‘करसाय ता बस्तर बरसाए ता बस्तर’ यानि ‘खेलेगा बस्तर – जीतेगा बस्तर’।
रायपुर। पहली ही बार में बस्तर ओलंपित में 7 जिलों के एक लाख 65 हजार खिलाड़ियों ने भाग लिया है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है – यह हमारे युवाओं के संकल्प की गौरव-गाथा है। एथलिट्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबाल, हाकी,वेटलिफ्टिंग कराते कबड्डी, खो-खो और वालीबाल हर खेल में हमारे युवाओं ने अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात के प्रसारण में इसका विशेष रुप से उल्लेख किया।
माओवाद के गढ़ रहे छत्तीसगढ़ के बस्तर में एक अनूठे ओलंपिक की शुरुआत हुई है। इस आयोजन में अद्भुत प्रदर्शन करने वाले कई खिलाड़ियों की कहानियां बहुत प्रेरित करने वाली हैं। #MannKiBaat pic.twitter.com/fbnlT2ZamI
— Narendra Modi (@narendramodi) December 29, 2024
कारी कश्यप की कहानी प्रेरित करती है। एक छोटे से गांव से आने वाली कारी ने तीरंदाजी में रजत पदक जीता है। वे कहती हैं “बस्तर ओलंपिक ने हमें सिर्फ खेल का मैदान ही नहीं, जीवन में आगे बढ़ने का अवसर दिया है”। सुकमा की पायल कवासी की बात भी कम प्रेरणादायक नहीं है। Javelin Throw में स्वर्ण पदक जीतने वाली पायल कहती हैं कि “अनुशासन और कड़ी मेहनत से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है”। सुकमा के दोरनापाल के पुनेम सन्ना जी की कहानी तो नए भारत की प्रेरक कथा है। एक समय नक्सली प्रभाव में आए पुनेम जी आज व्हीलचेयर पर दौड़कर मेडल जीत रहे हैं। उनका साहस और हौसला हर किसी के लिए प्रेरणा है। कोडागांव के तीरंदाज रंजू सोरी जी को ‘बस्तर youth Icon’ चुना गया है। उनका मानना है – बस्तर ओलंपिक दूरदराज के युवाओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का अवसर दे रहा है।
बस्तर ओलंपिक केवल एक खेल आयोजन नहीं है। यह एक ऐसा मंच है जहां विकास और खेल का संगम हो रहा है। जहां हमारे युवा अपनी प्रतिभा को निखार रहे हैं और एक नए भारत का निर्माण कर रहे हैं।