कवर्धा सड़क हादसे पर हाईकोर्ट ने मांगा शपथ पत्र.... पूछा हादसे रोकने क्या उपाय कर सकते हैं, मीडिया को दिया यह मैसेज
रायपुर। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के पंडरिया ब्लॉक में हुए सड़क हादसे में 19 आदिवासियों की मौत के मामले को जनहित याचिका के रूप में स्वतः संज्ञान लेकर आज प्रारंभिक सुनवाई की। चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने प्रकरण की सुनवाई करते हुए राज्य शासन, राष्ट्रीय राजमार्ग, परिवार विभाग व कलेक्टर सहित सभी पक्षकारों से शपथ पत्र में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 26 जून को होगी।
कवर्धा जिले में नेउर– बाहपानी मार्ग पर बंजारी घाट में घुमावदार मोड़ पर ब्रेक फेल होने से पिकअप अनियंत्रित होकर पत्थर से टकराते हुए खाई में जा गिरी। इस घटना में 15 महिलाओं,तीन नाबालिक लड़कियों व एक पुरुष की मौत गई। जबकि दस लोग घायल है। सभी मृतक आदिवासी बैगा समुदाय से ताल्लुकात रखते थे। इस संरक्षित समुदाय को राष्ट्रपति ने गोद लिया है।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने कहा कि जिस तरह से पिकअप में इतने लोगों को बैठाया गया था और वह पलट गई यह गंभीर घटना है। इस तरह के हादसे रोकने के लिए राज्य सरकार, परिवहन विभाग, नेशनल हाईवे, व कलेक्टर समेत अन्य पक्षकार क्या उपाय कर सकते हैं? इस पर अपना शपथ पत्र दें। साथ ही यह भी बताएं कि देश में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसे रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के द्वारा जारी गाइडलाइन के तहत राज्य सरकार ने क्या-क्या कार्यवाही की है, इसकी भी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। मामले की अगली सुनवाई 26 जून को होगी।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने मीडिया के लिए भी बात कही। बेंच ने कहा कि पत्रकार अक्सर नेगेटिव खबरें ही ज्यादा छापते हैं, जबकि पॉजिटिव चीजों में भी काफी काम हो रहे है। मीडिया को पॉजिटिव चींजे भी छापनी चाहिए। साथ ही अदालत ने मीडिया संस्थानों से भी आग्रह करते हुए कहा कि आप लोग हादसों की भयानक तस्वीरें फ्रंट पेज पर छापते है, इससे समाज में नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए इन खबरों को अंदर के पेज पर प्रकाशित किया जाना चाहिए।