सफाई के नाम पर गंदगी का खेल, वाराणसी नगर निगम में कबाड़ घोटाले से हड़कंप
2026-02-07 12:30 PM
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वाराणसी| वाराणसी नगर निगम में कबाड़ घोटाले ने शहर को हिला दिया है। महज डेढ़ साल पहले खरीदी गई महंगी ई-गार्बेज मशीनें कबाड़ घोषित कर दी गईं, और जब जांच हुई तो सामने आया कि इन गाड़ियों से इंजन, बैट्री और पहिए तक गायब हो चुके हैं। यह मामला न केवल नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि भ्रष्टाचार और लापरवाही की गहरी परतें भी उजागर करता है।
25 ई-गार्बेज मशीनें बनी कबाड़
साल 2022 में नगर निगम ने 25 ई-गार्बेज मशीनें खरीदी थीं। इनका उद्देश्य शहर की सफाई व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाना था। लेकिन महज डेढ़ साल के भीतर ही इन मशीनों को कबाड़ घोषित कर दिया गया। कई गाड़ियों से जरूरी पुर्जे जैसे इंजन, बैट्री और पहिए गायब पाए गए। यह स्थिति देखकर साफ है कि मशीनों को कबाड़ घोषित करने का फैसला बिना किसी तकनीकी रिपोर्ट या विशेषज्ञ राय के लिया गया।
बिना रिपोर्ट के डंपिंग यार्ड में गाड़ियां
महंगी गाड़ियों को बिना किसी एक्सपर्ट रिपोर्ट के सीधे डंपिंग यार्ड में डाल दिया गया। स्क्रैप लिस्ट में शामिल कर इन्हें नीलामी की लिस्ट में डाल दिया गया। लेकिन जब नीलामी समिति ने स्थलीय निरीक्षण किया तो घोटाले का असली चेहरा सामने आया। यह खुलासा नगर निगम की कार्यशैली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाता है।
तीन कर्मचारियों पर गिरी गाज
घोटाले के उजागर होते ही नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने कड़ी कार्रवाई की। परिवहन विभाग के तीन कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित की गई है। नगर आयुक्त ने साफ किया है कि जांच के दौरान यदि किसी अन्य की भी लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
जांच रिपोर्ट और जिम्मेदारी
नगर आयुक्त ने इस पूरे प्रकरण की जांच अपर नगर आयुक्त अमित कुमार को सौंपी है। उन्हें 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। सस्पेंड किए गए तीनों कर्मचारी जांच अधिकारी से अटैच रहेंगे। यह कदम इस बात का संकेत है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और दोषियों को बचाने का कोई प्रयास नहीं होगा।
नीलामी समिति का खुलासा
नीलामी समिति में शामिल उपसभापति नरसिंह दास, पार्षद हनुमान प्रसाद और मदन मोहन दुबे ने यार्ड का स्थलीय निरीक्षण किया। उनके निरीक्षण में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त 2022 में खरीदी गई 25 ई-गार्बेज मशीनों को डेढ़ साल में ही कबाड़ घोषित कर दिया गया। वहीं एक गोल्फ कोर्ट वाहन का केवल चेसिस ही पाया गया, जबकि उसके इंजन, बैट्री और पहिए गायब थे।
वाराणसी नगर निगम का यह कबाड़ घोटाला न केवल वित्तीय अनियमितताओं का मामला है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें भी उजागर करता है। महंगी मशीनों को इतनी जल्दी कबाड़ घोषित करना और उनके जरूरी पुर्जों का गायब होना इस बात का प्रमाण है कि सिस्टम में कहीं न कहीं गंभीर गड़बड़ी है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि इस घोटाले के असली जिम्मेदार कौन हैं और उन्हें क्या सजा मिलेगी।