दिव्य महाराष्ट्र मंडल

बेरोजगारी शब्द संस्कृत के डिक्शनरी में नहीं पाई जातीः डॉ मंजरी बक्षी

संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में मनाया गया विश्व उद्यमिता दिवस

रायपुर। बेरोजगारी शब्द संस्कृत के डिक्शनरी में नहीं पाई जाती है। नौकरी शब्द की सही समझ हमें नहीं है। सरकार नौकरी देगी तभी हम नौकरी करेंगे, इस समझ से बाहर आना होगा। उद्यमिता स्वरोजगार स्वावलंबन औद्योगीकरण को अपनाना होगा। अपने आसपास की समस्याओं को देखकर उसको हल करने की सोच स्टार्टअप में रूपांतरित होती है। उक्ताशय के विचार स्वदेशी जागरण मंच की प्रांत विचार विभाग प्रमुख डॉ मंजरी बक्षी ने विश्व उद्यमिता दिवस पर 21 अगस्त को संत ज्ञानेश्वर विद्यालय  में आयोजित कार्यक्रम में कही। कार्यक्रम का आयोजन संत ज्ञानेश्वर विद्यालय, स्वदेशी जागरण मंच एवं स्वावलंबी भारत अभियान की ओर से किया गया।

डॉ बक्षी ने देश के विकास में युवा शक्ति की भागीदारी पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि बेरोजगारी एक विकराल समस्या बनते जा रही है। स्वावलंबी भारत अभियान का उद्देश्य वर्ष 2030 तक बेरोजगारी मुक्त, गरीबी मुक्त एवं समृद्धि युक्त भारत का निर्माण 2030 तक करना है।  

डॉ बक्षी  ने आगे कहा कि भारत की आर्थिक स्थिति व रोजगार का सिंहावलोकन करना जरूरी है। पैसों की कमी से कोई भी दुखी या तनाव में ना रह जाए यह युवाओं की जिम्मेदारी है  अंत में उन्होंने "स्वदेशी अपनाओ विदेशी भगाओ" का नारा एवं स्वदेशी विदेशी सामानों की लिस्ट बच्चों में और शिक्षकों में वितरित की।

कार्यक्रम में प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने सूतमाला से डॉ बक्षी और स्वदेशी जागरण मंच के चिराग यादव का सम्मान किया। प्राचार्य ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में बताया कि भारत एक समृद्ध शैली देश तथा उन्नत धार्मिक व प्रशासनिक आध्यात्मिक देश था। शिक्षिका आराधना लाल भी कार्यक्रम में उपस्थिति रही तथा उन्होंने विश्वास दिलाया कि हमारे विद्यालय के बच्चे स्वदेशी आंदोलन व जागरण को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे ,कार्यक्रम का संचालन शिक्षिका 'निदा सुल्तान' ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन तृप्ति अग्निहोत्री ने दिया।