जैन मुनि आचार्य विद्यासागर महाराज ने त्यागा शरीर...अंतिम दर्शन को उमड़े जैन समाज के लोग
रायपुर। छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरि पर्वत में जैन मुनि विद्यासागर महाराज ने अपना शरीर त्याग दिया। आचार्य विद्यासागर ने पूर्ण जाग्रतावस्था में उन्होंने आचार्य पद का त्याग करते हुए तीन दिनों का उपवास लिया था। अखंड मौन धारण करते हुए शनिवार की रात 2:35 मिनट पर महाराज ने अपना शरीर त्याग दिया। उनके शरीर त्यागने की खबर मिलने के बाद जैन समाज के लोग उनके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में चंद्रगिरि पर्वत पर जुट रहे हैं। आज (रविवार) दोपहर 1 बजे अंतिम संस्कार किया जाएगा।
जैन मुनि आचार्य विद्यासागर महाराज का जन्म 10 अक्टूबर 1946 शरद पूर्णिमा के दिन कर्नाटक के बेलगाम जिले के सदलगा गांव में एक जैन परिवार में हुआ था। जन्म में बालक विद्याधर जी का बचपन से ही धर्म में गहरी रुचि थी। जिस घर में उनका जन्म हुआ था, अब वहां एक मंदिर और संग्रहालय है। 4 बेटों में दूसरे नंबर के बेटे विद्याधर ने कम उम्र में ही घर का त्याग कर दिया था। 1968 में 22 साल की उम्र में अजमेर में आचार्य शांतिसागर से जैन मुनि के रूप में दीक्षा ले ली।