरोक्त सभी बातों के बावजूद आप साइबर फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं, तो बिना किसी हिचकिचाहट के अपने स्थानीय साइबर पुलिस को 1930 पर रिपोर्ट करें।
माधवराव सप्रे उच्चतर माध्यमिक शाला पीएमश्री योजना में होगा शामिल : सांसद बृजमोहन अग्रवाल
स्मार्ट कंप्यूटर रूम के उद्घाटन अवसर पर कहा स्मार्ट लाइब्रेरी भी बनेगी
रायपुर | शहर की प्राचीनत्तम स्कूल माधवराव सप्रे उच्चतर माध्यमिक शाला को पीएमश्री योजना में शामिल कराए जाने की घोषणा रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने की, ताकि यहां के बच्चों को भी गुणवत्तापरख उच्च शिक्षा मिल सके। अगले सत्र से कॉमर्स आर्ट्स साइंस मैथ्स सहित सभी संकाय की सुविधा यहां होगी | इसके लिए सभी आवश्यक प्रकिया पूरा करने के निर्देश उन्होंने शाला परिसर में ही जिला शिक्षा अधिकारी खंडेलवाल को दिए। स्मार्ट कंप्यूटर रूम के उद्घाटन अवसर पर उन्होने यह भी कहा कि जल्द ही यहां स्मार्ट लाइब्रेरी भी बनेगी।
माधवराव सप्रे उच्चतर माध्यमिक शाला में नव निर्मित स्मार्ट कंप्यूटर रूम के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि की आसंदी से बोलते हुए बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि इस स्कूल की अपनी अलग ही पहचान है। यहां से पढ़कर निकले छात्रों ने अलग-अलग क्षेत्रों में नाम रौशन किया है। सन एंड सन ग्रुप के सहयोग से तैयार स्मार्ट कंप्यूटर रूम के लिए धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा व सामाजिक सरोकार से जुड़े कई उल्लेखनीय कार्य इनके द्वारा किए गए हैं। स्मार्ट कंप्यूटर रूम तो बन गया है अब जल्द ही यहां स्मार्ट लाइब्रेरी भी बनाया जायेगा। नव निर्वाचित विधायक सुनील सोनी ने भी शाला के विकास में हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। शाला विकास समिति की ओर से सांसद बृजमोहन अग्रवाल और सुनील सोनी व राजेंद्र शर्मा को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया। शाला विकास समिति के अध्यक्ष हरख मालू ने बताया कि स्वर्गीय लक्ष्मीकांत, स्वर्गीय कैलाशचंद्र व स्वर्गीय बृजमोहन शर्मा की स्मृति में सन एंड सन ग्रुप के सहयोग से यह स्मार्ट कंप्यूटर रुम साकार हो पाया है। यहां कुल 15 कंप्यूटर लगाये गए हैं। 30 छात्रों के बैठने की यहां व्यवस्था है। यह भी बता दें कि शाला के विस्तारीकरण योजना के लिए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने पिछले दिनों 50 लाख रुपए देने की घोषणा की थी। जिस पर जगह व ड्राइंग डिजाइन सब तैयार हो गया है, शीघ्र ही निर्माण कार्य प्रारंभ हो जायेगा। इस अवसर पर सन एंड सन ग्रुप शर्मा परिवार के राजेंद्र शर्मा, शाला विकास समिति की सचिव व प्राचार्य डॉ. अनूपमा श्रीवास्तव, सदस्य महादेव नायक व संतोष सोनी, प्रमित नियोगी, जिला शिक्षा अधिकारी खंडेलवाल, आत्मानंद स्कूल प्रभारी पटले व विशिष्टजन उपस्थित थे।
विकसित भारत की कहानी विज्ञान की वर्णमाला में लिखी जाएगी : डॉ. जितेंद्र सिंह
केंद्रीय मंत्री ने भारत की वैज्ञानिक क्षमता को प्रदर्शित करते हुए आईआईएसएफ 2024 का शुभारम्भ किया
पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल के पहले पाँच महीनों में छह ऐतिहासिक निर्णय, भारत की वैज्ञानिक प्रगति को गति देंगे
आईआईएसएफ 2024 में आकर्षक प्रदर्शनियों और इंटरैक्टिव कार्यक्रमों के साथ भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा
डॉ. जितेंद्र सिंह ने आईआईएसएफ 2024 में पूर्वोत्तर के परिवर्तन का जश्न मनाया, भारत के विकास में इसकी केंद्रीय भूमिका के बारे में बताया
भारत भर से दस हज़ार से अधिक छात्र आईआईएसएफ 2024 में शामिल हुए, कार्यक्रम की व्यापक भागीदारी और युवाओं की भागीदारी के बारे में बताया
नई दिल्ली | केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुवाहाटी में भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (आईआईएसएफ) 2024 के 10वें संस्करण का उद्घाटन करते हुए कहा की विकसित भारत की कहानी “विज्ञान की वर्णमाला” में लिखी जाएगी।
दर्शकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विकसित राष्ट्र बनने का भारत का मार्ग वैज्ञानिक उन्नति और नवाचार के प्रति उसकी प्रतिबद्धता से गहराई से जुड़ा हुआ है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने एक ऐसी संस्कृति को बढ़ावा देने के महत्व के बारे में बताया, जहां विज्ञान प्रगति को आगे बढ़ाता है। यह एक ऐसे भविष्य को आकार देता है, जहां प्रौद्योगिकी और अनुसंधान स्वास्थ्य सेवा से लेकर बुनियादी ढांचे तक समाज के हर पहलू में योगदान करते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने में विज्ञान की परिवर्तनकारी शक्ति की याद दिलाई।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने संबोधन के दौरान मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में अब तक के पांच महीनों में किए गए छह प्रमुख फैसलों के बारे में बताया। जो वैज्ञानिक उन्नति के लिए भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं। इनमें 1 लाख करोड़ रूपये के राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन की स्थापना, अंतरिक्ष स्टार्टअप के लिए एक हज़ार करोड़ रूपये का वेंचर फंड और मौसम पूर्वानुमान को बढ़ाने के लिए मिशन मौसम की शुरुआत शामिल थी। उन्होंने पर्यावरण, आर्थिक और रोजगार वृद्धि के लिए जैव प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के लिए डिज़ाइन की गई बायो-ई3 पहल और 2 करोड़ से अधिक छात्रों के लिए अकादमिक पत्रिकाओं तक सार्वभौमिक पहुँच प्रदान करने के लिए “एक राष्ट्र, एक सदस्यता” नीति की शुरुआत पर भी चर्चा की। इसके अतिरिक्त नवाचार को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक मान्यता प्राप्त अटल इनोवेशन मिशन को इसके प्रभाव का विस्तार करने के लिए आगे बढ़ाया गया।
महोत्सव का विषय विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में भारत, जैव-विनिर्माण, अर्धचालक और चिकित्सा उपकरणों में अग्रणी होने की राष्ट्र की आकांक्षाओं के अनुरूप है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत इन क्षेत्रों में तेजी से प्रगति कर रहा है, जिसमें क्वांटम मिशन और अर्धचालक विनिर्माण जैसी प्रगति का समर्थन करने वाले महत्वपूर्ण निवेश और नीतिगत ढांचे हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सरकार का दृष्टिकोण भारत को विज्ञान और प्रौद्योगिकी में वैश्विक प्रमुख के रूप में स्थापित करना है।
मंत्री के संबोधन के दौरान विज्ञान संचार एक प्रमुख फोकस के रूप में उभरा है क्योंकि उन्होंने देश भर में युवा दिमागों को प्रेरित करने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और कृषि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में स्टार्टअप मुख्य रूप से बेंगलुरु और पुणे जैसे शहरों से उभरे हैं और उन्होंने छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने युवा इन्नोवेटर्स के लिए पहुँच बढ़ाने का आग्रह करते हुए कहा, “कल के स्टार्टअप देश के हर कोने से उभरने चाहिए।”
आईआईएसएफ 2024 प्रतिभागियों को जोड़ने और विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारत की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए विविध प्रकार की गतिविधियाँ प्रदान करता है। मुख्य आकर्षणों में संग्रहालय का चंद्रमा प्रदर्शनी, एक 3D लेजर शो, रीइमेजिनिंग भारत प्रदर्शनी और युवा वैज्ञानिक सम्मेलन शामिल हैं। विज्ञान रक्षा एक्सपो और पूर्वोत्तर के वैज्ञानिक संसाधनों की खोज के लिए समर्पित एक विशेष विज्ञान यात्रा जिज्ञासा और नवाचार को बढ़ावा देने के कार्यक्रम के मिशन को और अधिक रेखांकित करती है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने पूर्वोत्तर में इस कार्यक्रम की मेजबानी के महत्व पर भी प्रकाश डाला, एक ऐसा क्षेत्र जिसने मोदी सरकार के तहत उल्लेखनीय परिवर्तन किया है। उन्होंने याद किया कि कैसे, 2014 से पहले, पूर्वोत्तर के अधिकांश हिस्से में बुनियादी ढांचे की कमी थी, लेकिन आज रेलवे, जलमार्ग और सड़क नेटवर्क का विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा, "पूर्वोत्तर अब हाशिये पर नहीं है, बल्कि भारत की विकास कहानी का केंद्र है," उन्होंने इस क्षेत्र को देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में सम्मानित किया।
आईआईएसएफ 2024 की एक अनूठी विशेषता इसका सहयोगात्मक "संपूर्ण विज्ञान" दृष्टिकोण है, जो सभी विज्ञान मंत्रालयों और नीति निर्माताओं को एक छत के नीचे एकजुट करता है। यह मॉडल "संपूर्ण सरकार" रणनीति तक फैला हुआ है, जिसमें केंद्र सरकार और असम का प्रशासन महोत्सव की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सामंजस्य से काम कर रहा है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने 2047 तक वैज्ञानिक रूप से उन्नत भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नागरिकों, स्टार्टअप्स और नीति निर्माताओं को एक साथ लाने के लिए “संपूर्ण राष्ट्र” प्रयास के व्यापक दृष्टिकोण पर भी बल दिया।
भारत भर से दस हज़ार से अधिक छात्रों की भागीदारी के साथ आईआईएसएफ 2024 में अभूतपूर्व जुड़ाव देखा गया है। यह वैज्ञानिकों और इन्नोवेटर्स की अगली पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए एक मंच के रूप में इसके महत्व को रेखांकित करता है। यह विशाल भागीदारी महोत्सव की अपील और युवाओं में जिज्ञासा और वैज्ञानिक अन्वेषण की संस्कृति को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका को दर्शाती है। यह कार्यक्रम युवा दिमागों को जुड़ने, सीखने और विज्ञान और प्रौद्योगिकी में वैश्विक नेता के रूप में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा में योगदान देने के लिए उत्प्रेरक करने का काम करता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने समापन भाषण में भारत के वैज्ञानिक भविष्य के बारे में आशा व्यक्त की। जैसे-जैसे हम 2047 की ओर बढ़ रहे हैं, युवा, विशेष रूप से हमारे स्टार्टअप, हमें एक वैश्विक नेता के रूप में हमारे भाग्य की ओर ले जाएंगे, "उन्होंने नवाचार, सहयोग और प्रगति के लिए देश की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए इसकी घोषणा की।
एक करोड़ की लागत से होगा पीएचसी का रिनोवेशन
कलेक्टर अवनीश शरण ने अस्पताल
तीन महीनों में काम पूरा करने के निर्देश
रायपुर | बिलासपुर जिले के सीपत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) का लगभग एक करोड़ रुपए की लागत से रिनोवेशन किया जाएगा। विभिन्न योजनाओं के कन्वर्जेंस से यह राशि जुटाई जाएगी। बिलासपुर के कलेक्टर अवनीश शरण ने अस्पताल भवन एवं परिसर का निरीक्षण कर डॉक्टरों और इंजीनियरों के साथ बैठकर रिनोवेशन की कार्ययोजना बनाई। उन्होंने सीजीएमएससी (छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन) और आरईएस (ग्रामीण यांत्रिकी सेवा) के अधिकारियों को अगले तीन महीनों में रिनोवेशन का काम पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल श्रीवास्तव, पीएचसी की प्रभारी डॉ. आकांक्षा दुबे और डीपीएम पीयूली मजूमदार सहित आरईएस और सीजीएमएससी के अधिकारी भी इस दौरान मौजूद थे।
कलेक्टर अवनीश शरण ने अस्पताल परिसर में बने शासकीय आवास गृहों में रहने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की समस्याएं सुनी और रिनोवेशन की कार्ययोजना में इसे भी शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने इलाज कराने आए मरीजों से मुलाकात कर अस्पताल की व्यवस्था के बारे में फीडबैक लिया। उन्होंने महिला वार्ड का भ्रमण कर प्रसव की सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। शरण ने बढ़ते ठंड को देखते हुए जिले के सभी अस्पतालों में तीन दिनों में मरीजों के लिए कंबल की व्यवस्था करने को कहा। उन्होंने मुख्यालय में रहने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की प्रशंसा करते हुए उनके आवास की मरम्मत और पेयजल की समस्या को दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने अस्पताल परिसर में सिम्स (CIMS) के खाली पड़े दो छात्रावासों का उपयोग मेडिकल वार्ड के रूप में करने की अनुमति प्रदान की।
छत्तीसगढ़ में 8,900 से अधिक पदों पर निकली सरकारी भर्ती... युवाओं के लिए अवसर ही अवसर
रायपुर। सरकार ने युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर प्रदान करते हुए विभिन्न विभागों में 8900 से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। इससे प्रदेश के मेधावी युवाओं को शासकीय सेवा में शामिल होने का मौका मिलेगा। भर्ती प्रक्रिया की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि नई भर्तियां विभागीय कार्यक्षमता को बढ़ाने और राज्य की विकास परियोजनाओं को गति देने में सहायक होंगी.
नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण, विद्युत निरीक्षक कार्यालय और न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) में कुल 151 पदों पर भर्ती को स्वीकृति दी गई है।इन विभागों में भर्तियों से न केवल कार्यक्षमता में सुधार होगा बल्कि प्रदेश के युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे। इन संस्थानों में नियुक्तियां प्रदेश की प्रशासनिक और तकनीकी जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं।
भर्तियों की इस व्यापक प्रक्रिया का उद्देश्य न केवल विभागीय कार्यों को सुचारू बनाना है, बल्कि विकास परियोजनाओं को नई ऊर्जा और दिशा देना भी है। विभिन्न विभागों में नई नियुक्तियां यह सुनिश्चित करेंगी कि सरकारी योजनाओं और नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। इससे प्रदेश में समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त होगा और आम जनता को भी बेहतर सेवाएं मिलेंगी।
प्रदेश में 19 विभागों में कुल 8971 पदों पर भर्ती को स्वीकृति दी जा चुकी है. यह पहल प्रदेश के होनहार युवाओं को उनके सरकारी नौकरी के सपने को साकार करने का एक बड़ा अवसर प्रदान करती है। इच्छुक अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे इस अवसर का पूरा लाभ उठाने के लिए तैयारी में कोई कसर न छोड़ें। सरकार की इस पहल से शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई को पाटने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रदेश का एकमात्र वनधन केन्द्र दुगली : जहां एलोवीरा का प्रिमियम प्रोडक्ट किया जाता है तैयार
वनधन विकास केन्द्र दुगली में महिलाओं को मिल रहा वर्षभर रोजगार
रायपुर | वनधन योजना का प्रमुख काम आदिवासी लोगों के लिए आजीविका सृजन को लक्षित करना और उन्हें उद्यमियों में बदलना है। इसके अलावा वनाच्छादित क्षेत्रों में वनधन विकास केन्द्रों के स्वामित्व वाले जनजातीय समुदाय को स्थापित करना है, ताकि वन उपज के लिए प्राथमिक प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके और जनजातियों के लिए रोजगार उपलब्ध हो सके। प्रधानमंत्री वनधन विकास योजनान्तर्गत वनांचल नगरी के दुगली स्थित वनधन विकास केन्द्र वर्ष 2018 से संचालित है। इसके जरिए समूह की महिलाओं को महिलाओं को पूरे वर्षभर कार्य मिल जाता है। इसके अलावा समय-समय पर जब कार्य अधिक होता है, तो अन्य समूह की महिलाओं को भी बुलाया जाता है।
वनधन विकास केन्द्र दुगली में कुल 22 प्रकार की सामग्रियां तैयार की जातीं हैं, इनमें से 15 प्रकार की औषधि एवं खाद्य सामग्री का निर्माण शामिल है, जिसका आयुष एवं खाद्य विभाग से लायसेंस भी मिला है। यहां वर्ष 2023 से एलोविरा का उत्पाद साबून, शैम्पू, मोस्चराईजर, बॉडीवॉश आदि तैयार किया जा रहा है, जिसका ड्रग एवं कॉस्मेटिक विभाग से लायसेंस मिला है। प्रदेश में एकमात्र वनधन विकास केन्द्र दुगली है, जिसमें एलोवीरा का प्रिमियम प्रोडक्ट तैयार किया जाता है। इसके अतिरिक्त यहां का तिखूर अच्छी गुणवत्ता का तैयार किया जाता है। इन उत्पादों को बेहतर गुणवत्तायुक्त तैयार करने के लिए समय-समय पर विशेषज्ञों द्वारा महिला समूहों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है। भारत सरकार ट्राइबल विभाग द्वारा वर्ष 2021 में वनधन विकास केन्द्र दुगली को प्रदेश में अधिक संग्रहण के लिए अवार्ड भी प्रदाय किया गया है। इस वनधन केन्द्र कों मशीनरी एवं तकनीकी सहयोग भी मिल रहा है, जिससे केन्द्र दिनों दिन प्रगति कर रहा है। यहां 22 प्रकार के उत्पाद एलोवीरा जूस, साबून, बॉडी वॉश, शैम्पू, जेल, मोस्चराईजर, हेयर कंडीशनर के साथ ही आंवला कैंण्डी, आंवला जूस, आंवला चूर्ण, बेहड़ा पावडर, त्रिफला चूर्ण, शतावर चूर्ण, अश्वगंधा चूर्ण, अर्जुन चूर्ण, जामुन गुठली चूर्ण, कालमेघ चूर्ण, तिखुर पावडर, बैचांदी चिप्स, माहुल पत्ता, शीशल रस्सी और शहद निर्मित किया जाता है।
10,000 से अधिक स्वयंसेवकों और हजारों लोगों के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद को अपनाने से 'देश का प्रकृति संरक्षण अभियान' को गति मिली
प्रत्येक व्यक्ति जो प्रकृति परीक्षण में भाग लेता है और व्यक्तिगत स्वास्थ्य दृष्टिकोण अपनाता है, वह एक स्वस्थ भारत के निर्माण में योगदान दे रहा है: श्री प्रतापराव जाधव, आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) |
नई दिल्ली | आयुष मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया एक अग्रणी स्वास्थ्य जागरूकता अभियान 'देश का प्रकृति प्रशिक्षण अभियान' महत्वपूर्ण गति प्राप्त कर रहा है क्योंकि अधिक से अधिक नागरिक इस पहल से जुड़ रहे हैं। आज तक, अभियान में उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है, कुल 10,737 स्वयंसेवक सक्रिय रूप से देश भर में इसके प्रयासों को चला रहे हैं।
यह अभियान, जिसका उद्देश्य व्यक्तियों को उनकी अद्वितीय आयुर्वेदिक प्रकृति (मन-शरीर संरचना) को समझने के लिए सशक्त बनाना है, पहले ही 6,828 प्रतिभागियों तक पहुँच चुका है, जिन्होंने अपना प्रकृति परीक्षण (मूल्यांकन) पूरा कर लिया है। इसके अतिरिक्त, 11,608 नागरिकों ने बेहतर स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेदिक सिद्धांतों को अपनाने का संकल्प लिया है, जो इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन की एक आशाजनक शुरुआत है।
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने पहल के बढ़ते प्रभाव के प्रति उत्साह व्यक्त करते हुए कहा, “अब तक हमें जो प्रतिक्रिया मिली है वह हमारे देश में दैनिक जीवन में आयुर्वेद के प्रति बढ़ती जागरूकता और स्वीकार्यता का प्रमाण है।” प्रत्येक व्यक्ति जो प्रकृति परीक्षण में भाग लेता है और व्यक्तिगत स्वास्थ्य दृष्टिकोण अपनाता है, एक स्वस्थ भारत के निर्माण में योगदान दे रहा है। यह सिर्फ शुरुआत है, और हम साथ मिलकर आने वाली पीढ़ियों के लिए देश के स्वास्थ्य में बदलाव लाएंगे।"
'देश का प्रकृति परीक्षण अभियान' का उद्देश्य नागरिकों को उनकी प्रकृति के आधार पर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्रदान करना, बीमारियों की रोकथाम में मदद करना और समग्र कल्याण को बढ़ावा देना है। यह अभियान कई गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स को तोड़ने का भी प्रयास करता है, जिसमें प्रकृति प्रमाणपत्रों का सबसे बड़ा ऑनलाइन फोटो एल्बम और स्वास्थ्य अभियान के लिए सबसे अधिक प्रतिज्ञाएँ शामिल हैं, जिससे इसके प्रभाव को और बढ़ाया जा सके।
आयुष मंत्रालय व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करना जारी रखता है तथा यह सुनिश्चित करता है कि आयुर्वेद स्वास्थ्य और कल्याण की दिशा में प्रत्येक नागरिक की यात्रा का एक अभिन्न अंग बन जाए।
धर्मेंद्र प्रधान ने द टीचर ऐप का अनावरण किया
शिक्षक भावी पीढ़ी का निर्माण करने वाले वास्तविक कर्मयोगी हैं : धर्मेंद्र प्रधान
हम एनईपी 2020 की भावना में शिक्षकों की निरंतर क्षमता निर्माण के लिए नवाचार और प्रौद्योगिकी का लाभ उठा रहे हैं : धर्मेंद्र प्रधान
नई दिल्ली | केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नई दिल्ली में टीचर ऐप का अनावरण किया, जो 21वीं सदी की कक्षाओं की माँगों को पूरा करने के लिए शिक्षकों को भविष्य के लिए तैयार कौशल से लैस करेगा। यह भारत में शिक्षा क्रांति लाने के लिए डिज़ाइन किया गया एक अभिनव डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इस प्लेटफॉर्म को भारती एंटरप्राइजेज की परोपकारी शाखा, भारती एयरटेल फाउंडेशन द्वारा विकसित किया गया है। भारती एंटरप्राइजेज के उपाध्यक्ष, श्री राकेश भारती मित्तल; भारती एयरटेल फाउंडेशन की सीईओ श्रीमती ममता सैकिया, शिक्षा क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति, स्कूल के प्राचार्य, शिक्षक और बी.एड. कार्यक्रम में छात्र भी आयोजन में मौजूद थे।
"शिक्षकों को ऊपर उठाना, भारत को ऊपर उठाना" विषय पर सभा को संबोधित करते हुए, धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह ऐप निरंतर क्षमता निर्माण, नवीन पाठ्यक्रम सामग्री, प्रौद्योगिकी और समुदाय-निर्माण सुविधाओं का लाभ उठाकर शिक्षकों को महत्वपूर्ण रूप से सशक्त बनाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षक भावी पीढ़ी को आकार देने वाले वास्तविक कर्मयोगी हैं और सरकार एनईपी 2020 की भावना के अनुरूप उनकी निरंतर क्षमता निर्माण पर अभूतपूर्व ध्यान केंद्रित कर रही है।
मंत्री ने आगे इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रबुद्ध शिक्षक प्रबुद्ध छात्रों का निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा, जैसे-जैसे भारत ज्ञान-संचालित 21वीं सदी में प्रगति कर रहा है, शिक्षक भविष्य के अवसरों की पहचान करने और यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे कि हमारे युवा देश की विकास गाथा का नेतृत्व करें।
जमीनी अनुभव और शिक्षकों के सामने आने वाली चुनौतियों की गहरी समझ के आधार पर, द टीचर ऐप की संकल्पना की गई है। यह मंच उन्हें नवीन डिजिटल संसाधनों के माध्यम से समय-परीक्षित और भविष्य के लिए तैयार कौशल से लैस करेगा। शिक्षकों से सीधे इनपुट के साथ विकसित यह उपयोगकर्ता-केंद्रित, निःशुल्क ऐप वेब, आईओएस और एंड्रॉइड पर उपलब्ध है, जो देश भर में शिक्षकों के लिए निर्बाध पहुँच सुनिश्चित करता है। यह प्लेटफ़ॉर्म 260 घंटे से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले संसाधन प्रदान करता है, जिसमें पाठ्यक्रम, लर्निंग बाइट्स, लघु वीडियो, पॉडकास्ट और विषयगत फेष्ट, वेबिनार, प्रतियोगिताओं और क्विज़ जैसे इंटरैक्टिव प्रारूप शामिल हैं। यह भविष्य की तैयारी में शैक्षणिक प्रथाओं को उन्नत करने और कक्षाओं में छात्रों की सहभागिता बढ़ाने हेतु डिज़ाइन किया गया हैं। इसके अतिरिक्त, ऐप में लाइव विशेषज्ञ सत्र भी हैं जो व्यावहारिक कक्षा रणनीतियाँ प्रदान करते हैं और शिक्षकों की असाधारण प्रभाव वाली कहानियों को उजागर करके उनका एक समुदाय बनाने का लक्ष्य रखते हैं। ऐप शिक्षा में बदलाव के लिए 12 राज्यों में साझेदारी के साथ तकनीकी नवाचार को जोड़ता है।
इस प्लेटफ़ॉर्म में टीचिंग किट नामक एक अनूठा अनुभाग है जिसमें 900 घंटे की सामग्री शामिल है। यह सुविधा शिक्षकों को कक्षा में डिलीवरी के लिए शिक्षण वीडियो, प्रोजेक्ट-आधारित शिक्षण गतिविधियाँ, वर्कशीट, पाठ योजना और प्रश्न बैंक सहित अन्य उपकरणों के साथ समर्थन देने के लिए डिज़ाइन की गई है। स्कूलों को सुरक्षित और खुशहाल शिक्षण स्थानों में बदलने के मिशन के साथ, टीचर ऐप न केवल शिक्षकों के विकास का समर्थन करता है बल्कि स्कूलों के नेताओं और प्रशासकों को भी सशक्त बनाता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप, ऐप का उद्देश्य शिक्षा की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए भविष्य के लिए तैयार शिक्षकों का निर्माण करना है।
राकेश भारती मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत को एक वैश्विक आर्थिक नेता के रूप में विकसित करने के लिए, यह जरूरी है कि शिक्षा प्रणाली शिक्षकों को रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए तैयार करे। उन्होंने कहा, टीचर ऐप शिक्षकों को विश्व स्तरीय संसाधनों और सर्वोत्तम प्रथाओं तक पहुणच प्रदान करेगा जो उन्हें असाधारण सीखने के अनुभव प्रदान करने के लिए सशक्त बनाता है।
डॉ. वर्गीस कुरियन की विरासत को सम्मानित करने के लिए : नई दिल्ली में राष्ट्रीय दुग्ध दिवस 2024 समारोह का आयोजन
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार प्रदान करेंगे
एनएमडी 2024: कार्यक्रम में बुनियादी पशुपालन सांख्यिकी (बीएएचएस)-2023 और उत्कृष्ट गायों की पहचान पर मैनुअल- दो प्रमुख प्रकाशनों का विमोचन होगा
नई दिल्ली | मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) 26 नवंबर, 2024 को मानेकशॉ सेंटर, नई दिल्ली में "राष्ट्रीय दुग्ध दिवस" का आयोजन करेगा। यह कार्यक्रम डॉ. वर्गीज कुरियन की 103वीं जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जिन्हें "भारत में श्वेत क्रांति के जनक" के रूप में याद किया जाता है। यह भारत की अर्थव्यवस्था और पोषण सुरक्षा में डेयरी क्षेत्र के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डालता है। इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल और जॉर्ज कुरियन तथा अन्य कई गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह 3 श्रेणियों में प्रतिष्ठित राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार (पशुधन और डेयरी क्षेत्र में सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कारों में से एक) भी प्रदान करेंगे। देश भर से स्वदेशी गाय/भैंस की नस्लों का पालन करने वाले सर्वश्रेष्ठ डेयरी किसान, सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन और सर्वश्रेष्ठ डेयरी सहकारी समिति (डीसीएस)/दूध उत्पादक कंपनी/डेयरी किसान उत्पादक संगठन इन तीन श्रेणियों में पुरस्कार दिया जाएगा। पूर्वोत्तर क्षेत्र के विजेताओं को प्रत्येक श्रेणी में एक नया जोड़ा गया विशेष पुरस्कार भी प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान कुछ पुरस्कार विजेता अपने अनुभव भी साझा करेंगे और इस क्षेत्र में अपनाए गए सर्वोत्तम प्रथाओं, नवाचारों और टिकाऊ दृष्टिकोणों के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्रदान करेंगे।
इस कार्यक्रम में दो महत्वपूर्ण प्रकाशनों का भी विमोचन किया जाएगा। पहला है बेसिक एनिमल हसबैंड्री स्टैटिस्टिक्स (BAHS)-2023, जो पशुधन और डेयरी क्षेत्र के रुझानों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है और डेटा-संचालित नीति निर्माण को रेखांकित करता है। दूसरा है एलीट गायों की पहचान पर एक मैनुअल, जिसे एलीट से एलीट डेयरी पशुओं से युक्त राष्ट्रीय दुधारू झुंड के निर्माण का मार्गदर्शन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह पशुपालन के क्षेत्र में साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने और तकनीकी उन्नति पर सरकार के फोकस को रेखांकित करता है।
इस उत्सव का एक विशेष आकर्षण अखिल भारतीय मोटर रैली का समापन है। इसे बजाज ऑटो के सहयोग से अग्रणी डेयरी सहकारी अमूल द्वारा आयोजित किया गया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 19 नवंबर 2024 को गुजरात के साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर से झंडी दिखाकर इसे रवाना किया था। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले रैली समूह अंतिम चरण के लिए नई दिल्ली के धौला कुआं में एकत्र होंगे और अंत में मानेकशॉ सेंटर पहुंचेंगे, जहां केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उनका स्वागत करेंगे।
इस कार्यक्रम में दो विचारोत्तेजक पैनल चर्चाएं भी होंगी। पहली चर्चा का शीर्षक “महिलाओं द्वारा संचालित पशुधन और डेयरी क्षेत्र” है। यह चर्चा पशुधन और डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की परिवर्तनकारी भूमिका का पता लगाएगी, जिसमें लैंगिक समावेशिता और सशक्तिकरण पर जोर दिया जाएगा। दूसरी पैनल चर्चा का विषय “स्थानीय पशु चिकित्सा सहायता के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाना” है। यह चर्चा स्थानीय पशु चिकित्सा सहायता प्रणालियों को मजबूत करके किसानों को सशक्त बनाने की रणनीतियों पर गहन चर्चा करेगी, जो भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण घटक है।
इस विशाल आयोजन में देश भर के किसान, दुग्ध संघ, डेयरी सहकारी समितियां आदि भाग लेंगे। राष्ट्रीय दुग्ध दिवस 2024 वैश्विक डेयरी क्षेत्र में भारत के नेतृत्व का जश्न मनाता है। इसमें पशुधन और डेयरी उद्योगों में सतत एवं समावेशी विकास के महत्व पर जोर दिया जाता है। यह डेयरी किसानों और हितधारकों के समर्पण को मान्यता देता है, साथ ही नवाचार को प्रेरित करता है और मजबूत साझेदारी को बढ़ावा देता है। यह आयोजन उन लोगों की उपलब्धियों का सम्मान करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है, जो इस क्षेत्र में निरंतर सहयोग और प्रगति को प्रोत्साहित करते हैं।
युवाओं में राष्ट्रप्रेम एवं अनुशासन की भावना को जागृत करता है एनसीसी : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
मुख्यमंत्री 76वें एनसीसी दिवस समारोह में हुए शामिल
रायपुर | मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर के पुलिस परेड ग्राउण्ड में आयोजित 76वें एनसीसी दिवस समारोह में शामिल हुए। एनसीसी दिवस समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि एनसीसी युवाओं में राष्ट्रप्रेम और अनुशासन की भावना को जगाता है और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है। मुख्यमंत्री ने एनसीसी कैडेट्स की परेड की सलामी ली। एनसीसी दिवस कार्यक्रम में एनसीसी के छात्र-छात्राओं द्वारा मार्च पास्ट, सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनोहारी प्रस्तुति के साथ ही हार्स राइडिंग, एरो मॉडलिंग, सेक्शन मूवमेंट, सीमा फोर जैसे प्रदर्शन किये गए। मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले केडेट्स को पुरस्कृत किया। साथ ही 76वें एनसीसी दिवस समारोह के मौके पर प्रकाशित पुस्तक का विमोचन किया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी को 76वें एनसीसी दिवस की बहुत-बहुत बधाई देते हुए कहा कि आज एक बार फिर मुझे आप लोगों के बीच आने का अवसर मिला है। आप लोगों के बीच जब भी आता हूं, नई ऊर्जा से भर जाता हूं। आज आप लोगों ने एनसीसी दिवस पर शानदार परेड मार्च किया, एरो मॉडलिंग प्रदर्शन किया, घुड़सवारी का प्रदर्शन किया और सेक्शन अटैक का प्रदर्शन किया। आप लोगों के प्रदर्शन से मैं भी जोश से भर गया हूं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मुझे अच्छी तरह याद है कि नई दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होकर जब हमारे कैडेट लौटे थे, तब भी आप लोगों से मुलाकात हुई थी। गणतंत्र दिवस के मौके पर नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ के एनसीसी कैडेटों को परेड करते हुए देखना बड़ा ही सुखद होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे कैडेट भारत के विभिन्न राज्यों से आए एनसीसी कैडेटों के साथ कदम से कदम मिलाते हुए जब तिरंगे को सलामी देते हैं तो प्रत्येक छत्तीसगढ़िया गर्व से भर उठता है। हमारे देश की यही खूबसूरती है। अलग-अलग भाषा और अलग-अलग क्षेत्रों के होने के बावजूद हम सभी में राष्ट्रप्रेम की भावना कूट कूट कर भरी हुई है। एनसीसी इसी राष्ट्र प्रेम को सींचता है, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एनसीसी एक ऐसा संगठन है जो युवाओं को अनुशासन सिखाता है, उनके चरित्र का निर्माण करता है, उन्हें साहसी बनाता है और निःस्वार्थ सेवा के लिए प्रेरित करता है। एनसीसी का ध्येय वाक्य ही है- ‘एकता और अनुशासन’। एनसीसी हमारे युवाओं को सेना और अन्य सुरक्षा बलों में अपना कैरियर बनाने के लिए प्रेरित करता है।
युवाओं को सेना में कैरियर निर्माण के लिए प्रेरित करने के लिए आप लोगों ने अभी कुछ दिनों पहले राजधानी रायपुर में भव्य सैन्य प्रदर्शनी का आयोजन भी देखा होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे यह देखकर भी बहुत खुशी होती है कि एनसीसी में बालिकाओं की भागीदारी बढ़ रही है। प्रदेश में अनेक गर्ल्स बटालियन संचालित की जा रही है, यह बड़ी प्रसन्नता की बात है। हमारी बेटियों ने राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक एनसीसी का नेतृत्व कर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया है। भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। आज भारत की उपलब्धियों का गौरवगान पूरी दुनिया कर रही है। इन उपलब्धियों में निश्चित रूप से युवाओं की सबसे बड़ी भागीदारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य देश के सामने रखा है। हमारे ऊर्जावान युवाओं के योगदान से हम सब अवश्य ही विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इनमें से बहुत से कैडेट सेना में अपना कैरियर बनाएंगे। हमने अपनी नई औद्योगिक नीति में अग्नि वीरों के लिए विशेष प्रावधान किए हैं। नई शिक्षा नीति में शिक्षा को कौशल विकास से जोड़ा है। जिससे आप लोग विभिन्न क्षेत्रों के माध्यम से देश की सेवा कर सकें।
रायपुर के साथ बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर, जशपुर की हवाई पट्टियों में एनसीसी कैडेटस को हवाई उड़ान का दिया जाना चाहिए |
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्तमान में हमारे एनसीसी कैडेटों को हवाई उड़ान का अनुभव और प्रशिक्षण रायपुर में दिया जाता है, जिसका खर्च छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वहन किया जाता है। प्रदेश में रायपुर के साथ-साथ बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर, जशपुर में भी हवाई पट्टियां हैं, यह प्रशिक्षण वहां भी शुरू किया जा सकता है। इससे इन अंचलों के कैडेटों को भी लाभ होगा।
मेजर जनरल विकांत एम. धुमने ने कहा कि छत्तीसगढ़ के 900 एनसीसी कैडेट्स का चयन अग्निवीर में हुआ है, यह यहां के कैडेटों के उच्च कोटि के प्रशिक्षण को प्रतिबिंबित करता है।
कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेसी, ब्रिगेडियर वाय. एस. चौहान, एस. एम. एनसीसी ग्रुप समादेशक, मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त महानिदेशक मेजर जनरल विकांत एम. धुमने, प्रशासनिक अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रदीप कुमार, विभिन्न महाविद्यालयों, विद्यालयों के एनसीसी कैडेट्स के अलावा सैन्य अधिकारी, एनसीसी अधिकारी, पीआई स्टाफ, गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) कल अपना 76वां स्थापना दिवस मनाएगा : रक्षा सचिव ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी
नई दिल्ली | 1948 में स्थापित दुनिया का सबसे बड़ा वर्दीधारी युवा संगठन, राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) 24 नवंबर 2024 को पारंपरिक उत्साह के साथ अपना 76वां स्थापना दिवस मना रहा है। इस पवित्र अवसर पर रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, इंडिया गेट, नई दिल्ली में पूरे एनसीसी समुदाय की ओर से शहीद नायकों को पुष्पांजलि अर्पित की और श्रद्धांजलि दी।
इस अवसर पर बोलते हुए रक्षा सचिव ने कहा कि एनसीसी ने कैडेटों की संख्या 3 लाख तक बढ़ाने में सराहनीय प्रयास किए है और आने वाले वर्षों में यह संख्या 20 लाख तक पहुंच जाएगी। उन्होंने भारत सरकार की महत्वपूर्ण पहल, विकसित भारत अभियान में एनसीसी की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "एनसीसी 'युवा शक्ति - विकसित भारत' के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए वर्तमान युवाओं को भावी जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में अपने अथक प्रयास जारी रखे हुए है।"
इस 76वें स्थापना दिवस पर कैडेट विभिन्न शहरों में मार्च पास्ट में भाग ले रहे हैं और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। परंपरा के अनुसार, पूरे भारत में एनसीसी दिवस मनाया जा रहा है और पूरे भारत में ‘रक्तदान शिविर’ आयोजित किए जा रहे हैं। इस वर्ष रक्तदान की मात्रा पिछले वर्ष के 50,000 यूनिट रक्त दान के आंकड़े को पार करने की संभावना है। इसके अलावा, वृक्षारोपण अभियान, प्रतिमाओं की सफाई, स्वच्छता ही सेवा, नशा मुक्ति अभियान आदि जैसे विभिन्न सामाजिक गतिविधियों और सांस्कृतिक जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1.76 करोड़ से अधिक स्कूली छात्र प्रोजेक्ट वीर गाथा 4.0 में भाग ले रहे
नई दिल्ली | सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1.76 करोड़ से अधिक स्कूली छात्रों ने प्रोजेक्ट वीर गाथा 4.0 में उत्साहपूर्वक भाग लिया है। छात्रों ने सशस्त्र बलों के अधिकारियों/कर्मियों की बहादुरी और बलिदान के सम्मान में कविताएँ, पेंटिंग, निबंध, वीडियो आदि भेजे हैं।
प्रोजेक्ट वीर गाथा की शुरुआत 2021 में वीरता पुरस्कार विजेताओं की वीरता, निस्वार्थ बलिदान और साहस की प्रेरक कहानियों और इन बहादुरों की जीवन गाथाओं को छात्रों के बीच प्रसारित करने के उद्देश्य से की गई थी ताकि उनमें देशभक्ति की भावना पैदा हो सके। प्रोजेक्ट वीर गाथा ने स्कूली छात्रों को वीरता पुरस्कार विजेताओं के वीरतापूर्ण कार्यों और बलिदान पर आधारित रचनात्मक परियोजनाओं/गतिविधियों को करने के लिए एक मंच प्रदान करके इस महान उद्देश्य को आगे बढ़ाया।
वीर गाथा परियोजना के तीन संस्करण क्रमशः 2021, 2022 और 2023 में आयोजित किए जा चुके हैं। वीर गाथा परियोजना 4.0 के अंतर्गत अब तक निम्नलिखित गतिविधियाँ आयोजित की जा चुकी हैं:
स्कूल स्तर पर गतिविधियाँ: स्कूलों ने विभिन्न परियोजनाएं/गतिविधियाँ आयोजित की हैं (16.09.2024 से 31.10.2024 तक) और प्रत्येक स्कूल से कुल 4 सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टियाँ MyGov पोर्टल पर अपलोड की हैं।
इसके साथ ही, स्कूली छात्रों के बीच वीर नायकों और गुमनाम कहानियों के बारे में ज्ञान बढ़ाने के लिए, रक्षा मंत्रालय ने अपने क्षेत्रीय संगठनों या सेना/नौसेना/वायु सेना के माध्यम से देश भर के स्कूलों के लिए वर्चुअल बैठकें/आमने-सामने जागरूकता कार्यक्रम/सत्र आयोजित किए हैं।
अपनी शुरुआत से ही इस परियोजना में देश भर के छात्रों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। उल्लेखनीय है कि वीर गाथा परियोजना (प्रथम संस्करण) में 8 लाख छात्रों ने भाग लिया था; दूसरे संस्करण में 19.5 लाख छात्रों ने भाग लिया और तीसरे संस्करण में 1.36 करोड़ छात्रों ने भाग लिया।
वीर गाथा परियोजना संस्करण I और II के दौरान, 25 विजेताओं (सुपर 25) का चयन किया गया और उनका सम्मान शिक्षा मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में किया गया। वीर गाथा परियोजना 3.0 में, राष्ट्रीय स्तर पर 100 विजेताओं (सुपर 100) का चयन किया गया। इस वर्ष भी, परियोजना वीर गाथा 4.0 के तहत, 100 विजेताओं का चयन किया जाएगा और उनका सम्मान शिक्षा मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में संयुक्त रूप से किया जाएगा। प्रत्येक विजेता को 10,000 रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। इसके अलावा, जिला स्तर पर 4 विजेता और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर 8 विजेता होंगे और ऐसे सभी विजेताओं को संबंधित जिला और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश द्वारा सम्मानित किया जाएगा।
बदलाव का सबसे बड़ा केंद्र है शिक्षा : उपराष्ट्रपति
अनुशासन एवं मानव निर्माण के लिए युवाओं में श्रेष्ठ गुणों का संचार आवश्यक - उपराष्ट्रपति
भारत की आत्मा ग्रामीण अंचल में है - उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति ने कहा, बच्चों को कौशलयुक्त बनाएगी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020
विश्व बाल दिवस के अवसर पर उपराष्ट्रपति ने जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्रों को संबोधित किया।
नई दिल्ली | उपराष्ट्रपति ने आज कहा कि शिक्षा समाज में बदलाव और समानता स्थापित करने का सबसे बड़ा केंद्र है। उन्होंने कहा, “शिक्षा समाज में समानता को बढ़ावा देती है और असमानता को समाप्त करती है। शिक्षा हमें जो चरित्र प्रदान करती है, वही हमें परिभाषित करता है।”
राजस्थान के झुंझुनूं जिले के काजरा स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्रों को संबोधित करते हुए विश्व बाल दिवस के अवसर पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अनुशासन, संस्कार और मानव निर्माण के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा, “आपकी उम्र में संस्कारी बनना आवश्यक है। माता-पिता का सम्मान करना, गुरूजनों को प्रणाम करना, आपसी भाईचारे को बढ़ाना और अनुशासन दिखाना आपके जीवन के अभिन्न हिस्से होने चाहिए। मानव निर्माण के लिए श्रेष्ठ आदतों का संचार आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं के लिए उभरते अवसरों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “आज की सरकारी नीतियों ने आपकी प्रतिभा को चमकाने के लिए अनेक मंच प्रदान किए हैं।”
छात्रों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “आप सभी ग्रामीण भारत की रीढ़ की हड्डी हैं। याद रखें, भारत की आत्मा ग्रामीण आंचल में है। हमारी जड़ें ग्रामीण भारत में ही मजबूत होती हैं। हमारा अन्नदाता किसान भी ग्रामीण क्षेत्रों में ही रहता है।” उन्होंने कहा कि पंचायत राज और नगर पालिका जैसी संस्थाओं के माध्यम से भारत ने लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक सशक्त किया है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने इसे एक “गेम-चेंजर” बताया। उन्होंने कहा, “तीन दशकों के बाद भारत को एक नई शिक्षा नीति मिली है, जिसका उद्देश्य छात्रों को केवल पुस्तकों और डिग्रियों के बोझ से मुक्त करना और उन्हें कौशलयुक्त बनाना है। यह नीति भारत को 2047 तक विकसित भारत के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी।”
उन्होंने छात्रों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करते हुए आग्रह किया कि वे अपने दादा-दादी और नाना-नानी के नाम पर पेड़ लगाएं। उन्होंने संस्थानों से अपील की कि वे इस नेक कार्य को ‘मिशन मोड’ में लेकर चलें। उपराष्ट्रपति ने कहा, “जब आप इस विद्यालय से बाहर जाएं, तो आपको ऐसा अनुकरणीय आचरण दिखाना चाहिए, जो इस विद्यालय के गौरव को बढ़ाए।”
उपराष्ट्रपति ने अंत में बच्चों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और उनकी कार्यशैली की सराहना की, जिसने भारत के युवाओं को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए मंच प्रदान किया है।
इस अवसर पर राजस्थान सरकार के शहरी विकास विभाग के राज्य मंत्री श्री झाबर सिंह खर्रा, नवोदय विद्यालय समिति की आयुक्त एवं शिक्षा मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती प्राची पांडेय, जेएनवी काजरा, झुंझुनूं के प्राचार्य श्री संजय कुमार यादव एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी और गुप्ता-क्लिंस्की इंडिया इंस्टीट्यूट के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात की
धर्मेंद्र प्रधान ने जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के साथ शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग की संभावना तलाशी
भारत में जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी कैंपस की स्थापना पर चर्चा हुई
नई दिल्ली | केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अमेरिका के मैरीलैंड के बाल्टीमोर स्थित जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय (जेएचयू) के अध्यक्ष रोनाल्ड जे. डेनियल के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। जेएचयू की आंतरिक इकाई, गुप्ता क्लिंस्की इंडिया इंस्टीट्यूट (जीकेआईआई) के अधिकारी भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। इसका उद्देश्य अनुसंधान, शिक्षा, नीति और व्यवहार के माध्यम से जेएचयू समुदाय को भारतीय भागीदारों के साथ जोड़ना है।
बैठक में उच्चतर शिक्षा सचिव श्री के. संजय मूर्ति; शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी 2020) द्वारा संभव हुए परिवर्तनकारी अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इससे भारत में शिक्षा क्षेत्र की उन्नति का मार्ग प्रशस्त हुआ है। प्रधान ने भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ मजबूत साझेदारी बनाने, ज्ञान के वैश्विक आदान-प्रदान में योगदान देने, विशेष रूप से दोहरे और संयुक्त डिग्री कार्यक्रमों, छात्रों और शिक्षकों की दो-तरफा निर्बाध गतिशीलता, डेटा विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भविष्य की तकनीकों जैसे उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान साझेदारी के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये सहयोग दोनों देशों के छात्रों के बीच नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की क्षमता बढ़ाएंगे।
चर्चा जेएचयू और उच्च शिक्षा के अग्रणी भारतीय संस्थानों के बीच शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग को मजबूत करने पर भी केंद्रित थी। प्रतिनिधिमंडल ने भारत में जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी कैंपस स्थापित करने पर सक्रिय रूप से चर्चा की।
डेनियल और उनकी टीम की यात्रा भारत-अमेरिका शैक्षिक सहयोग के महत्व पर प्रकाश डालती है। भारत के कई शहरों में यात्रा के हिस्से के रूप में, प्रतिनिधिमंडल विभिन्न भारतीय विश्वविद्यालय परिसरों का दौरा करेगा और भारत में जेएचयू की गतिविधियों को मजबूत करने के प्रयासों में सरकार के प्रमुख अधिकारियों, शिक्षाविदों और कांसुलर प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करेगा।
12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में प्रतिष्ठित शिक्षाविद और प्रशासक शामिल हैं जैसे कि फ्रिट्ज़ डब्ल्यू. श्रोएडर, डेवलपमेंट एंड एलुमनी रिलेशंस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष; अलेक्जेंडर ट्रायंटिस, कैरी बिजनेस स्कूल के डीन;जुड वाल्सन, ब्लूमबर्ग स्कूल में अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विभाग के अध्यक्ष; श्रीदेवी सरमा, व्हिटिंग स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग में स्नातक शिक्षा के उप डीन; जॉन गोल्डस्टीन, अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों के लिए विकास के वरिष्ठ एसोसिएट निदेशक; और अमिता गुप्ता, जॉन्स हॉपकिंस विश्वविद्यालय में संक्रामक रोगों के प्रभाग की निदेशक और गुप्ता-क्लिंस्की इंडिया इंस्टीट्यूट (जीकेआईआई) की सह-संस्थापक।
जेएचयू के भारतीय मूल के प्रमुख संकाय सदस्यों जैसे कि बाल चिकित्सा एवं अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य के प्रोफेसर माथुराम संतोषम और मेडिसिन के प्रोफेसर तथा नेफ्रोलॉजी प्रभाग के निदेशक चिराग पारीख ने भी इसमें भाग लिया। प्रतिनिधिमंडल में जीकेआईआई के अधिकारी और इसके सलाहकार बोर्ड के सदस्य राज और कमला गुप्ता, दीपक राज, कुणाल पाल और नीतिशा बेसरा शामिल थे।