छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ पुलिस ने शुरू किया हेलमेट बैंक, थाना आइये, पहचान पत्र दिखाइये और हेलमेट ले जाइये

रायपुर। देश में रुपयों को जमा करने के लिए आपने बैंक सुना होगा, लेकिन छत्तीसगढ़ में एक ऐसा बैंक है जहां रुपये-पैसे नहीं बल्कि हेलमेट है। जी हांआप यहां पहचान पत्र दिखाकर हेलमेट ले सकते हैं और उपयोग करने के 24 घंटे बाद इसे वापस करना होगा। इसके लिए आपको कोई शुल्क भी नहीं देना होगा। सड़क दुर्घटनाओं में हो रही मौत के आंकड़ों को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश में पहले हेलमेट बैंकके अनूठे अभियान का आगाज़ बिलासपुर पुलिस ने किया है।

बिलासपुर एसपी रजनेश सिंह ने अनूठे अभियान की शुरुआत करते हुए इसे हेलमेट बैंकका नाम दिया है और इसकी शुरुआत चकरभाठा थाना से की गई है। एसपी ने कहा कि सड़कों पर सर्वाधिक चलने वाले वाहनों में दोपहिया वाहन है। यह हर स्तर के लोगों की पहुंच के अंदर है। लोग छोटी से लेकर बड़ी यात्रा के लिए इसी वाहन का प्रयोग करते हैं, लेकिन दुर्भाग्य भी इस बात का है कि सुरक्षा मानकों के अभाव में दुर्घटना के शिकार भी दोपहिया वाहन वाले ही होते हैं।

एसपी ने बताया कि यह हेलमेट बैंकथाना सकरी, थाना कोनी और थाना सरकंडा में भी प्रारंभ किए गए हैं। चकरभाठा थाना परिसर में हेलमेट बैंक का उद्घाटन करते हुए एसपी रजनेश सिंह ने कहा कि अब कोई भी व्यक्ति अपनी यात्रा के दौरान इस बैंक से हेलमेट अपना परिचय पत्र दिखाकर ले सकता है और यह हेलमेट उसे 24 घंटे के अंदर पुनः वापस करना होगा, जो पूर्णता नि:शुल्क होगा। एसपी सिंह ने हेलमेट बैंकउद्घाटन करते हुए एक आदर्श वाक्य दिया। अब सड़कों पर खून की एक बूंद नहींहेलमेट सुरक्षित यातायात की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण मानक उपकरण है। यह प्रयास सभी के लिए अनुकरणीय होगा और सड़क दुर्घटना पर अंकुश लगाने की दिशा में कारगर साबित होगा।

कार्यक्रम में ASP (शहर) उमेश कश्यप, ASP (ग्रामीण) अनुज एवं ASP (यातायात) नीरज चंद्राकर, सड़क सुरक्षा समिति के सदस्यों में अतीस पाल सिंह, लेफ्टिनेंट आशीष शर्मा, नम्रता शर्मा, आर्यन तिवारी, विकास वर्मा, जावेद अली उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान ही एक दर्जन लोगों ने हेलमेट बैंकसे हेलमेट लेकर गंतव्य के लिए रवाना हुए। आभार प्रदर्शन यातायात बिलासपुर के प्रभारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीरज चंद्राकर ने कहा कि पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह का यह प्रयास सिर्फ छत्तीसगढ़ प्रदेश ही नहीं संपूर्ण देश में मिल का पत्थर साबित होगा। सड़क हादसे में कमी लाने यह एक कारगर उपाय साबित होगा। कार्यक्रम का संचालन यातायात के सब इंस्पेक्टर उमाशंकर पांडे ने किया।