'आदिगाथा' के साथ मराठी लघु नाटिकाओं के इंद्र धनु का मंचन...
2024-05-17 09:16 PM
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रायपुर। महाराष्ट्र मंडल में आयोजित तीन दिवसीय रंग संस्कार महोत्सव में आदिगाथा और इंद्र धनु के मंचन ने खूब तालियां बटोरी। पहले ही दिन उद्घाटन सत्र में किशोर वैभव द्वारा लिखित एवं निर्देशित नाटक आदिगाथा का मंचन हुआ। तत्पश्चात प्रसन्न निमोणकर निर्देशित सात लघु नाटिकाओं रक्तदान, विसंवाद, कलावंत, हरवलेली, तो पोरगा, मुलाखात अंबुताई ची और पत्र लिवन्यास कारण की का इंद्र धनु का मंचन किया गया।
इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन और नटराज की पूजा के साथ किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विवि के कुलपति बल्देव भाई शर्मा थे। विशिष्ट अतिथि के रुप में सविता चंद्राकर उपस्थित थीं। इस दौरान रंग संस्कार भारती के प्रांतध्यक्ष रिखी क्षत्रिय, अखिल भारती नाट्य संयोजक प्रमोद पवार, महोत्सव संयोजक योगेश अग्रवाल और संस्कार भारती के जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम चंद्राकर मंचस्थ थे।

संस्कार भारती के जिला अध्यक्ष डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकार ने बताया किशोर वैभव द्वारा लिखित एवं निर्देशित नाटक आदिगाथा के सूत्रधार- होमेश्वरी ध्रुव, भरत मुनि - बी अभिलाष, रूपदक्ष या देवदमन- प्रांजल राजपूत, राजा किशोर वैभव, रानी - चंचल ध्रुव, दासी - ऋषिता शर्मा, अमात्य - पंकज पाटले, विप्र - सुरेश गुप्ता, सुतनुका - वंशिका डहरवाल, दो सैनिक - दिव्यांशु तिवारी, यशादित्य सोनी, दो मंत्री- विंध्याचल गुप्ता, नतेश धीमर,यशवंत, कालीदास - राजेश निषाद, नगर वासी की भूमिका में किंजल साहू, श्वेता वेद, देवाशीष , श्वेता ध्रुव, मुस्कान मानिकपुरी, वर्षा कुंजाम, यश कंवर ने अपनी प्रस्तुति दी।

महाराष्ट्र नाट्य मंडल की सात लघु मराठी नाटिकाओं का इंद्र धनु (इंद्रधनुष) दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहा। महाराष्ट्र नाट्य मंडल के सचिव व सभी नाटकों के निर्देशक प्रसन्न निमोणकर ने बताया कि इंद्र धनु का पहला रंग 'रक्तदान' होगा। 'विसंवाद' में दिशा सूचक संदेश, 'कलावंत में पिता- पुत्र का अंर्तद्वंद्व, मात्र स्पर्श से बनता रिश्ता 'हरवलेली', चौंकाने वाला संदेश 'तो पोरगा' में, नारी शिक्षा का संदेश देती अंबुताई, हंसाता- गुदगुदाता 'पत्र लिहण्यास कारण की' और नेपत्थ में....की प्रस्तुति दी गई। नेपथ्य में मार्गदर्शक अनिल श्रीराम कालेले हैं। रंगभूषा वंदना निमोणकर, वेशभूषा अपर्णा कालेले, संगीत संयोजन भगीरथ कालेले और निर्मिती डॉ. सौ. अभया जोगलेकर है।